डिजिटल विमर्श
Home » लेख » स्तम्भ » झरोखा » वृक्षों वनस्पति को संतान की तरह प्यार करें..

वृक्षों वनस्पति को संतान की तरह प्यार करें..

प्रजनन रोकें वृक्ष उगायें, शिक्षा और सहकार बढायें।। 11 जुलाई 2021 

माननीय प्रधानमंत्री जी कह रहे हैं कि

”जन संख्या विस्फोट भविष्य के लिए खतरा है अपने परिवार को सीमित रखना भी देश भक्ति है।” 

बिल्कुल सही कहा आपने। पूर्व प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी के समय भी नसबंदी द्वारा जन संख्या नियंत्रण की योजनाएं शुरू की गई थी । जो सफल रही थी… किंतु अब स्थित बहुत चिंता जनक है। आज 7. 7 अरब हो चुकी है विश्व की जनसंख्या। हमारा पड़ोसी चीन 144 करोड़ के साथ पहले नम्बर पर है भारत 139 करोड़ के साथ दूसरे नम्बर पर है हम पड़ोसी चीन से सिर्फ़ 5 करोड़ कम हैं।  दोनों की जनसंख्या सारे संसार पर भारी पड़ रही हैं। जन संख्या विस्फोट से सारा संसार परेशान हैं जिस प्रकार बाढ़ सुनामी बीच में आ रहे प्रकृति, वृक्ष, वनस्पति, पशु पक्षियों को बहा ले जाती है ऐसी ही घातक स्थिति जनसंख्या विस्फोट के कारण आज हो रही है।

अंधाधुंध जंगल कट रहे हैं खेत खलियान उजड़ रहे हैं। चारों तरफ़ सीमेंट कंक्रीट के जंगल खड़े हो गए हैं जो पर्यावरण को नुकसान पहुंचा रहे हैं।  पशु पक्षियों के घर उजड़े, तालाब, कुएं, बावड़ी कृषि भूमि, जंगल में इंसान ने कब्जा कर उन्हें तहस नहस कर दिया। अब हमें देश और दुनिया के साथ वृक्ष वनस्पति उद्यान जल संसाधन आदि को आज से बचाना शुरू करना होगा।  

मैं भी एक बेटी का पिता हूँ इसिलिये अपील करता हूँ कि एक संतान या दो संतान हो वह योग्य शिक्षित संस्कारित और राष्ट्र भक्त हो तो यह सुखद और सुरक्षित भविष्य का संकेत है। अब हम प्रजनन रोकें और वृक्ष को संतान मानकर 5 पौधों को खाद पानी दें, उन्हें बच्चों की तरह प्यार करें जब बच्चों की याद आये तो वृक्षों को गले लगायें.. आपको मास्क और कोरोना का भय भी नहीं सतायेगा। मुझे देश विदेश में प्रज्ञा गीतों की प्रस्तुति के अनेकों अवसर मिले हैं हमनें जनसंख्या नियंत्रण के कार्यों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से मदद करने की कोशिश की है। 

हम गाते हैं – 

प्रजनन रोकें वृक्ष उगायें शिक्षा और सहकार बढायें ,
हर प्राणी में रूप तुम्हारा पंकज सा मुस्कराता ।
रवि मंडल की ज्योति तुम्हीं हो हे गायत्री माता ।।

अर्थात प्राणी वनस्पति में जीवन है आप उनसे प्यार करो वही हमारा परिवार है। संतान तो छोड़कर चली जाती है किंतु वह पेड़ आखिरी समय तक बिना मांगे आपको आक्सीजन देगा। संतान से तो हमें कहना पड़ता है वृक्ष बेटा तो बिना मांगे जीवन देगा प्रापर्टी भी नहीं मागेंगा। 

जन संख्या नियंत्रण के सरकार कठोर कदम उठाने जा रही है सरकार ने पहले भी कदम उठाए थे। हमें सपरिवार सरकार का साथ देना होगा। शिक्षा और सहकार सफलता का मूल मंत्र है। कई लोगों के संतान नहीं है तो अपने परिवार के बच्चों अभी कोरोना में अनाथ हूए बच्चों को गोद ले सकते हैं। यदि एक बेटी है तो बेटे के रूप में दामाद और यदि एक बेटा है तो बहूं के रूप में एक बेटी मिल जायेगी।

बदला जाये दृष्टिकोण यदि तो यह संसार बदल सकता है।

दृष्टि कोण के परिवर्तन से अरे जहान बदल सकता है।

 

टेक्स्ट की साइज़ सेट करें

इस लेख के रचनाकार से मिलिये

श्री देवेंद्र सक्सेना

तबला वादक, संगीत विभाग राजकीय कला कन्या महाविद्यालय कोटा 94142 91112

हमारा धर्म हमारी संस्कृति

टेक्स्ट की साइज़ सेट करें