(अविवाहित यूवओ की बढ़ती      उम्र व संख्या आप और हम  मौन-जिम्मेदार कौन)

समाज का विकास चाहिये तो हमे अपना सामाजिक नज़रिया बदलना होगा 

किसी भी समस्या को हम सभी एक मंच पर आकर विचार विमर्श कितना भी कर ले परन्तु ये तब तक सुधार के  परिणाम नही दिखेंएगे जब तक हम  उन  सभी विचारों और समस्याओं की उपज के निस्तारण स्वरूप प्रभावी रणनीति को अपने और समाज अमल में नही ले आते । 

नए वर्ष के उदीयमान होते ही गत 10 जनवरी को हुए विमर्श परिवार के द्वारा  ऑनलाइन वार्ता सम्मेलन जिसका मुख्य विषय रहा-: समाज मे बढ़ती अविवाहित यूआओ की जनसंख्या जिम्मेदार कौन हम आप मौन? जिसमे देश के विभिन्न राज्यो से विभिन्न छेत्रो जैसे अध्यापक, अधिवक्ता, प्रोफेसर, समाजशास्त्री, ज्योतिष ज्ञाता व अन्य सामाजिक चिंतक ,विचारक  अतुल्य  प्रतिभा  के धनी गणमान्य जन एकत्र हुए जो कि सभी अपने आप मे एक सफल मार्गदर्शन की क्षमता थी | इन सबसे से ऊपर एक चीज दिखी तो वो थी चर्चा में नारी शक्ति का बढ़ चढ़ के हिस्सा लेना जो कि समाज के कल्याण का सफल होना सुनिश्चित करती है। नमन है आप सभी शामिल हुई नारी शक्तियों को,  एक लंबी सकारात्मक एवम सफल परिचर्चा हुई ।

समाज की इस ज्वलंत मुद्दे पर कुछ कहे कुछ अनकहे, कुछ अनछुये मुद्दों पर प्रकाश डाला व समस्याओं पर विस्तार से चर्चा हुई । इस क्रम में अविवाहितों की बढ़ती संख्या जैसी गंभीर  समस्या संबंधित 10  मुख्य बिंदु रहे जो की समस्या का केंद्रबिंदु बने रहे:

  • नौकरीपेशा लड़को को पहली प्राथमिकता देना!
  • परिवार नियोजन एवम पूर्व में हुई भ्रूण हत्याएँ!
  • एकल परिवारों की वरीयता
  • युवा लड़के लड़कियों का अधिक महत्वाकांक्षी स्वभाव!
  • संस्कारों  में कमी!
  • संबंधों में मध्यस्थों की उदासीनता!
  • सामाजिक तालमेल में उदासीनता व अधिक दिखावे पर जोर! 
  • मेट्रोपोलिटन शहर और बहुराष्ट्रीय कंपनी वाले रिश्तों की प्राथमिकता!
  • पिछड़ता रोजगार और पारंपरिक रोजगारो में लगे रहना!
  • नशाखोरी, नैतिकपतन और सामाजिक सहयोग में उदासीनता!

अब बात आती है क्या इस प्रकार की चर्चा होने या होते रहने से हमारे समाज को नई दिशा मिल सकती है? क्या हमारा समाज आज के इस उन्नत सोच को अपनाने को राजी हो जाएगा तो शायद मेरे ख्याल से :-नही!

क्योंकि ये सारी समस्याएं हम सभी जान रहे है और समझ रहे हैं पर क्या कभी सुधार किया ? 

तो अब जो सबसे जरूरी काम है वह है हमे अपने और हमारे सभी स्वजतीय बंधुओं को समाज के प्रति उजागर इन समस्याओं को ध्यान में रखते हुए जन चेतना जागृत करनी होगी । लोगो मे समाज के प्रति सहयोग की भावना विकसित कर समाज को एक नए दिशा हेतु वचनबद्ध होकर एक नए आयाम स्थापित करने की आवश्यकता है। सब से जरूरी काम निम्म प्रकार है:

  • हमे तत्काल स्वजातीय भेदभाव मिटाना होगा। 
  • प्रत्येक हैहयवंशियों का यह धर्म हो जाना चाहिए कि वह अपनी स्वजतीय जरूरतमंद लोगो को अपनी छमता अनुसार मदत करे!
  • समाज के किसी भी छेत्र में विशेष समझ व योग्यता रखने वाले बुद्धिजीवी वर्ग समाज की उपेछा करना छोड़ अपने जैसे जरूरमंद यूवाओ का मार्गदर्शन करें।
  • सिर्फ सरकारी पेशा या मेट्रोपोलिटन परिवार की ख़्वाहिश को कम कर के यह देखने का प्रयास करे कि अगर आपके लायक रिश्ता है तो सिर्फ़ नाम के पीछे मत भागे ।
  • अपने बच्चों को एकांकी परिवार के स्थान पर संयुक्त परिवारों की अच्छाइयों को समझाए और परिवार में कैसे ताल मेल बैठाया जाए इन सब पर जोर दे । 
  • बुजुर्गों के अनुभवों और उनके विचारों का सम्मान कर उनके  समाज मे प्रतिष्ठा का स्थान दे। क्यों कि जब बुजुर्गों के साथ संबंध अच्छे रहेंगे तो नए संबंधों को जोड़ने में उनकी महती भूमिका पुनः स्थापित होगी।
  • अगर आपको।लगता है कि आप अपना पुराना कारोबार छोड़ कर नया कारोबार में तरक्की कर सकते है तो जरूर अपनाए।
  • शादियों में अधिक खर्च की मांग व सामाजिक दिखावे के पीछे न भागे, सछम होते हुए कम से कम  खर्च में शादी करने की परंपरा विकसित कर गरीबो के कल्याण में सहयोग करे ।
  • सामूहिक विवाहसम्मेलनो का प्रतिवर्ष आयोजन एवम अर्द्ध वार्षिक परिचय सम्मेलनों का आयोजन होते रहना चाहिए! 
  • ऑनलाइन परिचय सम्मेलन विचार विमर्श आयोजनों का समसामयिक तौर पर होने की उन्नत पहल!

जैसे  ऐसे कई और कारण है जिन पर हम सुधार की पहल कर के जन चेतना को जाग्रत कर समाज को एक नई दिशा दे सकते हैं। जय राजराजेस्वर

गौरव सिंह हैहयवंशी
Latest posts by गौरव सिंह हैहयवंशी (see all)