संपादकीय: योगक्षेम विशेषांक

संपादकीय

संपादकीय: योगक्षेम विशेषांक

विमर्श का जून अंक आपके समक्ष प्रस्तुत है, दो दिन की देरी, अपने निर्धारित समय, माह की पहली तारीख, से आने केलिए क्षमा प्रार्थी हूँ, विलंब का कारण कितना ही महत्वपूर्ण क्यों न हो, अपने पाठकों को प्रतीक्षा करवाना एक अपराध तो है ही, परन्तु हमे विश्वास है जब आप विमर्श का जून अंक पढ़ेंगे तो इस विलंब केलिए हमे क्षमा अवश्य करेंगे ।

यह अंक प्रस्तुत करना एक चुनोती रही, पहले तो हमने इसका नाम “योगक्षेम विशेषांक” रख दिया तो उसी तरह का कंटेंट प्रस्तुत करना बड़ी चुनोती थी। दूसरा जो योगक्षेम की थीम है उसमें “काया, माया, मुक्ति” जैसे तीनों विषयों का समायोजन आ जाता है तो इस आधार पर सामग्री व्यवस्थित करना भी चुनौती रहा ।

इस बार के अंक को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस, विश्व रक्तदान दिवस के साथ साथ आत्मनिर्भर अभियान से भी जोड़ दिया गया है, यूँ भी काया, माया, और मुक्ति में सारा जीवन समाहित हो जाता है ।

विमर्श का यह अंक “काया” अर्थात स्वास्थ्य, “माया” अर्थात व्यवसाय और “मुक्ति” अर्थात साहित्यिक आनंद को समर्पित किया गया है । इसी विशेषताओं से भरा यह अंक खास लेखों की वजह से अत्यंत पठनीय, ज्ञानवर्धक और आनंददायक बन पड़ा है ।

इस अंक का विशेष महत्व इस बात से और बढ़ जाता है कि “साक्षात्कार इस बार” मे बहुत चुनौतीपूर्ण साक्षात्कार किया गया । इस साक्षात्कार के एक एक शब्द को पढ़ना एक सामाजिक जिम्मेदारी बन जाती है ।

इस बार राजस्थान, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश की प्रविष्ठियां बढ़ी हैं जो हमारी लोकप्रियता को बताती हैं, निश्चित ही हमारी जिम्मेदारी बढ़ती है ।

व्यक्ति “विशेष स्तम्भ” और “योगयुक्ति रोगमुक्ति” अन्य लेखों के अलावा विशेष पठनीय लेख हैं । तीन नई महिला कवियों की कविता के अलावा तीन अन्य महिला लेखिकाओं की प्रविष्टियां हमारे समाज की महिलाओं की विशेष उपलब्धियों का लहराता परचम है जिसे विमर्श प्रणाम करता है ।

पाठकों के स्नेह ने हमारी जिम्मेदारी बहुत बढ़ा दी है, हम नए प्रतिमान स्थापित कर रहे हैं, और यह भी की स्थापित पत्रिकाओं के साथ विमर्श की कोई प्रतिस्पर्धा नही है, हमने अपने स्टैंडर्ड स्वयं इतने उच्च रखे हैं कि हमारी प्रतियोगिता हमसे ही है ।

आपका स्नेह और सहयोग सदैव बना रहेगा इसी आशा के साथ विमर्श का जून अंक आपको समर्पित है ।

विशेष आभार विमर्श सलाहकरमण्डल के सदस्यों एवं अन्य महत्वपूर्ण सहयोगियों का आपके सहयोग और मार्गदर्शन के बिना यह पड़ाव मुश्किल था।

देश अभी कठिन समय का सामना कर रहा है | कोरोना नामक गंभीर संक्रामक बीमारी ने पूरे विश्व को दहला रखा है | आज पूरे समाज को इस संकट का सामना दूर रहकर एकजुटता से करना होगा | यह घरों मे रहने का समय है | विमर्श आपसे यह प्रार्थना करता है कि अपने परिवार के साथ रहें, खुद केलिए समय ही समय हे इसलिए स्वाध्याय करें, सामाजिक चिंतन करें, और समाज केलिए कोई नई रह निकालें जहां से समाज अपने संस्कृतिक वैभव कि गरिमा और आधुनिक समय कि गति के मध्य संतुलन बनाने मे सक्षम हो सकें| धन्यवाद |

प्रदीप वर्मा (हैहयवंशीय)
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