युवकों के अनुपात में युवतियों की कमी

चुनौतियाँ और अवसर सामाजिक चिंतन

आजकल युवकों के  अनुपात में युवतियों की कमी  होना 

संवाद के माध्यम से इस विषय पर परिचर्चा करने के लिए आयोजकों का धन्यवाद देना चाहती हु। विषय सच मे विचार करने योग्य है, वैसे तो इस विषय से जुड़ी बहुत सारी बाते है जिन पर हम अपने विचार रख सकते पर आज  मैं सिर्फ युवकों की बढ़ती उम्र व संख्या,  इसके कुछ  मुख्य बिंदु है जिसपर मैं अपने विचार रखना चाहुगी। युवतियों  का उच्चशिक्षित व नौकरी पेशा  होना व युवाओं का शिक्षित होकर पुश्तैनी व्यवसाय में लग जाने से उनको नकारा जाना,  नौकरी करने वाले युवकों को प्राथमिकता देने से व्यवसाय में रत अच्छे व संस्कारी युवको को विवाह के लिए योग्य युवतिया नही मिलने से भी  विवाह में विलंब होंना एक बहुत बड़ा कारण है।  

यूवतिया छोटे शहरो या कस्बे में रहने वाले परिवारों में भी रिश्ता  करना पसंद नही करती क्योकि  सभी  बड़े शहर की चकाचौंध  रहन सहन लाइफ स्टाइल से प्रभावित है और बेहतर रिश्तों की  चाह में रिश्ते ठुकराकर  आये हुए रिश्तों से इनकार करते जाने से भी  रिश्ते आने बन्द हो जाते है क्योकि हर बात सही समय पर ना हो तो हम पिछड़ जाते है उनमें से एक बात विवाह के  संबंध में भी लागू होती है |

श्रीमती शशि शैलेन्द्र खमेले
राष्ट्रीय अध्यक्ष
हैहयवंशीय क्षत्रिय केन्द्रीय संचालन समिति (महिला प्रकोष्ठ)

श्रीमती शशि शैलेन्द्र खमेले
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