कविता वर्मा: मृदुभाषी दृढ़ व्यक्तित्व साहित्यकारा

व्यक्ति विशेष

कविता वर्मा: मृदुभाषी सुदृढ शख़्सियत

कविता वर्मा जी, हिंदुस्तान के दिल मे रहती हैं, हिंदुस्तान का दिल मध्यप्रदेश की आर्थिक और सांस्कृतिक राजधानी इंदौर, जिसने संगीत, साहित्य और सांस्कृतिक कलाधर्म के बड़े बड़े हस्ताक्षरों को देखा है, इंदौर जिसे होलकर साम्राज्य की महान महारानी देवी अहिल्याबाई होलकर के नाम से अहिल्या नगरी के रूप में में पहचान जाता है । इंदौर जिसका नाम और गौरव प्रख्यात गायिका स्वर कोकिला लता मंगेशकर के महान नाम से जुड़ा है । जिसने देश को कई बड़े साहित्यकार दिए हैं उसी इंदौर शहर ने देश को हैहयवंश केलिये गौरव करने हेतु श्रीमती कविता वर्मा जैसी प्रसिद्ध साहित्यकरा भी दी है ।

मध्यप्रदेश हिंदी साहित्य सम्मेलन द्वारा प्रसिद्ध वागेश्वरी पुरस्कार

कविता वर्मा जी को मध्यप्रदेश हिंदी साहित्य सम्मेलन द्वारा प्रसिद्ध वागेश्वरी पुरस्कार से सम्मानित किया है । वागेश्वरी पुरस्कार देश के सम्मानित सहित्यिक पुरस्कारों में एक है । यह सम्मान प्राप्त होना हर साहित्यकार केलिए गर्व की बात है ।  कविता जी को यह सम्मान उनके प्रसिद्ध कथा संग्रह “कछु अकथ कहानी” केलिए दिया गया है ।

“कछु अकथ कहानी” के अलावा भी कविता जी को विभिन्न कहानियों, लघुकथाओं और उपन्यास लिखने का श्रेय जाता है । अपने प्रयोगधर्मी कहानी संग्रह “देह की दहलीज पर” के संपादक होने का गौरव भी प्राप्त है ।

 

समाज केलिए यह गर्व का क्षण

हैहयवंशीय क्षत्रिय समाज केलिए यह गर्व का क्षण है । समाज के लेखकों और नए उभरते लेखकों के लिए भी यह प्रेरणा के क्षण है । हम गर्व कर सकते हैं कि समाज की एक महिला लेखिका देश मे साहित्य के क्षेत्र में नाम कमा रही हैं इससे समाज की अन्य महिलाओं को भी प्रेरणा मिलती है जिनमे क्षमताएं तो असीम हैं लेकिन अवसर नहीं मिल रहे वे भी इस प्रेरक क्षण से उत्साहित हो सकती हैं ।

26 मार्च 1969 को मध्यप्रदेश के टीकमगढ़ में जन्मी कविताजी का कर्म क्षेत्र इंदौर है । कविता जी का व्यक्तित्व बहुआयामी है । एक पारंपरिक परिवार की बहू की जिम्मेदारियां निबाहने के साथ साथ अपने सार्वजनिक जीवन मे मानसम्मान प्राप्त करने वाली कविता जी न सिर्फ एक कहानीकर और उपन्यासकार हैं बल्कि विशेषज्ञ सलाहकार भी हैं जी जीवन की विविध समस्याओं से घिरे लोगों को उपयोगी सलाह दे कर उनके जीवन को आसान बनाने में सहयोगी होने का पुण्य भी कमा रही हैं ।

स्पष्टवादिता और आधुनिक विचारधारा कविता जी का व्यक्तिगत गुण है जो उनकी साहित्यिक रचनाओं में स्पष्टता के साथ उभर कर आता है ।

साहित्य के क्षेत्र में प्रदेश का सबसे बड़ा एवं प्रतिष्ठ गैर सरकारी  वागेश्वरी पुरस्कार २०१९ वर्ष प्रदान करने हेतु घोषणा की गई। बड़े हर्ष का विषय है समाज की नारी शक्ति श्रीमती कविता वर्मा इंदौर को  भी इसमें शामिल किया गया है कहानी विधा /कहानी संग्रह -”कुछ अकथ कहांनीं”  संग्रह के लिए।  हैहैयवंशी  कसेरा समाज के लिए गौरव की बात है। आपकी इस सफलता ने दो परिवारों  बडारया / वर्मा (कसेरा) परिवार का भी नाम रौशन किया है। अपने माता पिता का सिर गर्व से ऊंचा किया है । साहित्य के क्षेत्र मे इतिहास रचा है । मील का पत्थर बनी हैं। हम सबकी प्रेरणा स्त्रोत बनी है।

 



बहुत सालों तक अध्यापन करने के बाद आपने खुद को  लेखन के लिए  समर्पित किया, पढ़ने का शौक आपको लेखन तक ले आया। पहले कुछ लेख और कविताएं लिखीं लेकिन कल्पनाओं की उड़ान उन्हें जल्दी ही कहानियों तक ले आई । दोस्तों ने प्रेरित किया और पहला कहानी संग्रह “परछाइयों के उजाले” आया जिसे बहुत प्रशंसा मिली । आपका यह सफर अब तक जारी है। 

कविता जी का परिचय

नाम: श्रीमति कविता वर्मा  

पिताश्री: श्री विश्वनाथ बडारया

माता श्री:  श्रीमती उमा वर्मा

जीवन साथी: श्री श्याम स्वरूप (इंदौर म-प्र )

