डिजिटल विमर्श
Home » लेख » स्तम्भ » सामाजिक चिंतन » अबला नहीं में एक नारी हूँ

अबला नहीं में एक नारी हूँ

ना तो मैं अबला नादान हूँ
ना तो मैं लाचार हूँ
में कमजोर नही हूँ मै एक नारी हूँ
में एक नारी हूँ मै एक नारी हूँ
एक नारी हूँ मुझ में ही सम्पूर्ण संसार समाया है
में खुद क्या बोलू में एक नारी हूँ

नारी शक्ति राष्ट्र शक्ति का अभिन्न अंग है नारी कभी कमजोर नही है वह ईश्वर के वह रचना है जिसका वर्ण तो पूरे ब्राम्हण में किया जाए तो कम है | नारी शक्ति सम्पूर्ण राष्ट्र की वह आधार शीला है नारी शक्ति राष्ट्र शक्ति का अभिन्नं अंग है जिसे शामिल किए बिना कोई भी राष्ट्र शक्तिशाली नही बन सकता | विकसित व सभ्य समाज मे यदि देखा जाए तो नारी समाज ने विपरीत परिस्थितियों में ही आसीम धैर्य अद्वितीय साहस और सूझ बूझ से कई कीर्तिमान स्थापित किए है उन्हें कभी हार नही मानना चाहिए | 

परन्तु में इन सबसे हटकर में आज वर्तमान समय की और नारी समाज के दूसरे पहलू पर आपका ध्यान आकर्षित करना चाहती हूँ| नारी तो प्रारंभ से ही सशक्त है इसका प्रमाण तो पग-पग पर मिलता है, ये क्या प्रमाण है इन सबको बताने से पहले में यंहा स्पष्ट करना चाहती हूँ कि नारी को यह महसूस क्यो हुआ कि उसे सशक्त होना है…? होना पड़ेगा…? और होना चाहिए..???? 

वो इसलिए कि हमारे समाज मे कई लोग उसकी छमता को पहचान नही पाए तो जाने नही पाए…. तो मान नही पाए…. या मानना ही नही चाहते है कि नारी हर छेत्र हर काम मे बेहतर हो सकती है इसलिए अपने आप को प्रमाणित करने के लिए अपने अस्तित्व के अनेकों रूपो को दिखाने के लिए ही उसे सशक्त बनाने की आवश्यकता पड़ी (पर इस सच को कभी भी कोई झुठला नही सकता है कि नारी जन्म से ही स्वयं से सशक्त है ही)| 

जब से सृष्टि की रचना हुई तब से ही शायद हम नारी को सशक्त करने की बात सोच रहे हैं….वह शायद इसलिए क्योंकि प्राकृतिक ने नारी को कोमल, ममतामई,करुणामई, सहनशील,आदि गुणों से भरपूर बनाया है | तब से लेकर आज तक हम नारी को हर रूपों में सशक्त करने की बात सोच रहे हैं और आज तक नारी कितनी सशक्त हुई है कितनी सफल हो चुकी हैं…. यह हम सब जानते हैं यह सब बातें प्रमाणिक हैं और इन सब का हमारे जीवन पर अत्यधिक प्रभाव भी पड़ता है पड़ता जा रहा है |

हमारे नारी समाज और देखा जाए तो:

आधुनिक युग की नारी है
मत मानो अब अबला उसको
सक्षम है बलधारी है
बीत गई वो कल की बेला
जीती थी वो घुट घुट कर
कुछ न कहती
सब कुछ सहती
पीती आंसू छुप छुप कर
आज बनी युग की निर्माता
हर बाधा उस से हारी है
चारदीवारी का हर बन्धन
तोड़ के बाहर आई है
घर समाज और देश में उसने
अपनी जगह बनाई है
ऊंचे ऊंचे पद पर बैठी
सम्मान की वो अधिकारी है
मत समझो निर्बल बेबस
लाचार आज की नारी है
नर की प्रबल प्रेरणा का
आधार आज की नारी है
स्नेह प्रेम व ममता का
भन्डार आज की नारी है
हर जंग जीते शान से यह
अभियान अभी भी जारी है| 

आजादी के दशक में दिनों दिन हम कदम रखते जा रहे है लेकिन हर बार हमारे सामने ये सवाल हो जाता है कि  स्वंत्रत देश मे हमारी आधी आबादी नारी समाज में नारियां कितनी स्वंत्रत हुई है? आजादी के बाद बढ़ते हुए समय मे नारी समाज की स्थिति में क्रांतिकारी परिवर्तन आया है| शक्ति सयम संस्कार, महानता,त्याग, सहनशीलता, नम्रता, ममता, और स्नेह यह सारे शब्द एक नारी के पर्यावाची क्यो है? नारी को ही इन शब्दों की व्याख्या क्यो दी जाती है? 

