ऐतिहासिक विरासत, सम्पतियों को संरक्षित किया जाना चाहिए

सामाजिक चिंतन होली

खुरई तहसील जिला सागर के अन्तर्गत ग़ाम गडोला जागिर ग़ाम में हैहय बंशी क्षत्रिय समाज के शक्ति माता स्थल का जीर्णोद्धार कर मंदिर का निर्माण किया जाकर समाज की महत्वपूर्ण विरासत, सम्पत्ति को संरक्षित किया गया. इस शक्ति माता मंदिर को श्री चन्द्र कांत जी तार्मकार एवं उनके सहयोगियों ने समाज के सहयोग से मंदिर निर्माण कार्य की समाज के अनेक वरिष्ठ पृवृध्द लोगों द्वारा भूरी भूरी प़शंसा की गई. 

दिनांक 7 फरवरी 2021 को उक्त शक्ति माता मंदिर के जीर्णोद्धार कार्यक्रम में अनेक प़ांतो के प्रतिनिधि, समाज के अनेक पदाधिकारीओ एवं समाज के लोगों ने उपस्थित होकर, इस प्रकार समाज की सम्पत्तियों, एवं विरासतों को बचाया जाकर संरक्षित किये जाने की आवश्यकता महसूस की गई. सम्पूर्ण भारत बर्ष में हैहय बंशी क्षत्रिय समाज की अनेक ऐतिहासिक, गौरवमयी विरासत सम्पत्तियां देखरेख के अभाव में जीर्णशिर्ण होकर नष्ट हो रही है एवं इन संपत्तियों पर लोगों द्वारा अनाधिकृत कब्जा किया जाकर, समाज के अधिपत्य से ऐसी संपत्ति निकलतीं जा रहीं हैं. आज इस बात की सख्त आवश्यकता है कि समाज की इन गौरवमयी विरासत, संपत्तियों की पहचान की जाकर, इन्हें संरक्षित किया जाये. इसके लिए समाज में जागृति उत्पन्न कर, संगठित होकर प़यास करने की आवश्यकता है. जहाँ भी स्थानीय स्तर पर समाज बंधुओं की जानकारी में आता है कि यह समाज की विरासत संपत्ति है तो उस विरासत संपत्ति को बचाने, उसे संरक्षित किये जाने के लिए समाज से सहयोग का आव्हान कर, उस संपत्ति विरासत को बचाया जाकर, संरक्षित किया जाना आज अतिआवश्यक हो गया है. इसके लिए उक्त शक्ति माता मंदिर का जीर्णोद्धार कर मंदिर निर्माण किया जाना, समाज की संपत्ति को बचाना, समाज की विरासत को संरक्षित किये जाने के लिए स्वता ही समाज के सामने जागृति, प़ेरणा का कार्य कर रहा है. मेरा आप सभी समाज बंधुओं से विनम्र निवेदन है कि इन समाज की संपत्तियों विरासतों बचाने के लिए संगठित होकर, आर्थिक, शारीरिक श्रम, समय एवं सभी तरह से प़यास किये जाकर, समाज की संपत्तियों विरासतों को संरक्षित करते हुए, निम्न कुछ महत्वपूर्ण कार्य किये जाना चाहिए.

(1)  ग्वालियर किले के अन्तर्गत भगवान सहस्रबाहु का विशाल, पौराणिक, ऐतिहासिक मंदिर स्थित है. इस मंदिर की वर्तमान समय में सही जानकारी के अभाव में एवं भाषा बोलीं के अभृंष के कारण, इसे सास बहू का मंदिर कह के संबोधित किया जाने लगा है. अता आज आवश्यकता है कि समाज की केन्द्रीय, राज्य, स्थानीय कार्यकारिणी एवं समाज बंधुओं को मिलकर, एकत्र होकर, स्थानीय प्रशासन को, म.प्र. शासन, पुरातत्व विभाग के लिए, ज्ञापन देकर, उक्त सहस्रबाहु मंदिर पर भगवान सहस्रबाहु मंदिर की नाम पट्टीका (बोर्ड, बेनर) एवं मंदिर से संबंधित ऐतिहासिक जानकारी उस स्थान पर सार्वजनिक रूप से अंकित कराईं जाये्. 

(2)  जबलपुर से लगभग 100 कि मी पर मंडला शहर में नर्मदा नदी के तट् पर स्थित दुर्ग में भगवान सहस्रबाहु की भाव्य मुर्ति स्थापित हैं. एवं नर्मदा नदी के तट् धाट का नामकरण सहस्रबाहु धाट की नाम पट्टीका भी स्थापित होकर, यह मंडला नगर भगवान सहस्रबाहु की संततियों द्वारा स्थापित होकर, हैहय बंश राज्य की राजधानी रहा है. लेकिन समाज के लोगों को इसकी जानकारी नहीं होने के कारण, यहाँ समाज के लोगों का आना जाना लगभग नहीं के बराबर ही है. अतः इस स्थान के इतिहास व भगवान सहस्रबाहु की मुर्ति की जानकारी से सभी समाज बंधुओं को अवगत कराया जाना चाहिए ताकि वो इस स्थान पर आकर हैहय बंशी क्षत्रिय होने पर गौरान्वित मेहसूस कर सकें.

