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भगवान् दत्तात्रय जी की जन्मोत्सव पर विशेष भेंट

भगबान्  कार्त्तबीर्य  सहस्रार्जुन जी के पूज्य गुरू देब योगीराज भगबान् दत्तात्रेय जो कि श्री बिष्णु जी के चौबिस अबतारो मै एक है ! इनके चौबिस प्राकृतिक गुरू थे जिसमे अजगर -साँप – गाय – कुत्ता इत्यादि थे , को अपना गुरू माना ! ये योगियो मै परम् योगी थे ! इनके पिता का नाम अत्रि ऋषि था एंब माता का नाम पतिब्रता अनुसुईया था ! योगाचार्य दत्तात्रेय जी ने ही भगबान् कार्तबीर्य जी को योग विधा की दीक्षा एंब बर दिये थे !

भगबान् दत्तात्रेय जी की आरती !!

ॐ जय  दत्तात्रेय,  स्वामी  जय   दत्तात्रेय !
तुम को निश दिन ध्यावत् श्री कार्त्तवीर्यहरे!!
ॐ जय दत्तात्रेय !!!

तुम अनुसुईया सुत,   व्रह्मा – विष्णु-  शिवे !
तीनो रूप मै एका ,  श्री   गुरू    दत्तात्त्रेय !
ॐ जय दत्तात्रेय !!!

सहस्रवाहु को वर देकर, तुम उपकार किये !
सहस्रभुजा वर देकर, वसुन्धरा विजय करे !!
ॐ जय दत्तात्रेय !!!

चौबिस   गुरू  तुम्हारे , कुत्ता – गाय – पतंग !
ब्रह्मा- बिष्णु- महेशा ,  तीनो  एक ही   अंग !!
ॐ जय दत्तात्रेय !!!


तुम स्मृति  गामी  हो,   सुमिर जो भक्त  करे !
पल मै प्रकट हो जाते , सारे  तुम   कष्ट  टरे !!
ॐ जय दत्तात्रेय !!!

तुम योगियो के योगी , भक्तो को  प्रसन्न करें !
सब सम्भब हो जाता ,  तुम्है  जो प्रसन्न करे !!
ॐ जय दत्तात्रेय !!!

ॐ   जय   दत्तात्रेय , ॐ जय  योगीराज   हरे !
सब ऐश्बर्य सुख पाता,  तुम्हे  जो  सुमिर करे !!
ॐ जय दत्तात्रेय !!!

।। श्री दत्त घोरकष्टोद्धरण स्तोत्र ।।

श्रीपाद श्रीवल्लभ त्वं सदैव ।
श्रीदत्तास्मान्पाहि देवाधि देव ।।
भावग्राह्य क्लेशहारिन्सुकीर्ते ।
घोरात्कष्टादुद्धरास्मान्नमस्ते ॥१॥

त्वं नो माता त्वं पिताप्तोऽधिपस्त्वं ।
त्राता योगक्षेमकृत्सदगुरूस्त्वं ।।
त्वं सर्वस्वं ना प्रभो विश्वमूर्ते ।
घोरात्कष्टादुद्धरास्मान्नमस्ते ॥२॥

पापं तापं व्याधिंमाधिं च दैन्यं ।
भीतिं क्लेशं त्वं हराऽशुत्व दैन्यम् ।।
त्रातारं नो वीक्ष ईशास्त जूर्ते ।
घोरात्कष्टादुद्धरास्मान्नमस्ते ॥३॥

नान्यस्त्राता नापि दाता न भर्ता ।
त्वतो देव त्वं शरण्योऽकहर्ता ॥
कुर्वात्रेयानुग्रहं पुर्णराते ।
घोरात्कष्टादुद्धरास्मान्नमस्ते ॥४॥

धर्मेप्रीतिं सन्मतिं देवभक्तिम् ।
सत्संगप्राप्तिं देहि भुक्तिं च मुक्तिम् ।।
भावासक्तिर्चाखिलानंदमूर्ते ।
घोरात्कष्टादुद्धरास्मान्नमस्ते ॥५॥

॥श्लोकपंचकमेतद्यो लोकमंगलवर्धनम् ॥
प्रपठेन्नियतो भक्त्या स श्रीदत्तप्रियोभवेत् ॥
श्रीवासुदेवानंदसरस्वती स्वामीविरचितं श्री दत्त घोरकष्टोद्धरण स्तोत्रम्
।। श्रीपाद राजं शरणं प्रपद्ये ।।

