काव्य कृति क्रांतिदूत

by | रंग बसंत, समाचार | 0 comments

आपातकाल पर पहली पठनीय काव्य-कृति

क्रंतिदूत: आपातकाल और श्री जयप्रकाश नारायण                        

विमोचन दिनांक १६-०१-२०२१  प्रेस क्लब रायपुर –                                                

 

काव्य  कृति क्रांतिदूत के सम्बन्ध मैं दो शब्द

श्री रामाधारी सिंह दिनकर जी ने लोकनायक जयप्रकाश नारायण जी के बारे में लिखा था जयप्रकाश नाम है आतुर हठी जवानी का जयप्रकाश नारायण जी विलक्षण प्रतिभा के धनी थे। उनके मन में क्या चल रहा है समझना किसी के भी बस की बात नहीं थी यही वजह है श्री जय प्रकाश  नारायण जी को एक अबूझ पहेली कहा जाता है।

काव्य कृति क्रांतिदूत लोकनायक श्री जय प्रकाश नारायण जी के जीवन, उनके विचारों, कार्यों, निर्णय क्षमता, अदम्य साहस, संघर्षशीलता, शोषण और दमन के खिलाफ आवाज बुलंद कर महंगाई, भ्रष्टाचार से शासक को सचेत करने, लोगों को जागृत करने की भावना से ओतप्रोत युगदृष्टा, स्वार्थ से परे व्यक्ति  का चरित्र चित्रण है, देश के लोगों पर ढाये गए जुल्मों को दर्शाने वाली, १९७५ मैं शासक के तानाशाह बनने की कहानी कहती है काव्य कृति  क्रांतिदूत  जयप्रकाश नारायण।

  • सत्तर के दशक मैँ देश महगाई और भ्रष्टाचार के दौर से गुजर रहा था। दुखी होकर उन्होंने प्रधान मंत्री ,सरकार को सांसदों को पत्र लिखा जिससे राजनीति मैँ भूचाल आ गया।
  • १९७३ में गुजरात के छात्रों ने महंगाई और  भ्रष्टाचार  के विरुद्ध आंदोलन किया तब श्री जय प्रकाश नारायण ने लोकतंत्र के लिए युवा अपील जारी की। छात्रों के अनुरोध पर उनका मार्गदर्शन करने लगे।जो बाद में वृहद नव निर्माण आंदोलन बना।  परिणाम स्वरूप आंदोलन की लपटें दूर दूर तक फैलने लगीं।
  • गुजरात के छात्र आंदोलन की तर्ज पर बिहार में भी महंगाई और भ्रष्टाचार के विरुद्ध आंदोलन  १९७४ में शुरू किया छात्रों के अनुरोध पर जयप्रकाश नारायण जी ने उनका नेतृत्व किया। बिहार के छात्र आंदोलन की लपटें सारे देश में फ़ैल गईं। जयप्रकाश नारायण के एक आदेश पर लाखों लोग इकठ्ठा होने लगे।
  • बिहार छात्र  आंदोलन के दौरान जे पी ने समग्र क्रांति का नारा बुलंद किया ,समग्र क्रांति के मायने समझाया। आंदोलन के दौरान उनपर लाठियां बरसाए गईं, अश्रू गैस के गोले छोड़े गए। नाना जी देशमुख ने अपनी जान पर खेलकर उनकी जान बचाई।
  • जयप्रकाश नारायण  पर हुए लाठीचार्ज के विरोध मैं रामलीला मैदान मैं विशाल आम सभा का ,विशाल रैली का आयोजन किया गया सारा आकाश गूंज उठा  सिंहासन खाली करो की  अब जनता आती है ।
  • इलाहबाद के हाईकोर्ट मैं राजनारायण की याचिका पर श्रीमती इंदिरा गाँधी के विरुद्ध भ्रिस्टाचार का आरोप सिद्ध हो गया उनके ६ वर्षों तक चुनाव लड़ने पर प्रतिबन्ध लगा उनको  पद त्याग करने की मांग तेज होने  लगीं विरोधियों के साथ इसमें उनके कुछ ख़ास लोग  भी थे।
  • २५ जून १९७५ को रात १२ बजे देश मैं आपात कल लगाया गया। देश के तमाम विरोधी दलों के बड़े नेताओं के साथ छोटे कार्य कर्ताओं को भेड़ा बकरियों की तरह जेलों मैं ठूस दिया गया। देश भर मैं लाखों गिरफ्तारियां हुईं। पत्रकारों को भी नहीं बक्सा, लगाकर क़ानून मीसा।
  • अदालतों के द्वार बंद कर दिए गए। सरे मूलभूत अधिकार छीन लिए गए । समाचार मुद्रणालय की लाइन काट दी गईं ताकि सरकार के विरुद्ध  कोई समाचार प्रकाशित न हो सके।
  • जिसने भी विरोध किया फिर दोबारा वह कभी देखने  को नहीं मिला। दीवार  के भी होते हैं कान सोचकर लोग करते थे बात।  
  • १९ महीनों की गहन यातनाओं के बाद मीसा बंदियों को आम चुनाव की घोषणा के बाद छोड़ा गया कइयों ने तो असमय देह त्याग  दिया  कई परिवार तबाह हो गए
  • १९७७ मैं कांग्रेस का सफया हो गया देश मैं पहली बार केंद्र मैं गैर कांग्रेसी सरकार बनी। पटरी से उत्तर गए पहिये इमरजेंसी के।