(3) पिछले कुछ बर्षो से महेश्वर ( जिला खरगोन) म.प्र नर्मदा नदी के तट् पर स्थित किले के अन्तर्गत भगवान सहस्रबाहु अर्जुन द्वारा ज्योतिर्लिंग में समाहित होने की जानकारी, समाज बंधुओं को होने के वाद, यहाँ समाज बंधुओं का निरन्तर आना जाना होने के कारण महेश्वर समस्त हैहय बंशीय क्षत्रियों, कलचुरि समाज व अन्य चंद्र बंशीय, सहस्रबाहु अर्जुन को पुज्य मानने वालों का महान तिर्थ स्थल हो गया है. यह स्थान महाराज सहस्रबाहु के हैहय बंशीय राज्य की राजधानी होकर, समस्त हैहय बंशीयो के लिए गौरवमयी स्थान है. यहाँ पर महाराष्ट्रीयन तार्मकर समाज के अधिपत्य में विशाल भुभाग मंदिर किले के पास मध्य शहर में है. इस स्थान पर अखिल भारतीय हैहय बंशी क्षत्रियों की टृस्ट बना कर, सभी के सहयोग, सामंजस्य से एक सुविधा जनक धर्मशाला का निर्माण किया जाना चाहिए ताकि इस तिर्थ स्थल पर आने वाले समस्त हैहय बंशीयो समाज बंधुओं को ठहरने की सुविधा उपलब्ध हो सकें.

(4) बिलासपुर छत्तीसगढ़ से लगभग 20 कि. मी. पर स्थित रतनपुर, भगवान सहस्रबाहु के बाद हैहय बंशीय, कलचुरि राजाओं की राजधानी होकर, यह स्थान पौराणिक ऐतिहासिक गौरवमयी स्थान रहा है. हैहय बंशीय राज्य की राजधानी रतनपुर की राजगद्दी को महाराज मयूर ध्वज द्वारा सुशोभित करते हुए, यहाँ लगभग 41 से अधिक हैहय बंशीय राजाओं द्वारा राज्य करते हुए, सम्पूर्ण छत्तीसगढ़ में हजारों तलावो, अनेक दुर्गों किलो, मंदिरों का निर्माण कराया गया था. यहाँ हैहय बंशीयो की कुल देवी महामाया का मंदिर भी स्थापित हैं. अतः समस्त हैहय बंशीयो को अपने जीवन काल में एक बार यहाँ आकर, अपने पुर्वजो, हैहय बंश के गौरवमयी इतिहास की जानकारी प्राप्त करते हुए, अपनी हैहय बंश की कुल देवी महामाया के मंदिर में माता के दर्शन करते हुए, अपनी कृत्यगता व्यक्त करना चाहिए. इस स्थान की जानकारी सभी समाज बंधुओं को हो, इसके लिए संचार साधनों के माध्यम से प़चार किया जाकर समस्त समाज बंधुओं को अवगत कराया जाना चाहिए.

उक्त स्थानों के अतिरिक्त जबलपुर के निकट त़िऋपुरा, चंदेरी, बनारस, अवन्ती आदि अनेक स्थानों में हैहय बंश की गौरवगाथा, इतिहास से संबंधित स्थान रहे हैं. इन सभी महत्वपूर्ण हैहय बंश के गौरवमयी इतिहास की जानकारी संग्रहित की जाकर, यह जानकारी सभी समाज बंधुओं को अवगत कराया जाना चाहिए ताकि समस्त हैहय बंशीय समाज बंधु इन स्थानों का भ़मण अवलोकन कर अपने गौरवशाली इतिहास को जानकर, अपने आप को गौरवान्वित अनुभव कर सकें.

आज ऐतिहासिक पौराणिक गौरवमयी स्थानों के अतिरिक्त समाज के अनेक मंदिर, धर्मशाला, बगीचे आदि स्थल कुछ कारणों से समाज के अधिपत्य से वंचित होकर, अनेक मंदिरों में पुजारियों ने कब्जा अधिपत्य कर रखा है. अनेक मंदिरों के विवाद 40-50 बर्षो से न्यायालय में चल रहे हैं.इन  न्यायालिन विवादों को लडते हुए, हमारे बाप दादाओ की पीडी समाप्त हो गई है एवं नई पीढ़ी को इन विवादों में कोई रुचि नहीं होने के कारण, इस प्रकार की सम्पत्तियां, समाज के स्वामित्व, अधिपत्य से पृथक होती जा रहीं हैं. आज समाज में अनेक योग्य नामी वकील, अधिवक्ता है. अतः हमारे समस्त वकील अधिवक्ता बधुऔ का परम् कर्तव्य है कि समाज हित में विद्वान श्रेष्ठ वकीलों का समूह पेनल बनाकर, समाज के मंदिरों सम्पत्तियों के विवादों में समाज का प़तिनिधीत्व करते हुए, समाज की इन सम्पत्तियों को बचाने के लिए, अपना समाज के प्रति पुनित कर्तव्य समझकर अपने प़यास करें.

इस प्रकार सभी समाज बंधुओं को समाज हित में समाज के ऐतिहासिक गौरवमयी विरासत सम्पत्तियों को बचाने के लिए, जागृत होकर, संगठित होकर, सामूहिक प्रयास किया जाना अति आवश्यक है