संपादकीय: स्वतंत्रता विशेषांक

संपादकीय समाचार

सभी देशवासियों को, विमर्श परिवार की और से स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक बधाइयाँ एवं शुभकामनाएँ । स्वतंत्रता दिवस हर वर्ष आता है, हम उत्सव मनाते हैं और दिन बीत जाता है । यह अवसर उपलब्ध नही हो पाता कि अपनी स्वतंत्रता के विषय मे कुछ सोच सकें । क्या आप कभी विचार करते हैं कि हम कितने स्वतंत्र हैं? कौन सी स्वतंत्रता हमे प्राप्त है और कौन सी नही? सामाजिक स्तर पर विचार करें तो क्या हमें अपने समाज के प्रति कर्तव्यों से विरत रहने, उदासीन रहने की स्वतंत्रता है? क्या समाज के जिम्मेदार लोगों को गैरजिम्मेदार होने और किसी भी तरह की जवाबदेही से दूर रहने की स्वतंत्रता भी है?

विमर्श का यह अंक देश की स्वतंत्रता के साथ साथ सामाजिक स्वतंत्रता की स्थिति केलिए समर्पित है और इसी उद्देश्य से इस अंक को ‘स्वतंत्रता विशेषांक’ बनाया गया है । यह बहुत हर्ष का विषय है कि समाज के लोगों ने इस विशेषांक को यादगार बनाने में सकारात्मकता और  रचनात्मकता के साथ अपना योगदान लेखनी के माध्यम से देने में कोई कसर नही छोड़ी । विमर्श के प्रति पाठकों का लगाव हमें अभिभूत करता है, पाठक जिस अपनेपन और अधिकार से सकारात्मक प्रतिक्रियाएं भेजते हैं उससे हमारा उत्साह सौगुना हो जाता है । इसी का परिणाम है कि हम हर बार बेहतरीन होने का प्रयत्न करते हैं । इस बार भी पाठकों के अनुरोध पर कुछ नए सामाजिक स्तम्भों का शुभारंभ स्वतंत्रता दिवस अंक से हो रहा है ।

‘पाठक पन्ना’ स्तम्भ वेबसाइट पर पाठकों द्वारा विभिन्न लेखों पर व्यक्त की गई प्रतिक्रियाओं को स्थान देने हेतु है । हर बार पिछले अंकों में प्राप्त फीडबैक को प्रमुखता से वेबसाइट पर स्थान दिया जाएगा तथा पीडीएफ मैगज़ीन में भी प्रमुखता से स्थान देंगे ताकि पाठकों की भागीदारी सुनिश्चित हो सके । ‘समाज पूछता है’ स्तम्भ में समाज के नागरिकों द्वारा पूंछे जाने वाले सवाल और उनके समाधान विमर्श के माध्यम से देने का प्रयास है । यह स्तम्भ भी सामाजिक मुद्दों पर सामाजिक भागीदारी सुनिश्चित करने के उद्देश्य से है । ‘सामाजिक चौपाल’ स्तम्भ विभिन्न सोशल साइट और व्हाट्सएप्प पटलों पर विमर्श द्वारा किसी एक विषय पर की जा रही चर्चा में भेजे गए विचारों को समाज मे प्रमुखता से उठाने केलिए है । ‘खेल खेल में’ स्तम्भ का आरम्भ कर रहे हैं जिसमे विभिन्न खेलों, स्पोर्ट्स की जानकारी दी जाएगी । इसके अलावा महिला पाठकों को ध्यान में रखते हुए ‘उदर-भक्ति’ स्तम्भ आरम्भ हो रहा है जिसमे विविध व्यंजनों को बनाने खाने का मौका होगा ।

विमर्श अपने सामाजिक उद्देश्यों के अनुसार काम कर रहा है । समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए हम विभिन्न सामाजिक योजनाओं में सहभागी बन कर समाज को बेहतर बनाने हेतु प्रयत्नशील हैं और इसी क्रम में ‘समाज-मित्र’ पोर्टल की योजना को मूर्तरूप देने पर कार्य चल रहा है और 15 अगस्त से ‘शिक्षा-सारथी’ विभाग आरम्भ हो रहा है । जिसकी जानकारी आपको देते रहेंगे । उम्मीद है आप विमर्श के अपना स्नेह, सहयोग और रचनात्मकता का आशीर्वाद देते रहेंगे । जय राजेश्वर जी!

