फिर धार किसलिए

मुश्किल में जब कोई कामं न आये ।
जीवन का बोलो फिर सार किसलिए।

लिखा किसी के जब काम न आये।
बोलो कलम में फिर धार किसलिए ।

अपनों के ही सुख दुःख में शामिल।
बाकी देखो फिर संसार किसलिए ।

बीच भवर में जब भी फस जाये नैय।
बोलो हांथों में फिर पतवार किसलिए ।

मुश्किल में जब अपना फस जाये कोइ ।
बोलो अपनों का बड़ा संसार किसलिए ।

भीड़ में सदा अलग दिखना

आपके मज़बूत हांथों मे है आज।
प्रगति और समृद्धि लाने की डोर।

हांथों में सम्हालकर इसको रखना।
अपनी कोशिश को सदा जारी रखना।

ज़मी पैर सदा ही खूब जमाकर रखना।
स्वार्थ की आंधी में आंधी मत फसना।

ज़रूरत मंदों के लिए दिल में अपने ।
बेताब जगह सदा ही बनाकर रखना।

कथनी- करनी में अंतर मत रखना।
अपने परायों में भेद कभी मत करना।

भीड़ मे खुद सबसे अलग दिखना।
स्वाद परमार्थ का जी भरकर चखना।

रमाकांत बडारया
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