।। श्री दत्तात्रेय स्तोत्र ।।

भगवान श्री दत्तात्रेय की इस स्तुति का पाठ करने से दूर होता है पितृदोष, होती हैं हर मनोकामना पूरी-भगवान श्री दत्तात्रेय को तंत्राधिपति भी कहा जाता हैं, ऐसा कहा जाता हैं कि जो भी मनुष्य हर दिन भगवान दत्तात्रेय का स्मरण करते हुए उनके मंत्रों का जप करता हैं एवं उनके श्री नारद पुराण में रचित दिव्य स्तोत्र का पाठ करता हैं उन मनुष्य के जीवन के सभी कष्ट दूर होने के साथ पितृदोष से भी मुक्ति मिलने के साथ सतत उन्नति करने लगता है । इस स्तुति का पाठ भगवान दत्तात्रेय के जन्मोत्सव (दत्तपूर्णिमा) मार्गशीर्ष पूर्णिमा से शुरू करके प्रतिदिन करने से हर मनोकामनां भी पूरी होती हैं।

जटाधरं पाण्डुराङ्गं शूलहस्तं कृपानिधिम् । सर्वरोगहरं देवं दत्तात्रेयमहं भजे ॥
अस्य श्रीदत्तात्रेयस्तोत्रमन्त्रस्य भगवान् नारदऋषिः । अनुष्टुप् छन्दः । श्रीदत्तपरमात्मा देवता । श्रीदत्तप्रीत्यर्थे जपे विनियोगः ॥

जगदुत्पत्तिकर्त्रे च स्थितिसंहार हेतवे ।
भवपाशविमुक्ताय दत्तात्रेय नमोऽस्तुते ॥
जराजन्मविनाशाय देहशुद्धिकराय च ।
दिगम्बरदयामूर्ते दत्तात्रेय नमोऽस्तुते ॥

कर्पूरकान्तिदेहाय ब्रह्ममूर्तिधराय च ।
वेदशास्त्रपरिज्ञाय दत्तात्रेय नमोऽस्तुते ॥
र्हस्वदीर्घकृशस्थूल-नामगोत्र-विवर्जित ।
पञ्चभूतैकदीप्ताय दत्तात्रेय नमोऽस्तुते ॥

यज्ञभोक्ते च यज्ञाय यज्ञरूपधराय च ।
यज्ञप्रियाय सिद्धाय दत्तात्रेय नमोऽस्तुते ॥
आदौ ब्रह्मा मध्य विष्णुरन्ते देवः सदाशिवः ।
मूर्तित्रयस्वरूपाय दत्तात्रेय नमोऽस्तुते ॥

भोगालयाय भोगाय योगयोग्याय धारिणे ।
जितेन्द्रियजितज्ञाय दत्तात्रेय नमोऽस्तुते ॥
दिगम्बराय दिव्याय दिव्यरूपध्राय च ।
सदोदितपरब्रह्म दत्तात्रेय नमोऽस्तुते ॥

जम्बुद्वीपमहाक्षेत्रमातापुरनिवासिने ।
जयमानसतां देव दत्तात्रेय नमोऽस्तुते ॥
भिक्षाटनं गृहे ग्रामे पात्रं हेममयं करे ।
नानास्वादमयी भिक्षा दत्तात्रेय नमोऽस्तुते ॥

ब्रह्मज्ञानमयी मुद्रा वस्त्रे चाकाशभूतले ।
प्रज्ञानघनबोधाय दत्तात्रेय नमोऽस्तुते ॥
अवधूतसदानन्दपरब्रह्मस्वरूपिणे ।
विदेहदेहरूपाय दत्तात्रेय नमोऽस्तुते ॥

सत्यंरूपसदाचारसत्यधर्मपरायण ।
सत्याश्रयपरोक्षाय दत्तात्रेय नमोऽस्तुते ॥
शूलहस्तगदापाणे वनमालासुकन्धर ।
यज्ञसूत्रधरब्रह्मन् दत्तात्रेय नमोऽस्तुते ॥

क्षराक्षरस्वरूपाय परात्परतराय च ।
दत्तमुक्तिपरस्तोत्र दत्तात्रेय नमोऽस्तुते ॥
दत्त विद्याढ्यलक्ष्मीश दत्त स्वात्मस्वरूपिणे ।
गुणनिर्गुणरूपाय दत्तात्रेय नमोऽस्तुते ॥

शत्रुनाशकरं स्तोत्रं ज्ञानविज्ञानदायकम् ।
सर्वपापं शमं याति दत्तात्रेय नमोऽस्तुते ॥
इदं स्तोत्रं महद्दिव्यं दत्तप्रत्यक्षकारकम् ।
दत्तात्रेयप्रसादाच्च नारदेन प्रकीर्तितम् ॥

॥ इति श्रीनारदपुराणे नारदविरचितं दत्तात्रेयस्तोत्रं सुसम्पूर्णम् ॥

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इस लेख के रचनाकार से मिलिये

आचार्य श्री विनोद शास्त्री

श्री कार्त्तवीर्य नक्षत्र ज्योतिष संस्थान्, (प्रश्न एंव खगोल शास्त्री)
श्री कार्त्तवीर्य नक्षत्र ज्योतिष संस्थान् हाथरस!
राष्ट्रीय धर्म प्रचारक
श्री अखण्ड हैहयवंशी क्षत्रिय विकास समिति (रजि), भारत!
हाथरस, फोन: 8445603326

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