एक दिन लोकनायक जयप्रकाश नारायण मेरे सपनों मैं आये और आकर बोले आकर बोले रमाकांत तुमने आपातकाल को करीब से देखा है इस पर कुछ लिखते क्योँ नहीं।? मैंने कहा आदरणीय आपके आदेश की अनदेखी कैसे कर सकता हूँ। मैं आपके आदेश का  पालन अवश्य करूंगा यह मेरा साहित्यक धर्म भी है। मैंने अपने ३१ वे जन्म दिन से लिखना आरम्भ किया जो भी लोकनायक सोचते थे उनके विचारों, क्रियाकलापों का, देश मैं घटित १९७३ -१९७७ के मध्य घटित घटनाओं का वर्णन क्रांतिदूत मैं किया है अतिशयोक्ति नहीं। हिरदया  विदारक घटनाएं उस समय की हैं। शायद वर्तमान पीढ़ी  का जन्म ही न हुआ हो , वो पढ़कर जान सकें भारत मैं अपनों ने ही अपनों  पर  कितने जुल्म ढाये  थे, देखकर अंग्रेज भी  खा गए मात।

      एक बार  फिर  
      जयप्रकाश नारायण  मेरे सपनों में आकर बोले
      रमाकांत मैंने तुमसे
      आपातकाल पर लिखने कहा था
      मैंने मुझ पर  लिखने कब कहा था ?
      मैंने कहा आदरणीय
      मैंने तो आपातकाल पर ही लिखा है।
      आपको मैंने  माध्यम ही बनाया  है
      कहिये मैंने क्या कुछ गलत किया ?
      आपने छात्रों को रास्ता दिखाया
      आपके मार्गदर्शन में जन शक्ति
      समग्र  क्रांति की आंधी लेकर चली
      तानाशाही ख़त्म करने में सफल हुई
      जुल्म और आतंक का दौर ख़त्म हुआ।

 

      आपके ही प्रयासों से साबित हुआ
      देश बड़ा होता है
      होता नहीं कोइ आदमीं
      आपने ही साबित किया
      दिन के आते देर न लगती
      दिन के जाते देर न लगती
      अन्याय न क्र अन्याई
      टिकता ज्यादा देर नहीं।

 

      आपके ही प्रयासों से साबित हुआ
      शोषित और पीड़ित  
      जब अपना रंग बदलता है
      वक़्त बदलता है इतिहास बदलता है
      सही अर्थों में आप क्रांतिदूत हैं
      आगे रखे जाने के हक़दार हैं
      अगर हम चूक करते
      हम आपके गुनहगार होते
      इतिहास हमे कभी माफ़ नहीं करता।
      सुनकर बोले
      भक्तों के आगे भगवान भी हार जाते हैं
      में तो एक साधारण आदमी हूँ
      ऐसा कहकर क्रांतिदूत अंतर्ध्यान हो गए।  

