स्मृति शेष: परमपूज्य श्री प्रेमशंकर ताम्रकार “घायल”

चुनौतियाँ और अवसर व्यक्ति विशेष

स्मृति शेष: समाज-रत्न परमपूज्य श्री प्रेमशंकर ताम्रकार  “घायल”

स्मृति शेष परमपूज्य श्री प्रेमशंकर ताम्रकार  “घायल” के श्री चरणों में सादर नमन करते हुए उनके कृतित्व व व्यक्तित्व का परिचय देते हुए मै उन्हें सादर श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं | आपने अपने व्यवसाय वृत्ति के रूप में कृषि विभाग में ए डी ओ पद पर अपनी सेवाएं कर्मठता से प्रदान करते हुए अनेक रचनात्मक आयाम प्रस्तुत किए।परिणाम स्वरूप विभाग में कार्यरात रहते हुए आप निरंतर ख्याति मान रहे।

साहित्यिक छवि

कृषि विभाग अधिकारी संघ द्वारा प्रकाशित पत्रिका “कृषि सुमन” के प्रधान संपादक रहते हुए अपनी साहित्यिक छवि से सभी को कायल करते हुए आप 1988 में सेवानिवृत्त हुए । विभाग आपकी सेवाओं को आज भी याद करता है। आपने अपनी विलक्षण प्रतिभा से ताम्रकार समाज के अभिनव निर्माण को रचनात्मक दृष्टि एवं दिशा प्रदान की जिसके लिए समाज आपका चिर ऋणी रहेगा।

समाज – रत्न

आपने मध्य प्रदेश हैहयवंशी क्षत्रिय संघ भोपाल द्वारा प्रकाशित पत्रिका  “नव ज्योति” के प्रधान संपादक के साथ ही आगरा के मास्टर बद्री प्रसाद वर्मा “सनक” द्वारा प्रकाशित पत्रिका “हैहयवंशी प्रहरी” के उपसंपादक के रूप में असाधारण योगदान दिया जिसके लिए समाज द्वारा आपको “समाज – रत्न” की उपाधि से अलंकृत किया गया। एक अच्छे व्यंग्यकार के साथ साथ बुन्देली भाषा में रची पग ,छंदों कविताओं के रचनाकर्ता के साथ साथ एक श्रेष्ठ पेंटर एव कार्टूनिस्ट के रूप में निरंतर ख्याति मान रहे साहित्यिक कर्तव्य एवं दमोह गौरव समाचार पत्रों के साथ अनेक पत्र पत्रिकाओं में आपके कार्टून एवं रचनाएं निरंतर प्रकाशित होती रही हैं

अपने जीवन के अंतिम अध्याय में उन्होंने  देशी दवाओं का प्रचार प्रसार भी किया तथा निरंतर सेवा में रत रहे। यद्यपि वे अब हमारे बीच नहीं हैं मगर उनके द्वारा प्रशस्त मार्ग हमें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करता रहेगा। श्री चरणों की वंदना के साथ मै अपनी वाणी को विराम देता हूं |

हैहयवंशी चंद्रकांत ताम्रकार 

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