समाज सेवा, साहित्य एवं काव्य जगत के साश्वत हस्ताक्षर : श्री लक्ष्मीनारायण “उपेन्द्र”

व्यक्ति विशेष होली

जन्म एवं पारिवारिक परिचय 

मध्यप्रदेश के सागर जिले की सबसे प्राचीन, कृषि एवं कृषि यंत्रों की उत्पादक तहसील के रूप में पहचान रखने वाली तहसील खुरई में 17 अक्तूबर 1952 को दीपावली की पूर्वसंध्या को, स्थानीय हैहयवंशीय क्षत्रिय परिवार में श्री गौरिशंकर जी हयारण की धर्मपत्नी श्रीमती श्याम बाई ने एक तेजस्वी और रूपवान बालक को जन्म दिया । इस बालक का नामकरण लक्ष्मीनारायण के रूप में हुआ । 3 भाई-बहिनों में ज्येष्ठ श्री लक्ष्मीनारायण जी की बहिन श्रीमती कुसुमदेवी (गृहिणी) (आष्टा) और अनुज श्री धर्मेंद्र हयारण (एडवोकेट) भोपाल हैं । आपका विवाह छत्तीसगढ़ के दुर्ग निवासी श्री चन्द्रभान जी वर्मा की ज्येष्ठ पुत्री नंदा वर्मा के साथ वर्ष 1982 में संपन्न हुआ । अपने 1 पुत्र और 4 पुत्रियों और भाई के साथ आप भोपाल में सुखमय जीवन व्यतीत करते हुए पारिवारिक दायित्वों का निर्वहन कर रहे हैं ।

शैक्षणिक परिचय 

आपकी प्राथमिक, हायर सेकेंडरी एवं बी कॉम (स्नातक) की शिक्षा खुरई में हुई । सागर के डॉक्टर सर हरिसिंह गौर विश्वविध्यालय से एम ए (हिन्दी साहित्य) से करने के बाद आपने भोपाल विश्वविध्यालय से एल एल बी की शिक्षा पूर्ण की । अपने धर्मपरायण एवं सेवी भावी माता से पाये हुए संस्कारों का अनुशरण करते हुए आपका व्यक्तित्व भी धर्म और समाज सेवा से प्रभावित है । 

काव्य परिचय 

– बाल्यकाल से ही आपकी रूचि काव्य सृजन में रही । कक्षा 6 वीं से ही आपने कविता लेखन का कार्य शुरू कर दिया था । आगे जाकर आपने स्थानीय कवियों और साहित्यकारों को साथ लेकर खुरई नगर में प्रतिभा संगम के नाम से एक साहित्यक संस्था का गठन किया । नई कविता और व्यंग्य के कवि के रूप में मध्यप्रदेश सहित विभिन्न सामाजिक, प्रान्तीय और राष्ट्रीय कवि सम्मेलनों में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई । खुरई नगरी के साहित्य और काव्य क्षेत्र से जुड़ी प्रतिभाओं ने आपको ” उपेन्द्र ” नाम दिया । सहारनपुर  से आपको साहित्यालंकार की उपाधि मिली । 

प्रकाशित काव्य-साहित्य एवं सामाजिक संग्रह 

समाज सेवी, कवि एवं साहित्यकार के रूप में आपने विभिन्न पुस्तकों का प्रकाशन भी कराया । आपके कुशल संपादन में विभिन्न पुस्तकों का प्रकाशन हुआ जिनमें प्रमुख इस प्रकार हैं । 

1 : पुष्पांजलि 

2: फागुनी 

3 : काव्यगिरि 

4: ऊटपटांग की डायरी 

5: भावों की कलियाँ  

6: दास्ताने जिन्दगी 

7 : अनुभूति दर्द की 

8 : झील सा मन 

9 : काव्य कीर्ति 

10 : प्रतिभा प्रसून  

11 :  साहित्य के नवरत्न 

12 : गीता गौरव 

13 : भावों की कलियाँ 

14: शिरीष रामायण 

15: उठो और जागो 

16 : हरीश स्मृति 

17 : नायक स्मृति 

18 :  विनम्र स्मृति 

 

सृजित साहित्य 

आपके द्वारा लिखित और प्रकाशित पुस्तकें इस प्रकार हैं 

1 : वीर वैभव (खण्डकाव्य) 

2 : सत्य और संस्कार (राजराजेश्वर भगवान सहस्रार्जुन और हैहयवंशीय क्षत्रिय समाज के प्रमाणिक इतिहास की संक्षिप्त विवेचना) 

3 : छूमन्तर (मुक्त्तक संग्रह) 

4 : पर्यावरण पर्याय आदि 

 

आकाशवाणी सागर से आपकी कहानियों का यथासमय प्रसारण होता रहता है । आप एक कुशल संपादक हैं, जिसके चलते आपने वर्षों विभिन्न समाचार पत्रों सहित  सामाजिक पत्रिकाओं के संपादक  और सह-संपादक के रूप में अमिट छाप छोड़ी है । 

1: नवज्योति (1968 से 1991) 

आप भोपाल से 1968 से  प्रकाशित मासिक सामाजिक पत्रिका से जुड़े रहे । 1974 में आपको नवज्योति का सह-संपादक बनाया गया । 1975 से 1991 तक आपने पत्रिका का संपादक रहते हुए इसे मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, बिहार, उत्तरप्रदेश एवं हरियाणा सहित,  विभिन्न राज्यों से जोड़कर प्रसार संख्या 1000 तक पहुंचाई । सामाजिक अरूचि और सहयोग के अभाव में कतिपय कारणों से 1991 में नवज्योति का प्रकाशन बन्द हो गया । 

