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भारतीय भोजन से दूर होने के दुष्परिणाम

भारतीय भोजन से दूर होने के दुष्परिणाम 

इम्युनिटी पावर कैसे बनेगी, हर भारतीय गंभीर बीमारियों का शिकार – हर घर होंगा अस्पताल,शुरूआत हो चुकी है, बंद नही हुई मिलावट तो “बल, बुद्धि, पौरूष सब क्षीण” 40% आबादी बीमार WHOकी चेतावनी जनता बेबस ठर्रा छाप कानून से ? हिन्दुत्व खतरे मे 25वर्षो से चल रहा षडयंत्र, Fssai मानक प्राधिकरण मौन ?

नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूट्रिशन के डाटा में दावा किया गया कि भारतीय भोजन में 30 साल पहले जैसी ताकत नहीं रही शरीर पर दुष्प्रभाव मिलावटी खाने से कई तरह की गंभीर बीमारियां होती हैं। मसलन, लिवर व किडनी की समस्या, पेट में गड़बड़ी, डायरिया, कैंसर, उल्टी, दस्त, जोड़ों में दर्द, पाचन तंत्र, रक्तचाप व हृदय संबंधी परेशानियां, फूड पॉइजनिंग, एनीमिया, त्वचा संबंधी बीमारियां आदि। कई दफा मिलावटी खाने से गर्भस्थ शिशु और मस्तिष्क तक को नुकसान पहुंचता है। सोचने की क्षमता भी प्रभावित होती है। 

 

जानते हैं किस भोज्य पदार्थ मे क्या नुकसान छुपा है 

गेस्ट्रोएंट्रोलॉजिस्ट डॉ. संदीप निझावन का कहना है कि मिलावटी खाद्य पदार्थों में सिंथेटिक उत्पाद होते हैं, जो एडिबल प्रोडक्ट तो होते नहीं हैं। इस वजह से एसिडिटी, अल्सर जैसी परेशानियां हो जाती हैं। लिवर पर सूजन आ सकती है। हेपेटाइटिस भी हो सकता है। आमाशय पर भी असर पड़ता है।

 

आटा  

बाजार मे बिकने वाला आटे मे बेंजोयलपर ऑक्साइड, जिसे फ्लौर इम्प्रूवर भी कहा जाता है। इसकी पेरमिसीबल लिमिट 4 मिलीग्राम है, लेकिन आटा बनाने वाली फर्में 400 मिलीग्राम तक ठोक देती हैं। कारण क्या है ? आटा खराब होने से लम्बे समय तक बचा रहे। बेशक़ उपभोक्ता की किडनी का बैंड बज जाए।

 

रिफाईन्ड तेल

नुकसान सबसे ज्यादा मौतें देने वाला भारत में कोई है तो वह है… रिफाईनड तेल केरल आयुर्वेदिक युनिवर्सिटी ऑफ रिसर्च केन्द्र के अनुसार, हर वर्ष 20 से 30 लाख लोगों की मौतों का कारण बन गया है… रिफाईनड तेल|

 

आयोडीन नमक 

आप सबको आयोडीन की कमी हो गई है। ये सेहत के लिए बहुत अच्छा है आदि आदि बातें पूरे देश में प्रायोजित ढंग से फैलाई गई । और जो नमक किसी जमाने में 2 से 3 रूपये किलो में बिकता था । उसकी जगह आयोडीन नमक के नाम पर सीधा भाव पहुँच गया 8 रूपये प्रति किलो और आज तो 20 रूपये को भी पार कर गया है | दुनिया के 56 देशों ने अतिरिक्त आयोडीन युक्त नमक 40 साल पहले बैन कर दिया अमेरिका में नहीं है जर्मनी मे नहीं है फ्रांस में नहीं ,डेन्मार्क में नहीं , डेन्मार्क की सरकार ने 1956 में आयोडीन युक्त नमक बैन कर दिया क्यों ?

उनकी सरकार ने कहा हमने आयोडीन युक्त नमक खिलाया !(1940 से 1956 तक ) अधिकांश लोग नपुंसक हो गए ! जनसंख्या इतनी कम हो गई कि देश के खत्म होने का खतरा हो गया* ! उनके वैज्ञानिकों ने कहा कि आयोडीन युक्त नमक बंद करवाओ तो उन्होने बैन लगाया। और शुरू के दिनों में जब हमारे देश में ये आयोडीन का खेल शुरू हुआ इस देश के बेशर्म नेताओं ने कानून बना दिया कि बिना आयोडीन युक्त नमक भारत में बिक नहीं सकता|

 