 

जय प्रकाश नारायण जी भले ही हमारे बीच नहीं हैं तो क्या हुआ लगता है अब भी हमारे आस पास भ्रमण कर रहे हैं।  जीवन भर के संघर्षों में प्रेरणा के जो श्रोत्र रहे हैं में कैसे भुला देता उनको बोलो। काव्य कृति क्रांतिदूत जयप्रकाश नारायण  आपके हांथों  में सोपते अपार प्रसन्नता हो रही है। आपका प्यार मिलेगा।

महानुभावों के करकमलों द्वारा विमोचन

  • महंत श्री राजेश्री रामसुन्दरदास जी,  अध्य्क्ष गौसेवा आयोग
  • श्री गिरीश पंकज जी – व्यंगकार
  • श्री केशरीलाल वर्मा जी – कुलपति प. रविशंकर विश्विद्यालय रायपुर
  • पद्मश्री डा. भारतीबंधू( गायक किराना घराना )
  • पद्मश्री फुलवासन( समाज सेवी  )                        
  • श्री दामू अम्बेडरे जीअध्य्क्ष प्रेस क्लब रायप
  • श्री सुबाष मिश्र-सम्पादक
  • श्री नर्मदा प्रसाद मिश्र, अध्य्क्ष -छतीसगढ़ हिंदी साहित्य परिसद रायपुर
  • संचालन- श्री आशीष राज सिंघानिया ‘तन्हा शायर’, अध्य्क्ष  साईनाथ फाउंडेशन रायपुर

 

गरिमामयी उपस्थिति

इस गौरवमय कार्यक्रम में सर्व श्री सुभाष मिश्र,श्रीमती रूपेंद्र राज तिवारी, निधि सिन्हा, अनंता जायसवाल, अनिरुद्ध बड़रिया, डाँ०सोम गोस्वामी, आभिषेक सिंह, रामेश्वर शर्मा, महेशकुमार शर्मा, अनिल द्विवेदी, सतीश मिश्र, तानीर हुसेन ,निर्मलदास वैष्णव, डाँक्टर नेहा दीवान, उर्मिला मिश्रा, आनंद मोहन मिश्र, पन्नालाल गौतम ,सुधीर सिंह धीर ,डॉक्टर पुरुषोत्तम चंद्राकर, अरुणा रंजीत भोंसले, अनुलता बरडिय़ा दुर्ग,पतंजलि मिश्र अध्यक्ष जिलाइकाई गरियाबंद, चेतन भारती कोषाध्यक्ष राज्य इकाई, नरेन्द्र यादव,नीलेश द्विवेदी अध्यक्ष कोरबा इकाई, आकाश लूथरा ,संजीव तिवारी, हितेशकुमार खत्री,मीर अली मीर ,मनीष अवस्थी, अजय अवस्थी किरण,आशीष सिंह, डाँक्टर गिरिजा शंकर गौतम,डाँ०अर्चना पाठक,शीलकांत पाठक,दिग्विजय तिवारी, साबू जीअजय डंगे, डॉक्टर डी.के.पाठक, आशुतोष सिंह ,प्रसांत कुमार ,अभिनीत शुक्ल,वीरेंन्द्र पाण्डेय, कनिराम, योगेश उपाध्याय, विजय द्विवेदी, पूर्णेश डडसेना, जमुना साहू,पुष्पराज गुप्ता, राम गोपाल शुक्ल आदि साहित्यकारों,कलाकारों, पत्रकारों, समाजसेवियों ,संस्कृति कर्मियों की उपस्थिति महत्वपूर्ण रही।प्रारंभ में छत्तीसगढ़ केसुप्रसिद्ध लोककवि मीर अली मीर के स्वर के साथ राजगीत से कार्यक्रम का शुभारंभ एवं राष्ट्रगान से समापन हुआ।

रमाकांत बडारया
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