अयोध्या : प्रभु श्री राम की जन्मभूमि

by | रंग बसंत, संवाद | 0 comments

मर्यादा पुरूषोत्तम, धर्मरक्षक  प्रभु श्री राम और उनकी जन्मभूमि के रूप में अयोध्या निश्चित रूप से हमारी आन-बान और शान सहित हमारी श्रद्धा एवं  आस्था के प्रतीक हैं ” 

लगभग 500 वर्षों से चले आ रहे श्रीराम जन्मभूमि विवाद के पटाक्षेप होने के उपरांत, भगवान श्रीराम की जन्मभूमि अयोध्या में विशालतम और भव्य मंदिर के निर्माण का रास्ता साफ होते ही, आम जन-सहयोग से मंदिर के निर्माण कार्य के कार्य में तन-मन-धन से सहभागी बनना निश्चित रूप से हम सभी के लिये के लिये गर्व की बात है । प्रभु श्री राम की जन्मभूमि के रूप में विख्यात अयोध्या नगरी का ” भव्य मंदिर” के निर्माण के पूर्ण होने तक लगभग पूरा भौगोलिक परिदृश्य ही बदलने वाला है । अयोध्या नगरी में मर्यादा पुरूषोत्तम प्रभु श्रीराम के अनेकों भव्य मंदिर हैं । उन्हीं प्राचीन और भव्य मंदिरों में से एक का संबंध हमारे हैहयवंशीय क्षत्रिय समाज से भी है । 

हैहयवंशीय क्षत्रिय श्री ठाकुर राम जानकी ट्रस्ट अयोध्या 

अयोध्या रेल्वे स्टेशन से लगभग 20 कदम की दूरी पर रेल्वे स्टेशन अयोध्या के प्लेटफार्म क्रमांक-5 से लगी हुई लगभग 1 एकड़ भूमि हमारे हैहयवंशीय क्षत्रिय समाज की है, जो सामाजिक अरूचि, उचित संरक्षण और देखभाल के अभाव के कारण वर्षों उपेक्षित है । रेल्वे क्रासिंग से आगे मुख्य सड़क पर रेल फाटक से लगभग 300-400 वर्गफुट की दूरी पर एक विशालतम मंदिर है जिसके वर्तमान स्वरूप को देखते हुए सहज अनुमान लगाया जा सकता है कि वर्षों पूर्व हमारे हैहयवंशीय क्षत्रिय समाज की यह प्राचीनतम धरोहर कितनी भव्यतम और आकर्षक रही होगी । 

राष्ट्रीय सामाजिक पत्रिका ” कसेरा-समाचार ” के प्रचार प्रसार के लिये अपने 43 दिवसीय लंबे उत्तरप्रदेश और मध्यप्रदेश प्रवास के समय लगभग 2 वर्ष पूर्व पत्रिका के संस्थापक एवं स्वामित्वाधिकारी और प्रकाशक श्री श्यामलाल जी वर्मा, इन्दौर के साथ अयोध्या पहुंचने पर हमें हैहयवंशीय क्षत्रिय समाज के  उपेक्षित व्यवहार, उदासीनता और अरूचि के चलते अपनी जीर्ण-शीर्ण स्थिति और बदहाली पर आंसू बहाते इस मंदिर को करीब से देखने का सौभाग्य मिला । इस मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष श्री रामकृष्ण जी कसेरा से मुलाकात हुई । जिनसे इस मंदिर के निर्माण से लेकर वर्तमान स्थिति के संदर्भ में विस्तृत चर्चा हुई । मंदिर के संदर्भ में स्थानीय स्वजातीय बंधुओं सहित मंदिर ट्रस्ट के सदस्यों से हुई बातचीत इस प्रकार है । 

मंदिर की आधारशिला, संचालन और वर्तमान स्वरूप का परिचय

उत्तरप्रदेश की अयोध्या नगरी की ख्याति पूरे विश्व में भगवान श्री राम की जन्म भूमि के रूप में होती है । 500 वर्षों के जन्मभूमि विवाद के पश्चात न्यायालीन आदेश के पश्चात प्रभु श्री की  जन्मभूमि अयोध्या में भव्य राम मंदिर के निर्माण का रास्ता खुल जाने से अयोध्या का महत्व पूर्व की तुलना में कई गुना बढ़ गया है । एसे में जब जन्मभूमि अयोध्या और भगवान श्रीराम सुर्खियों में हों । हैहयवंशीय क्षत्रिय समाज की एतिहासिक और स्वाजातीय महत्व की धरोहर के रूप में अयोध्या स्थित हैहयवंशीय क्षत्रिय श्री ठाकुर राम जानकी ट्रस्ट (मंदिर) की जानकारी सार्वजनिक करना भी अनिवार्य हो जाता है । 

18 वीं सदी के पूर्वाध में हैहयवंशीय क्षत्रिय कसेरा समाज के एक ही परिवार के श्री माधव प्रसाद जी कसेरा एवं उनके भाई श्री कुन्जीलाल जी कसेरा ने अपने अपने हिस्से की कपैतृ भूमि पर स्वयं के खर्च से लगभग 3,600 वर्गफुट क्षेत्र में कए भव्य मंदिर का निर्माण कराया । इस भव्य मंदिर की देखरेख के लिये स्थानीय स्वजातीय बंधुओं एक समिति भी बनाई । उस समय इस समिति के सर्वाकारों में श्री ललऊ प्रसाद, श्री मतऊ प्रसाद, श्री रामचरण के साथ श्री माधव प्रसाद और श्री कुंजबिहारी कसेरा आदि रहे । लेकिन कुछ वर्षों के पश्चात श्री कुंजबिहारी और श्री माधव प्रसाद जी ने ही मंदिर की देखरेख और संचालन की जिम्मेदारी संभाली । 

