नए तरीके से समाज सेवा

दयाशीलता विशेषांक सामाजिक चिंतन

कुछ दिन पूर्व मेरे एक परिचित पर दोहरा संकट आया, कोरोना ने रोजगार छीन लिया और स्कूल वालों ने बच्चों से बिना फीस जमा किये ऑनलाइन क्लास अटेंड करने का अधिकार । मेरा मित्र और उसका परिवार अत्यंत दुखी हुआ । उसकी स्थिति देख कुछ मित्रों ने मिलकर सहायता तो कर दी लेकिन यह सहायता कब तक चलेगी यह सोच कर हम सब चिंतित थे । व्यक्तिगत सहयोग की संभावनाएं अत्यंत सीमित होती हैं ।

हमने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए यह जानने की कोशिश की कि क्या हमारे समाज मे ऐसी कोई संगठनात्मक व्यवस्था है जो समाज के किसी परिवार की मदद करती हो । हमे यह जानकर अत्यंत दुख और आश्चर्य हुआ कि हमारे समाज मे सम्पूर्ण देश में कहीं भी ऐसी व्यवस्था नहीं है । आज अवश्य है कि कभी किसी को जरूरत पड़ने पर समाज के लोग आगे आकर व्यक्तिगत स्तर पर यथेष्ट सहयोग करने का प्रयास करते हैं । व्यक्तिगत स्तर पर यह सराहनीय है।

क्या कारण हैं जो ऐसी व्यवस्था नही बनाई गई

असंगठित व्यावसायिक स्थिति हमारीं कई समस्याओं का कारण रही है । हमारे समाज की आर्थिक व्यवस्था दो रिश्तों पर रही, एक व्यवसायी और दूसरा कारीगर, अब जो व्यवसाई तो ठहरा सक्षम और कारीगर ठहरा रोज़ कुआ खोद कर प्यास बुझाने वाला! जो सक्षम है उसने कभी यह सोचा ही नही की जो कारीगर हैं उनके कल्याण की कोई योजना बनाएं । और जो कारीगर थे वे इतने स्वाभिमानी की किसी से मदद क्यों मांगे ।

मानसिकता बदलने की जरूरत

अपनों की सहायता करना चाहिए, अगर आपका स्वजातीय परिवार आपके सहयोग से अपनी आर्थिक और सामाजिक स्थिति को सुधार सके तो इसका प्रयास होना चाहिए, ताकि समाज सक्षम बने, सक्षम समाज को सम्मान मिलता है जिसमे सबका हिस्सा होता है ।

अतः जरूरत है ऐसा माहौल बनाने की जिसमे ससम्मान सहायता उपलब्ध करवाई जाने की व्यवस्था बन सके । जैसे छोटा स्वरोजगार आरम्भ करने हेतु बिना ब्याज पर अल्पावधि के छोटे ऋण जिसे आसान किश्तों में चुकाया जा सके ।

शिक्षा सहायता स्कॉलरशिप, जिसे नौकरी लगने पर वापस चुकाया जाने और किसी अन्य बच्चे को शिक्षा सहायता देने में योगदान की शर्त हो ताकि जब एक बच्चा समाज की सहायता से शिक्षित हो कर अपना रोजगार प्राप्त करे तब वह समाज का वह पैसा भी लोटा दे जिससे उसका आत्मसम्मान बना रहे साथ ही अन्य बच्चे को जितना संभव हो मदद भी करे ताकि उसे किसी अन्य की सहायता करने का सुख भी प्राप्त हो। इससे एक बेहतर सामाजिक सहायता व्यवस्था स्थापित हो सकती है ।

नया समय है अतः नए तरीके से समाजसेवा करने की आवश्यकता है । भंडारे, बड़े बड़े खर्चीले समारोह इत्यादि के अलावा भी तरीके ढूंढने होंगे अगर समाज का उज्ज्वल भविष्य देखना हो ।

प्रदीप वर्मा (हैहयवंशीय)
Latest posts by प्रदीप वर्मा (हैहयवंशीय) (see all)