हर एक व्यक्ति का योगदान है जरूरी

दयाशीलता विशेषांक संवाद

हर एक व्यक्ति का योगदान है जरूरी

दुनिया के बड़ेबड़े नेता, उद्योगपति, धनाढ्य लोग अपने कर्तव्यों के प्रति जिम्मेदारी पूरी निष्ठा से निभाते हैं । एलन मस्क जो लोगों को अंतरिक्ष की सैर करवाने हेतु अपनी स्पेसएक्स कंपनी का अंतरिक्ष यान बना रहे हैं, ज्योफ बेजोस ने रिटेल व्यापार करने के तरीके बदल दिए और दुनिया भर में होम डिलीवरी के लिए ड्रोन का उपयोग कर रहे हैं, सुंदर पिचाई गूगल को हमारीं जिंदगी के हर हिस्से से जोड़ रहे हैं और सत्य नडेला कंप्यूटर को ज्यादा आसान और उपयोगी बना रहे हैं, मुकेश अम्बानी इंटरनेट को हर अमीर गरीब के मोबाइल में पहुंचा रहे हैं ताकि हर व्यक्ति समय के साथ चलने की कोशिश कर सके ।

ऐसे दुनिया मे लाखों उदाहरण हैं जो हमे एक ही बात समझाते हैं कि दुनिया मे ऐसे लोगों भी हैं जो अपने अपने स्तर पर अपने अपने कार्यक्षेत्र में ऐसे कार्यों में लगे हैं जिससे दुनिया के साधारण लोगों का जीवन ज्यादा आसान हो और हर व्यक्ति को अपनी क्षमताओं के अनुरूप अवसर उपलब्ध हो सकें । दुनिया इसीलिए चल रही है कि दुनिया को चलने में अच्छे लोग अपना योगदान दे रहे हैं । हर व्यक्ति अपने अपने स्तर पर अपना श्रेष्ठ देने का प्रयास करता है इसीलिए यह दुनिया इतने खतरों का सामना कर के भी दृढ़ता से खड़ी है । कॉलेप्स नही हुई ।

 

समाज भी ऐसे ही चलता है

समाज के लोग सामाजिक कार्यों में यथासंभव, यथाशक्ति सहयोग करते हैं, जनजन के सहयोग से समाज मे छोटे बड़े कार्यक्रम सम्पन्न होते है । समाज जनभागीदारी से चलते रहे हैं, सदियों से, और आगे भी इसी तरह समाज चलते रहेंगे । कुछ लोगों को समाज का नेतृत्व करना होता है, लोगों को प्रेरित करना होता है । समाज के जनसामान्य की भावना होती है कि सामाजिक कार्य सम्पन्न होते रहें, वे इस हेतु सहयोग करने हेतु तत्पर रहते हैं । 

समाज के प्रमुख लोग आगे आते हैं जिम्मेदारी उठाते हैं और सामाजिक कार्यों को सम्पन्न करते हैं । समाज जनभागीदारी से अच्छे उदाहरण प्रस्तुत करते हैं और कभी कभी बुरे उदाहरण भी सामने आ जाते हैं लेकिन समाज की सुंदरता इसी में होती है कि वह अच्छाई बुराई सब को आत्मसात कर लेता है ।

 

कठिन समय मे जरूरतमंदों का सहारा है समाज

किसी समाज की उपयोगिता ही क्या अगर उस समाज के सदस्य किसी बुरी घड़ी में आवश्यकता पड़ने पर खुद को अकेला और असहाय समझे?

भारत के कई समाज हैं जो अपनी सामाजिक जिम्मेदारियों के उच्चतम मापदंड स्थापित कर चुके हैं, उन समाजों के सदस्यों के सामने संकट आने पर समाज हर तरह की सहायता उपलब्ध करवाने हेतु तत्पर और उपलब्ध होते हैं । आर्थिक, सामाजिक, मनोवैज्ञानिक सभी तरह की सहायता वे अपने साथी परिवारों को उपलब्ध करवाते हैं ।

शिक्षा, व्यापार, रोजगार, दवाइयां, इत्यादि सभी तरह की सुविधाएं हमेशा उपलब्ध रखना इन समाजों की अपने स्वजातीय परिवारों के प्रति जिम्मेदारी और संवेदनाओं को दर्शाता है ।

हमारे समाज में कुछ जगहों से सकारात्मक खबरें कोरोना कालखंड में आई, जैसे चीचली समाज और राजस्थान के भीलवाड़ा समाज द्वारा स्वास्थ्य संसाधनों की व्यवस्था की गई । ऐसी खबरें संतोष देती हैं लेकिन सोचने वाली बात यह है कि हमारे समाज मे कहीं भी ऐसी कोई स्थायी व्यवस्था नहीं है जिसके माध्यम से समाज के जरूरतमंद सदस्यों को शिक्षा, स्वास्थ्य और व्यवसाय केलिये सहायता आसानी से उपलब्ध करवाई जा सके ।

 

सब मिल कर सोचें तो संभव है

समाज मे लगभग हर शहर में सामाजिक संस्थाएं हैं, अगर सभी संस्थाएं अपने अपने शहर में समाज के परिवारों को साथ लें, चर्चा करें और एक स्थायी व्यवस्था बनाने का प्रयास करें तो संभव है कि हमारे समाज में भी यह व्यवस्था स्थापित हो सके । यहाँ यह भी देखना होगा कि अगर हर प्रदेश में उस प्रदेश की सभी शहरों की संस्थाएं अगर आपसी समन्वय कर के प्रादेशिक समन्वय स्थापित कर सकें तो यह कार्य और ज्यादा आसान और प्रभावी हो सकता है ।

यहां यह ध्यान रखने की भी जरूरत है कि ढेर सारी नई नई संस्थाएं न बनाई जाए बल्कि हर शहर में एक संस्था हो जिसमें सभी समाजजन समानरूप से सहभागी हों तभी एक सर्वहितकारी समाज को मजबूत किया जा सकेगा ।




प्रदीप वर्मा (हैहयवंशीय)
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