2 : भोपाल से प्रकाशित एक दैनिक पत्र के स्थानीय संपादक, साप्ताहिक अपराध समाचार पत्र टाईम्स ऑफ़ क्राइम के सह-संपादक के साथ कानूनी सलाहकार भी रहे । सीहोर के मासिक पत्र ग्रामीण चिट्ठी के सह-संपादक के साथ साथ ” अल्प समय तक ” दैनिक देशबंधु ” समाचार पत्र के संपादकीय कार्यालय में कार्यरत रहे । आपको पत्रकारिता के लिये पुरुष्कार भी मिला है । 

 

रचनाकार : 

अपने हैहयवंशीय क्षत्रिय समाज के ध्वजगीत ” फहर फहर फहरे ” के रचनाकार हैं । यह गीत आपने वर्ष 1970 के दशक में कटनी में आयोजित अखिल भारतीय हैहयवंशीय क्षत्रिय सम्मेलन के समय हैहयवंशीय क्षत्रिय समाज को समर्पित किया था । 

 

सामाजिक सम्मान 

– जबलपुर में आयोजित सम्मेलन में आपको ” समाज रत्न ” के सम्मान से सम्मानित किया गया । 

साहित्य एवं काव्य पुरुष्कार

साहित्य और काव्य सृजन के लिये आपको विविध पुरुष्कार मिले जिनमें प्रमुख गांधी शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में आपको गांधी काव्य प्रतियोगिता मध्यप्रदेश के लिये पुरुष्कारित किया गया । 27 जनवरी 1982 में मध्यप्रदेश सरकार के तात्कालीन वित्तमंत्री श्री मुनि प्रसाद शुक्ल द्वारा रविन्द्र भवन भोपाल में अखिल भारतीय साहित्य मंथन प्रतियोगिता में प्रथम आने पर आपको साहित्य के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिये मयूर अवार्ड्स से सम्मानित किया । 

 

मध्यप्रदेश के मुख्यमन्त्री श्री शिवराज सिंह जी चौहान द्वारा पिछड़ा वर्ग सम्मेलन में सम्मानित  किया गया । पूर्व मुख्यमंत्री श्री बाबुलाल जी गौर द्वारा आपके संपादन में पण्डित मिश्र जी रचित पुस्तक ” रामायण ” का विमोचन किया गया । 

 

सामाजिक एवं सांगठनिक परिचय 

– स्थानीय ताम्रकार समाज के संगठनों से जुड़कर सामाजिक सेवा कार्यों में उल्लेखनीय योगदान दिया । आपने मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल के स्थानीय संगठन में भी विभिन्न पदों पर दायित्वों का कुशलता से निर्वहन किया । युवावस्था में ही आपने 1968 में गठित मध्यप्रदेश हैहयवंशीय क्षत्रिय युवक संगठन में महामंत्री का कार्यभार संभाला । आपके कार्यकाल में ही भोपाल में संगठन ने प्रान्तीय अधिवेशन का सफलतम आयोजन किया । हैहयवंशीय क्षत्रिय ताम्रकार संगठन मध्यप्रदेश के द्वितीय अध्यक्ष श्री दिनेश जी पैगवार की कार्यकारिणी में पद पर रहते हुए आपने खुरई में संगठन की प्रान्तीय बैठक एवं तृतीय कार्यकारिणी के चुनाव संपन्न करवाये । आपको इस कार्यकारिणी में प्रान्तीय उपाध्यक्ष के पद पर मनोनीत किया गया । आप अखिल भारतीय वैश्य महासभा भोपाल एवं दिल्ली के आजीवन सदस्य हैं । वर्तमान में आप अखंड हैहयवंशीय क्षत्रिय विकास समिति में राष्ट्रीय उपाध्यक्ष (मध्यप्रदेश) हैं । साथ ही प्रदेश कार्यकारिणी के गठन होने तक प्रान्तीय अध्यक्ष के दायित्व के साथ साथ एक समाज सेवी, साहित्यकार सहित एडवोकेट के रूप में परिवार के सभी दायित्वों का निर्वहन कर रहे हैं । 

 

अंततः 

साहित्यक पुस्तिका नवरत्न की भूमिका में राजीवलोचनाचार्य महाविध्यालय खुरई के तात्कालीन प्राचार्य डॉ राजेन्द्र चौबे ने आपके लिये बहुत ही खुबसूरत शब्दों का चयन किया है 

” उपेन्द्र जी के जैसे रत्न, ढूंढने से भी नहीं मिलते । यह तो एसे रत्न है जो रत्नों को भी पहचान देते हैं ” 

” उपेन्द्र जी ” जैसे विरले व्यक्तिव, जो सदैव दूसरे के लिये जीते हैं, इन कवि रत्नों की जितनी भी प्रशंसा की जाये न्यूनतम होगी । ये सरस्वती के पुत्र साहित्य जगत एवं समाज के लिये वरदान हैं । 

 

शब्दांश : 

हैहयवंशीय चन्द्रकांत ताम्रकार 

सेवक, चिंतक एवं विचारक 

संपर्क : 8319385628

प्रदीप वर्मा (हैहयवंशीय)