आओ एकता के दीप जलाये

काव्य

संकल्पो का दीप प्रज्वलित कर , रक्तबीज कोरोना को भगाये ।

आओ एकता के दीप जलाये, विषाणु कोविद १९ को हराये।।

देश मे आयी, विपदा भारी,मौतो की सिलसिला जारी।
शातिर आतंकी है मानकर,मुक्त करना है दुनिया सारी।।

हिन्दू आये, मुस्लिम आये, आयेसिक्ख,व इसाई आये।
चारो ओर दीप जगमगाये,संकल्प एकता का दोहराये।।

भेद भाव को ,त्याग सभी, मानवता का ,फर्ज निभाये।
राष्ट्र भक्ति के रंग मे रंग, मिशाल एकता की दिखाये।।

दौर कठिन से न घबराये, रखे हौसला, औरो के बढाये।
माना धैर्य की बडी परीक्षा, एक दूजे का ,हाथ बटाये।।

बादल छटेगा, सूर्य निकलेगा,रक्तबीज कोरोना को हराये ।
संकल्पो का दीप प्रज्वलित कर, कोविद 19 को हराये।।

कमलकिशोर ताम्रकार
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