क्या समाज को सुचारू रूप से चलाने की जिम्मेदारी एक नारी के कंधे पर ही क्यो है? हर बार एक नारी को ही अग्निपरीक्षा क्यो देना पड़ता है? चाहे त्रेतायुग में सीता बनकर या द्धापर में द्रोपती बनकर और आज कलयुग में हर कदम पर एक स्त्री देनी पड़ती है ? में भी एक नारी हूँ और इस इस राष्ट्र की समस्त नारी की अंत: पीड़ा को पहचान कर पूछती हूँ कि क्या एक भी पुरुष में अब वो क्षमता नही कि अपने भीतर एक राजा राम मोहन राय को पैदा कर इस पुरुष प्रधान समाज मे नारी की अस्मिता का सम्मान रख सके | मुझे शर्म आती है अपनी शिक्षा व्यवस्था पर जो इंसान को पढ़ा लिखा जाहिल बना रही है और केवल पेट भरना सिखा रही है | 

कैसे कपड़े पहनने है..??
कितने बजे तक घर लौटना है..?
किसी भी स्त्री के पिता भाई या पति ही क्यो तय करता है….????

आखिर कब तक किसी लड़कीं को तुम लड़कीं हो लड़कीं हो सुनने की विवशाता झेलनी पड़ेगी आखिर कब तक ? धिक्कार है उस उस मानव समाज के अचेतन मन को जिसमे आज भी नर पिशाचो का आनुवंशिक जहर वह रहा है | में जनती हूँ मेरे असली आईना दिखाने वाले प्रशन पर आप सभी सर झुका कर सोच भर सकते है लेकिन इस घिनौनी तस्वीरों को बदलने का साहस नही कर सकते इसी लिए में मुखातिब होती हूँ नारी शक्ति की ओर और सिंहनाद करती हूँ कि…

हर नारी चाहे वो अनपढ़ हो या कामकाजी चाहे ग्रामीण हो या शहरी चाहे किसी की बेटी हो या पत्नी हो या चाहे माँ ही क्यो न हो एक बार खुद से ये प्रशन जरूर पूंछे कि:

  • कौन तय करेगा तुम्हे क्या पहनना है…?
  • कौन तय करेगा तुम्हे कब निकलना है…?
  • कौन तय करेगा क्या है तुम्हारे अरमान…? 
  • और कौन तय करेगा क्या है तुम्हारी पहचान….?

मेरी बहनो शिक्षा को हतियार बनाओ हर उस पद पर  प्रतिष्ठित हो जाओ जो जाहिल मानसिकता को बदलने को तुम्हे अधिकार दे सके जो तुम्हारी सोच में इतनी आग पैदा कर सके कि कोई भी दूषित मानसिकता वाला पुरुष उस आग का सामना कर सके| इतना आत्मबल पैदा करो कि किसी भी जाहिल पुरूष का शारीरिक बल निस्तेज पुरुष हो जाये फिर चाहे वो जाहिल पुरुष दूषित मानसिकता वाला व्यक्ति कार्यलय में हो तुम्हारे पड़ोस में हो तुम्हारा पिता भाई या पति ही क्यो न हो या तुम्हारा मित्र हो,  किसी भी ऐसे पुरुष को तुम्हारी अस्मिता तुम्हारे सम्मान की गरिमा को नष्ट करने का अधिकार नही है….

नारी समाज को नमन करती हमारी संस्कृति में नारी समाज की स्थिति पूजनीय तो है ही लेकिन इसका दुखद पहल यह है कि आज के समय मे नारी समाज में औरतो पर छोटी बालिकाओं पर हो रहे अपराधों में बढ़ोत्तरी हमारे लिए  बहुत चिंता का विषय है….