आगे चलकर मंदिर के उचित रखरखाव, देखरेख और संचालन व्यवस्थाओं को दृष्टिगत रखते हुए श्री सूर्यनारायण महादेव प्रसाद जी कसेरा ने मंदिर के पीछे, मंदिर से ही लगी हुई लगभग 1 एकड़ रिक्त पड़ी भूमि को स्वयं के व्यय पर खरीद कर मंदिर ट्रस्ट के नाम दान कर दी । 

यह रिक्त भूमि अयोध्या रेल्वे स्टेशन के प्लेटफार्म क्रमांक-3 से लगभग 20 कदम चलकर (मंदिर के आधिपत्य वाली रिक्त भूमि) से सटी हुई है । 

अयोध्या में प्रभु श्रीराम की जन्म भूमि पर होने जा रहे भव्य श्रीराम मंदिर का निर्माण पूर्ण हो जाने पर, अयोध्या में सैलानियों और दर्शनार्थियों की संख्या को देखते हुए, रेल्वे स्टेशन के नजदीक हैहयवंशीय क्षत्रिय समाज की इस एतिहासिक धरोहर एवं भूमि का महत्व स्वमेव ही बढ़ जाता है । इस रिक्त भूमि पर सैलानियों के रुकने और ठहरने के व्यापक इन्तज़ाम किये जा सकते हैं । अगर भारतवर्ष के सकल हैहयवंशीय क्षत्रिय बाहुल्य राज्यों के सभी नगरों में निवास करने वाले सभी हैहयवंशीय क्षत्रिय परिवार अपनी सामर्थ्य के अनुसार स्वैक्छा से अंशदान करें तो बहुत कुछ किया जा सकता है । हैहयवंशीय क्षत्रिय समाज के राष्ट्रीय, प्रान्तीय और नगर संगठनों सहित सामाजिक सेवा कार्यों से जुड़े समाजसेवी, स्वाजातीय बुद्धिजीवी, चिंतक और विचारक चाहें तो बहुत कुछ कर सकते हैं । आवश्यक्ता है सकारात्मक सोच के साथ एक सकारात्मक पहल करने की । 

पंजीकृत मंदिर ट्रस्ट और विवाद 

अयोध्या में हैहयवंशीय क्षत्रिय समाज की धरोहर के रूप जीर्ण-शीर्ण स्थिति में पहुंच चुके उक्त मंदिर का अग्र भाग किसी भी समय धराशायी हो सकता है । अपितु मंदिर के जीर्णोद्धार कार्य के लिये मंदिर ट्रस्ट के पास धन के न होने से कुछ नहीं हो पा रहा है । अयोध्या प्रवास के दौरान हमें मंदिर से जुड़े विवादों की भी जानकारी हुई । इस मंदिर की सम्पत्ति को लेकर एक ही परिवार के दो पक्षों में विवाद है । स्थानीय स्वजातीय बंधुओं के अनुसार एक पक्षकार श्री रामकृष्ण कसेरा जी हैं जो पंजीकृत ट्रस्ट के अधिकृत अध्यक्ष हैं जिनके पूर्वजों ने अपनी पैतृक भूमि पर स्वयं के खर्च से मंदिर की स्थापना की । और दूसरे पक्षकार हैं श्री आशुतोष जी कसेरा, जो मात्र इसी परिवार के होने का फायदा उठाकर मंदिर की संपत्ति पर बेवजह अपना अधिकार बताकर विवाद बनाये हुए हैं । जानकारी के अनुसार, आपने मंदिर ट्रस्ट की आज्ञा के विरुद्ध मंदिर में एक पुजारी नियुक्त कर रखा है, पुजारी ने अपने नाम से विधुत कनेक्शन ले रखा है । द्वितीय पक्षकार ने मंदिर के कुछ कमरों में ताला डाल कर कब्जा जमा रखा है । 

हैहयवंशीय क्षत्रिय श्री ठाकुर राम जानकी ट्रस्ट चाहता है की हैहयवंशीय क्षत्रिय समाज के राष्ट्रीय एवं प्रान्तीय संगठन प्रयास कर अयोध्या स्थित भगवान श्रीराम के इस एतिहासिक और स्वजातीय महत्व के जर्जर एवं  धाराशायी होने जा रहे मंदिर को विवाद से मुक्त कराने की दिशा में त्वरित सकारात्मक पहल करें । जिससे भगवान श्रीराम के इस मंदिर को भव्यता दी जा सके । 

 

अगर हम और आप प्रति परिवार-प्रति सदस्य 100/- का अंशदान भी करेंगे तो पूरे भारत वर्ष के हैहयवंशीय क्षत्रिय समाज की इस धरोहर को भव्यता दी जा सकती है । आवश्यक्ता है एक सकारात्मक सोच की, आवश्यक्ता है एक रचनात्मक पहल की । हैहयवंशीय क्षत्रिय समाज की इस  एतिहासिक धरोहर को भव्यतम स्वरूप देने के पुण्य कार्य में आप भी सहभागी बनें । 

जय जय श्री राम, जय जय अयोध्या धाम 

 

हैहयवंशी चंद्रकांत ताम्रकार