ज्ञान का दीपक जलाना है

by | काव्य, रंग बसंत | 0 comments

कदम से कदम मिलकर साथ चलना है ।
मुश्किल रास्तों को भी आसान बनाना है।

जिस – जिस घर में भी घनघोर अन्धेरा है ।
उस घर में हमे ज्ञान का दीपक जलाना है ।

जो भी भटके हुए लोगों को राह दिखाता है।
उसके कदमों में ही यार झुकता जमाना है।

काम हमको नेकी का सदा ही करते जाना है।
भलाई करने वालों को याद करता जमाना है।

मुसीबत में परिवार के साथ जो खड़ा रहता है।
मुसीबत के वक़्त उसको साथ देता जमाना है।

रमाकांत बडारया
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