हैहयवंशीय प्रदीप वर्मा

हमारा राष्‍ट्र-गान

भारत का राष्‍ट्र गान अनेक अवसरों पर बजाया या गाया जाता है। राष्‍ट्र गान के सही संस्‍करण के बारे में समय समय पर अनुदेश जारी किए गए हैं, इनमें वे अवसर जिन पर इसे बजाया या गाया जाना चाहिए और इन अवसरों पर उचित गौरव का पालन करने के लिए राष्‍ट्र गान को सम्‍मान देने की आवश्‍यकता के बारे में बताया जाता है।

स्‍वर्गीय कवि रविन्‍द्र नाथ टैगोर द्वारा “जन गण मन” के नाम से प्रख्‍यात शब्‍दों और संगीत की रचना भारत का राष्‍ट्र गान है।

जन-गण-मन अधिनायक जय हे
भारत भाग्‍य विधाता ।
पंजाब-सिंधु-गुजरात-मराठा
द्राविड़-उत्‍कल-बंग
विंध्य हिमाचल यमुना गंगा
उच्‍छल जलधि तरंग
तव शुभ नामे जागे, तव शुभ आशिष मांगे
गाहे तव जय-गाथा ।
जन-गण-मंगलदायक जय हे भारत भाग्‍य विधाता ।
जय हे, जय हे, जय हे, जय जय जय जय हे ।

प्रदीप वर्मा (हैहयवंशीय)
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8 thoughts on “संपादकीय: स्वतंत्रता विशेषांक

  1. जय राज राजेश्वर
    विमर्श ने समाज में एक ऐसी फलकी है जिससे समाज के अधिक से अधिक लोग जुड़ रहे है, में आआपकि इस पहल की सराहना करता हु। आगे में अपने सुझाव भी आपको दूंगा ओर आपसे भी सहयोग प्राप्त करूँगा।

    आभार

  2. पत्रिका का नया रूप और स्तंभ अच्छे हो रहे है, शुभकामनाए सुर धन्यवाद
    यह एक युवा का सोच और अथक प्रयास है, जो निरंतरता के साथ समाज को जागृति करने का कार्य कर रहा है। समाज के युवा वर्ग के प्रेरणा और हमारी पूर्ण सहयोग और सफलता के नित बाते आयाम बने।

  3. विचारों का महाकुंभ है ‘विमर्श ‘
    चिन्तन का एक मृदंग है ‘विमर्श ‘

    अन्तहीन, उद्यम, साहस, जिजीविषा
    शुभ्र लक्ष्य साधक, उत्तरंग है ‘विमर्श ‘

  4. स्वतंत्रता विशेषांक के संपादकीय लेख में सम्पादक महोदय ने स्पष्ठ किया गया है कि देश की स्वतंत्रता के साथ साथ सामाजिक स्वतंत्रता के महत्त्व को ध्यान रख ‘स्वतंत्रता विशेषांक’ बनाया गया है । 

    विमर्श पत्रिका के माध्यम से समाज से सम्बन्धित विभिन्न विषयों पर अपने विचारों को व्यक्त किया है। स्वतन्त्रता दिवस विशेषांक पर निम्न विषयों (१) समाज मे स्वतंत्रता की स्थिति (२) स्त्री स्वातंत्र्य: एक वास्तविकता (३) स्त्री स्वतंत्रता: गहरे हैं प्रश्न, . ।‌ पर लेख हम सबको प्रभावित कर गये।

    इन लेख में यह जानकारी दी गई है कि समाज के विचारों मैं परिवर्तन लाने में स्त्री शिक्षा का बहुत बड़ा योगदान है। शिक्षित नारी के प्रभाव से पूरा घर परिवार एवं आगे आने वाली पीढ़ी को उन्नति मिलती है और समाज को नई दिशा मिलती है।

    सभी लेखकों ने सुरुचिपूर्ण ढंग से इन विषयों पर अपने विचारों को लेख के माध्यम से प्रस्तुत किया है। उनके प्रयास सराहनीय है।

    सभी लेखकों, सम्पादक तथा पत्रिका के सभी सहयोगियों को हृदय से धन्यवाद देता हूं। सभी लेखक बधाई के पात्र हैं।

    आगामी पत्रिका में आने वाले विविध व्यंजनों को बनाने के “उदर-भक्ति” स्तम्भ की जानकारी मिलने के बाद, इस स्तम्भ को पढ़ने और पढ़ कर विविध व्यंजनों को बनाने व खाने की कल्पना करके हम पाठक उत्साहित एवं रोमांचित हैं।

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