हमे सोचना होगा कि आखिर क्या कारण है कि नारी समाज को पूजने वाले राष्ट्र में दिनों दिन अपराध आखिर क्यों बढ़ रहे है क्यो हम इन अपराधों पर लगाम नही लगा पा रहे है ? आज देश में नारी सुरक्षा एक चुनौती बनकर रह गयी है सरकार के वो बड़े बड़े दावे इन दुष्ट दानवो के आगे फुस्स होते नजर आ रहे हैं. हर रोज बड़े बड़े नेता बड़ी बड़ी बाते करते हैं और हर रोज इन जघन्य अपराधो के नए नए किस्से सामने आ रहे हैं… क्या भारत के इतने बुरे दिन आ गए हैं…? कि हम देश वासी मिलकर अपनी बहु बेटियो कि रक्षा नहीं कर सकते?.. माँ दुर्गा, माँ काली को पूजे जाने वाले देश में नारी के ये अपमान क्या देश का और माँ का आपमान नहीं है..???

क्यों आज आज हम सब मिल कर नारी को सुरक्षित वातावरण नहीं दे पा रहे?. क्यों आज हर लड़की अपने ही शहर,अपने ही देश में अँधेरा होने के बाद भी आजाद से नही घूम सकती ? अँधेरा तो छोड़िये आजकल तो दिन दहाड़े यहाँ तक कि अपने घर में भी लड़कियाँ सुरक्षित नही हैं | जरा सोचिये ये दोष किसका है? आपका? हमारा? समाज का? या फिर उन लड़कियों का?,जो उड़ना चाहती हैं कुछ बनना चाहती हैं. क्यों आज भी कुछ लोग अपनी सीमित सोच के दायरे से बाहर नही आ रहे..?? क्यों आज नही देश में लड़कियों को बस एक ही नजर से देखा जाता है..??

यकीन मानिए इसमें दोष मानवीय सोच का है. जो किसी न किसी रूप में लड़कियों की स्वतन्त्रता उनका स्वाभिमान बर्दाश्त नही कर पा रहा…

जो इस देश को दीमक कि तरह खाये जा रहा है. आज देश को जरूरत है कट्टरवादी सोच के दायरे से निकालकर वक़्त के साथ आगे बढ़ने की. आखिर क्यों सरकार के इतने प्रयासों के बाद भी ये कुकृत्य रुकने का नाम नही ले रहे. एक किस्से पर मरहम भी नहीं लग पाता कि दूसरा किस्सा कालिख लिए हमारे देश की शान पर मलने को तैयार हो जाता है. आज अगर इन बहु बेटियो कि सुरक्षा नही कि गयी तो इस देश में माताओ का पूजा जाना व्यर्थ है क्यों कि जहां नारियो का सम्मान नही होता क्या उस देश में माँ को सम्मान देने में हम कामयाब हो पाएंगे? आज जरूरत है जन चेतना की इन सब के खिलाफ आवाज उठाने की क्यों की अगर आज हम अपनी जिम्मेदारी न समझ के पीछे हटे तो देश में नारियो का सम्मान वापस ला पाना नामुमकिन हो जायेगा |इसलिए आगे आईये, आवाज उठाईये, और अपने देश की आन, बान और शान बचाइये… और इस स्वतंत्र भारत को सही मायने में सबके लिए स्वतंत्र बनाइये |

हमे समाज मे नारी समाज के लिए सकरात्मक लाना आवश्यक है तभी हम सफल समाज के लायक होंगे,  मुस्कुराहट दर्द भुलाकर रिस्तो में बंद की दुनिया सारी हर पल को रोशन करने वाली वह शक्ति है एक नारी |

कु सुष्मिता ताम्रकार
जागते हुए राष्ट्र की समाज सेविका
प्रदेश अध्यक्ष (संचलन नायक)
अब स्वंत्रत बहनो की आवाज समस्त नारी शक्ति ग्रुप मध्य प्रदेश

मोबाइल नम्बर whatsapp no 8462055659,9827286952, 9111996898,

टेक्स्ट की साइज़ सेट करें

इस लेख के रचनाकार से मिलिये

कु. सुष्मिता ताम्रकार

जागते हुए राष्ट्र की समाज सेविका
प्रदेश अध्यक्ष (संचलन नायक)
अब स्वंत्रत बहनो की आवाज समस्त नारी शक्ति ग्रुप मध्य प्रदेश

मोबाइल नम्बर whatsapp no 8462055659,9827286952, 9111996898,

हमारा धर्म हमारी संस्कृति

टेक्स्ट की साइज़ सेट करें