महादेव का बनारस

काव्य

कभी आऊंगा चौखट पे तुमहरी देखे कब तुम बुलाते हो

बैठुंगा घाट पे भी तुम्हरी देखे कितना लहराती हो
घोटुंगा भाँग भी देखे कितना चढ़ जाते हो
घूमुंगा गलियों में भी तुम्हरी देखे कितना भूलाती हो

धुनी रमाऊंगा मन्दिर के किसी कोने देखे कब तक रूठ जाते हो,
चखुंगा चाट काचौरी भी देखे कितना खिलाते हो
पढूँगा वेद पुरान भी देखे कितना बाचते हो
पहनुंगा धोती जनेऊ भी देखे कितना ईठलाते हो

घोलूँगा पान भी तुम्हारा देखे कितना लाली लाते हो
बांध कलावा शीश नवाऊंगा,आऊंगा तुम्हरे दर भी
मनाऊंगा भोले को मैं भी
देखे कितना जल तुम चढाते हो

जिवित नहीं तो चार कांधे आऊँगा
महा शमशान में स्वाहा होऊ फिर देखे कैसे न मोक्ष दिलाते हो

छोड़ूँगा ना कुछ भी ऐ बनारस जो कुछ भी बतलाते हो
कभी आऊंगा चौखट पे तुमहरी देखे कब तुम बुलाते हो
देखे कब तुम बुलाते हो !

आनंद कुमार कांस्यकार
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