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चार लाइणा: नशा रोको

नशा जहर है

नशा जहर है
मत अपनाओ
क्यों खुद अपनी
मौत बुलाओ.

गुटके पर प्रतिबंध लगे

प्रतिबंधों की लूट है
लूट सके तो लूट,
गुटके प्रतिबंध लगे
दारू पर है छूट.
दारू पर है छूट
सिगरट पियो मजे से,
मरना सबको इक दिन
तुम तो जियो मजे से.
कह सुरेन्द्र कविराय
करके अंखियां बंद,
नुकसान वाली चीजों पर
तुरत लगे प्रतिबंध.

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बीबी रोये बच्चे रोयें

बीबी रोये बच्चे रोयें
हो घर की बर्बादी,
सेहत धन का नाश करे
जो होय नशे का आदी.

दारू छोड़ो

दारू की दुकान पर
भई पियक्कड़न की भीर,
कोऊ लोटे नाली में
कोऊ है बे चीर.
कोऊ है बे चीर,
घर में नहीं हैं दाने.
खुद बादशाह समझ
चल पड़े मयखाने.
बीबी के गहने बेचें
बच्चों के संग मारपीट.
दारू का फिर क्या मजा
अगर न खाया मीट.
कह सुरेन्द्र कविराय
ये रोग बड़ा है मारू
बे मौत मर जाओगे
अगर न छोड़ी दारू.

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श्री सुरेन्द्र हायरण

मेनेजर (रिटायर्ड)
बैंक ऑफ बदोड़ा, ग्वालियर (म. प्र.)

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