नारी तू नारायणी

चुनौतियाँ और अवसर सामाजिक चिंतन

“नारी तू नारायणी ” 

संवाद ” जैसे सकारात्मक कार्यक्रम का आयोजन करने के लिये सबसे पहले तो मैं आयोजकों को हृदय से धन्यवाद देना चाहती हूं । सामाजिक मुद्दों पर आधारित इस राष्ट्रीय बहस में आपने मुझे स्थान दिया यह मेरे लिये सौभाग्य की बात होगी । इस महत्वपूर्ण विषय के लिये मेरा विचार है कि, समाज को इस दिशा में गंभीरता से विचार करने की जरूरत है । किसी भी बेटी के माता पिता के द्वारा बेटी को भी बेटों की तरह पढ़ाता, जिम्मेदार और अपने पैरों पर खड़ा करना कोई अपराध तो नहीं है । लेकिन उच्च शिक्षा लेकर आत्मनिर्भर बनने वाली बेटियों से भी मेरा बस इतना ही निवेदन है कि, पढ़ो जितना मन करे पढ़ो नौकरी करके अपने परिवार का सहयोग भी करें । लेकिन अगर आप किसी मध्यमवर्गीय और व्यवसाय से जुड़े हुए युवक का हाथ थाम लेती हैं तो इससे बड़ा कोई पुण्य नहीं । इस स्थिति में आपका पति आपको सिर आंखों पर बिठाकर रखेगा । लेकिन नौकरी वाले से ही विवाह करेंगी यह पूरी तरह से आपका स्वार्थ ही कहलायेगा । 

किसी ने कहा भी है ” नारी तू नारायणी ” आपका उच्च शिक्षित और नौकरी पेशा होने का महत्व तब और बढ़ जायेगा, जब आप किसी कमजोर परिवार का सहारा बनेंगी । जब परिवार में बेटे और बेटी को समान भाव से देखा जाता है, तो आप भी अपने कम आय वाले पति का सहारा बन सकती हैं । स्त्री एवं पुरूष दोनों परस्पर पूरक हैं, किसी एक के बिना दोनों का कोई अस्तित्व नहीं । ईश्वर ने इसी लिये दोनों को ही बनाया है । 

दूसरी बात हमारा समाज मेहनत कश समाज है, जो मजदूरी और व्यवसाय से जुड़ा है । ज्यादातर युवा वयस्क होते ही परिवार की जिम्मेदारी संभाल लेते हैं, और अपने परिवार का सहारा बन जाते हैं । आप में से ही न जाने कितनी ऐंसी भी बेटियां होंगी, जिनके परिवार में बर्तन निर्माण का काम होता है, आपके पिता और भाई मिलकर घर गृहस्थी की जिम्मेदारी संभालते हैं । दोनों ने आपको उच्च शिक्षा दिलाकर आपको आत्मनिर्भर बनाया है । आप अपने लिये नौकरी पेशा वर चाहती हैं ठीक है, यह आपका अधिकार भी बनता है कि आप अपने लिये वर चुनने का अधिकार भी बनता है । लेकिन तस्वीर का दूसरा पहलू भी देखिये, आपका अपना भाई जो कम शिक्षित है, मजदूरी अथवा व्यवसाय से जुड़ा है । अगर आपकी तरह ही अगर सभी बेटियां भी अपने लिये यही विचार रखती हैं तो आपके भाई का विवाह कैसे होगा ? 

दूसरे समाज के युवकों को अपना जीवनसाथी चुनने की भूल मत कीजिये

तीसरी बात समाज के युवकों को नज़रअंदाज कर किसी दूसरे समाज के युवकों को अपना जीवनसाथी चुनने की भूल भी मत कीजिये । अरे बेटियां तो अपने समाज, कुल और वंश को बढ़ाने जैसा पुण्य का कार्य करती हैं । ईश्वर ने स्त्री के रूप में एक परम शक्ति को अवतरित किया है, जिसने समय आने पर रणचंडी के रूप में देवताओं को सहयोग दिया है । इस पुरूष प्रधान समाज ने भले ही, स्त्री और पुरूष के लिये दोहरा मापदंड अपना कर समस्त नारी जाति की उपेक्षा की हो, लेकिन नारी ने हमेशा अपने कर्तव्य का पूरी निष्ठा से निर्वहन किया है । 

आज हमारे समाज को आपके सहयोग की जरूरत है, मेरा आपसे बस यही निवेदन है कि अपनी सोच में बदलाव लाकर इस समस्या के समाधान में सहभागी बनो । 

 

आपकी बहिन 

श्रीमती भानुमति बेन कंसारा
बालासिनोर (वढवान) गुजरात

श्रीमती भानुमति बेन कंसारा
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