समुद्री नमक के भयंकर नुकसान

ये जो समुद्री नमक है आयुर्वेद के अनुसार ये तो अपने आप में ही बहुत खतरनाक है ! क्योंकि कंपनियाँ इसमें अतिरिक्त आयोडीन डाल रही है। अब आयोडीन भी दो तरह का होता है एक तो भगवान का बनाया हुआ जो पहले से नमक में होता है । दूसरा होता है “industrial iodine” ये बहुत ही खतरनाक है। तो समुद्री नमक जो पहले से ही खतरनाक है उसमे कंपनिया अतिरिक्त industrial iodine डाल को पूरे देश को बेच रही है। जिससे बहुत सी गंभीर बीमरियां हम लोगों को आ रही है । ये नमक मानव द्वारा फ़ैक्टरियों में निर्मित है

 

आम तौर से उपयोग मे लाये जाने वाले समुद्री नमक से उच्च रक्तचाप (high BP ) ,डाइबिटीज़, आदि गंभीर बीमारियो का भी कारण बनता है । इसका एक कारण ये है कि ये नमक अम्लीय (acidic) होता है । जिससे रक्त अम्लता बढ़ती है और रक्त अमलता बढ्ने से ये सब 48 रोग आते है । ये नमक पानी कभी पूरी तरह नहीं घुलता हीरे (diamond ) की तरह चमकता रहता है इसी प्रकार शरीर के अंदर जाकर भी नहीं घुलता और अंत इसी प्रकार किडनी से भी नहीं निकल पाता और पथरी का भी कारण बनता है 

 

ब्रेड मे है पोटैशियम ब्रोमोट

पोटैशियम ब्रोमोट से पेट के कैंसर और किडनी की पथरी जैसी बीमारी हो सकती है. इसी तरह पोटेशियम आयोडेट होने से शरीर में जरुरत से ज्यादा आयोडीन चला जाता है. नतीजा थायराइड ग्लैंड में गड़बड़ी होने लगती है. और ब्रेड तो है ही ऐसी चीज. जिसे लोग रोज ही खाते हैं.चाट, फुल्की और एल्कोहल के ज्यादा सेवन से लिवर कमजोर हो रहा हे

 

कोल्डड्रिंक्स मे कीटनाशकों का प्रयोग

में उपलब्ध कीटनाशकों का मानव शरीर पर दुष्प्रभाव लिन्डेन का मानव शरीर पर दुष्प्रभाव: लिन्डेन हमारे शरीर में जाने के बाद वसीय उतकों में जमा हो जाता है। यह शरीर के लीवर, किडनी तथा प्रतिरोधक तन्त्र को नष्ट करता है और कैंसर पैदा करता है। मानव शरीर की सभी ग्रन्थियों पर भयंकर दुष्प्रभाव लिन्डेन का होता है। 

 

डी डी टी का मानव शरीर पर दुष्प्रभाव 

डी डी टी महिलाओं के वक्षस्थल (स्तन) के कैंसर के लिए मुख्य जिम्मेदार रसायन है। मानव शरीर की सैक्स क्षमता को बहुत कम करने का काम करता है। पुरुषों के वीर्य में शुक्राणुओं की क्षमता कम करने का कार्य भी यह डी डी टी रसायन करता है।

 

कैफीन का दुष्प्रभाव 

इस रसायन का शरीर पर काफी बुरा असर होता है। अनिंदा, घबराहट, चिंता, चिड़चिड़ापन, हड्डियों में कमजोरी आदि बिमारीयाँ कैफीन के कारण होती हैं। यदि गर्भवती स्त्रियों के शरीर में कैफीन की मात्रा कुछ अधिक हो जाये तो फिर पैदा होने वाले बच्चे के शरीर में काफी विकृतियाँ हो जाती है। ठंडे पेयों में मीठापन लाने वाले रसायनों का दुष्प्रभाव:ठंडे पेयों में मीठापन लाने के लिए सैकीन, एस्परटेम का उपयोग किया जाता है। 

 

नमकीन

नमकीन से सेहत पर पड़ रहा विपरीत असर बाजार में तिबडा, मक्का का बेसिन,मुलतानी मिट्टी और पाम के तेल से बने नमकीन का उपयोग करना सेहत के लिए हानिकारक हो सकता है। चिकित्सको के अनुसार तिबड़ा का उपयोग करने से पेट संबंधी बीमारियां होती है, वहीं पाम के तेल का सेवन करने से हृदय रोग एवं लीवर से जुड़ी बीमारियां होने का खतरा बना रहता है इसलिए चिकित्सको द्वारा इन दोनो ही चीजों को उपयोग नहीं करने की सलाह लोगों को दी जाती है।

संकलन:
राजेंद्र रामकिशन मालवीय
(पत्रकार)
9926559099

 

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इस लेख के रचनाकार से मिलिये

प्रदीप वर्मा (हैहयवंशीय)

मास्टर इन कम्प्युटर एप्लिकेशन (MCA), मास्टर इन हिन्दी लिट्रेचर (MA, साहित्य), पी॰एस॰एम॰ (scrum॰org, यूएस), बेचलर ऑफ लॉं (LLB ऑनर), बेचलर ऑफ कॉमर्स, एम.एस.पी.सी.ए.डी.

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