जन्म स्थान:  टीकमगढ़, मध्यप्रदेश

कर्म भूमि: इंदौर, मध्यप्रदेश

शिक्षा: एम् -एस सी (केमेस्ट्री)

कविता जी की साहित्य सृजन-यात्रा

कविता जी का साहित्य  निरंतर प्रवाहमान, गतिमान नदी के समान लोगों के जीवन-तट को अपनी लेखनी से भावनात्मक शीतलता, उर्वरकता और आनंदित करता है | आप निरंतर लघु कथाएँ, कथाएँ और उपन्यास लिखती रही है आपके साहित्य-सागर के कुछ प्रमुख रत्न इस प्रकार हैं:  

कहानी संग्रह:  परछाइयों के उजाले,  कछु अकथ कहानी (वागेस्वरी पुरस्कार हेतु चयनित )

उपन्यास: छूटी गलियां, देह की दहलीज पर  ( साझा उपन्यास, संपादिका भी ), और ढेर सारी लघु कथाएँ |

कविता जी को समय समय पर विभिन्न प्रतिष्ठित सम्मानों से नवाजा गया है, प्रमुख हैं: 

 

  • “परछाइयों के उजाले” जिसे अखिल भारतीय साहित्य परिषद राजस्थान से ‘सरोजिनी कुलश्रेष्ठ कहानी संग्रह पुरस्कार’ मे प्रथम पुरस्कार मिला
  • अखिल भारतीय शब्द निष्ठा लघुकथा सम्मान
  • मातृभारती रीडर्स चॉइस अवॉर्ड उपन्यास के लिये
  • वागेश्वरी पुरस्कार हेतु चयन वर्ष २०१९ के लिए

 

समाज में साहित्यकारों का सम्मान किया जाना चाहिए इससे उनका हौसला बढ़ता है साथ ही इस बात का पता चलता है की समाज की निगाह भी उनके लेखन पर है ताकि वे भी समाज  के प्रति अपनी ज़िम्मेदारी समझते हुए साहित्य सृजन-कार्य करें | 

साहित्य समाज का दर्पण होता है अच्छी बातें समाज तक पहुँचायें । कला साहित्य के लोगों से सम्बाद बढ़ाना चाहिए | आपकी लेखनी मैं  डिजिटल पत्रिका विमर्श मैं प्रकाशित लेख इसका प्रमाण हैं, आपकी जागरूकता इसका प्रमाण है । आपने जो ज्ञान /संस्कार प्राप्त किये वो समाज को लौटा रहीं हैं। लोगों का आत्मबल बढ़ा रहीं हैं। कहती हैं ज्ञानार्जन हर उम्र मैं जरूरी है, हर आयु वर्ग के व्यक्ति को अपने आप को परखने के लिए कुछ प्रश्नों के उत्तर खुद को देना खुद को परखने का आह्वान कर रही हैं, पथ प्रदर्शन कर रही हैं ।

अपना साहित्यिक धर्म का निर्वाह भी  करतीं हैं। वे पूंछती हैं:

 

  • आपने अपनी पढ़ाई के दौरान सीखने समझने की कितनी ईमानदार कोशिश की है?
  • क्या आप मानते हैं कि जो डिग्री आपके पास है उसके अनुरूप आपके पास ज्ञान भी है?
  • आप अखबार में लेख संपादकीय आलेख आदि पढ़ते हुए उन्हें समझने की कोशिश करते हैं?
  • क्या आप साहित्यिक पत्रिकाएँ पढ़कर उनके लेख कहानियों पर विचार करते हैं?
  • आपके काम नौकरी /,व्यापार /कृषि से  संबंधित नये नियम योजना आविष्कार आदि के बारे में पढ़ते हुए स्वयं को अपडेट करते हैं?
  • आप जिस भी विचारधारा को मानते हैं क्या कभी आपने अपनी विपरीत विचारधारा को जानने समझने की कोशिश की है?
  • धर्म ग्रंथ आध्यात्मिक पुस्तकें पढ़ना भी अच्छी बात है लेकिन इसके साथ प्रगतिशील विचार वाली कोई पुस्तक पत्रिका आपने कब पढी थी?

 

उस परिवार , घर समाज का का भविष्य उज्ज्वल है जिसमे कविता वर्मा जैसी नारी शक्ति  निवास करती है । हम आशा करते हैं वे नित नई ऊंचाइयां  छुएँ।  समाज और साहित्य  को नई दिशा दें इसमें चार चाँद लगाएँ।

लगे सदा ही गुंबद में, ये वो पत्थर हो,

जले सदा ही मंदिर में, ये वो दीपक हो,

हर दिल में बसी हो, ये वो इच्छा हो,

मिले सभी को जो ये वो शिक्षा हो।

लेखक: हैहयवंशीय प्रदीप वर्मा के साथ श्री रमाकांत बड़ारया

रमाकांत बडारया
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1 thought on “कविता वर्मा: मृदुभाषी दृढ़ व्यक्तित्व साहित्यकारा

  1. हैहयवंशीय   समाज   गौरवान्वित   है    जिसमें  बहु-आयामी

    व्यक्तित्व  श्रीमती  कविता वर्मा   अपने  ज्ञान,  संस्कारों, 

    विचारशीलता   एवं  रचनाधर्मिता   के माध्यम से समाज   को

    दिशा  दे  रही  हैं ।    ऐसे  व्यक्तित्व  युवा पीढ़ी  के  लिए

    प्रेरणा  के  स्रोत  बन  जाते  हैं  ।  ऐसे  व्यक्तित्व का

    परिचय  देने  के  लिए  श्री  प्रदीप जी वर्मा  एवं  श्री रमाकांत जी

    बडारया    को  विशेष   धन्यवाद  ।

     

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