डिजिटल विमर्श

बसंत

पावन बसंत मधुरम बसंत,जय जय बसंत।
सुखमय बसंत मंगल बसंत जय जय बसंत।।

दिन बड़े गर्मी बड़ी
मौसमी मधुमास भली
सुनहरा पर्व वसंती
जीने की आस बड़ी
सब कुछ नया लागे, जय जय बसंत।
सुखमय बसंत मंगल बसंत जय जय बसंत।।

मौसमी देश है भारत
स्वर्णिम देश है भारत
जन्मे प्रभु यहीं पर
सनातनी देश है भारत
संस्कार सभ्यता सब कुछ यहां जय जय बसंत।
सुखमय बसंत मंगल बसंत जय जय बसंत।।

हिलमिल रहें सुखमय रहें
प्रेम से सब गले मिलें
गाएं मिलकर गीत बसंती
संगीत मिले सुर ताल मिले
वरदान मिले सब ज्ञान मिले जय जय बसंत।
सुखमय बसंत मंगल बसंत जय जय बसंत।।

रचियता
लक्ष्मीनारायण “उपेंद्र”
एडवोकेट

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इस लेख के रचनाकार से मिलिये

प्रदीप वर्मा (हैहयवंशीय)

मास्टर इन कम्प्युटर एप्लिकेशन (MCA), मास्टर इन हिन्दी लिट्रेचर (MA, साहित्य), पी॰एस॰एम॰ (scrum॰org, यूएस), बेचलर ऑफ लॉं (LLB ऑनर), बेचलर ऑफ कॉमर्स, एम.एस.पी.सी.ए.डी.

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