कावापूत की बुद्धिमानी

(कश्मीर पर आधारित यह कहानी डा० शिवन कृष्ण रैना की मूल रचना है) जिसे राष्ट्धर्म पत्रिका, लखनऊ में प्रकाशित है|) ठेस लगे, बुद्धि बढ़े – अर्थ – हानि मनुष्य को बुद्धिमान बनाती है। एक दिन एक कौवा और उसका पोता सडक के किनारे दाना चुग रहे थे|इतने में वंहा से एक मनुष्य गुजरा| मनुष्य को […]

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रीता मेडम के स्वादिष्ट व्यंजन

विशेष: हमारा प्रयास पुरातन भारतीय व्यंजन (विशेष कर ग्रामीण परिवेश) को आधार बनाते हुए, सभी डिश व्यंजनों को आप के मध्य लाने का है, आप इस भारतीय व्यंजन को अवश्य अपने किचन में स्थान देते हुए इसके स्वाद का रसपान करें, और अपना कमेंट्स जरूर करें| पौष्टिकता: इस  हरे चने से बने डिश  को वैसे […]

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हे संगीत परी तुम्हें प्रणाम

(सुश्री आस्था सक्सेना के जन्म दिवस पर) सागर की लहरों से उत्पन्न संगीत राग बंधो कीअमृतमयी सुर सीपियां, लहरियांहिरणों से इठलाते स्वर निर्बंध, मुक्त कभी मीरा, कभी कबीर, कभी सूर, तुलसी, श्याम, राधा को समर्पित भक्ति सुमन, मनौती कभी ज्वार सी उमड़ती, लौटती अविराम भव्य स्वर मुद्राएं ,विराट सौंदर्य की उपासना में भावों पर नृत्य […]

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फगुनहटा होली

फगुनहटा होली जब फगुनहटा कुछ तेज चले, समझो होली तब आई है।जब घर घर गुझिया,पापड़ बने, समझो होली तब आई है। जब पिचकारी की हाट सजे,जब रंगबालो की शाॅप सजे ,जब मेवा, मावा साथ बिके,समझो होली तब आई है। जब फगुनहटा कुछ तेज चले,समझो होली तब आई है ।। जब गली गली मे आग जले,फागुन […]

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समाज सेवा, साहित्य एवं काव्य जगत के साश्वत हस्ताक्षर : श्री लक्ष्मीनारायण “उपेन्द्र”

जन्म एवं पारिवारिक परिचय  मध्यप्रदेश के सागर जिले की सबसे प्राचीन, कृषि एवं कृषि यंत्रों की उत्पादक तहसील के रूप में पहचान रखने वाली तहसील खुरई में 17 अक्तूबर 1952 को दीपावली की पूर्वसंध्या को, स्थानीय हैहयवंशीय क्षत्रिय परिवार में श्री गौरिशंकर जी हयारण की धर्मपत्नी श्रीमती श्याम बाई ने एक तेजस्वी और रूपवान बालक […]

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वाराणसी के समाचार

गंगू शिवला में गंगेश्रर महादेव का वाषिक श्रृंगार एवं भव्य रुद्राभिषेक प्रसाद वितरण 11/3/2021दिन बृहस्पतिवार को गंगू शिवला में गंगेश्रर महादेव का वाषिक श्रृंगार एवं भव्य रुद्राभिषेक प्रसाद वितरण समान्न हुआ जिसमे मुख्य रूप से केन्द्रीय संचालन समिति दिल्ली के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं वाराणासी कसेरा महासभा के सभापति रामनरायन कसेरा उपसभापति सत्यनारायण जी केन्द्रीय संचालन […]

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केप्टिन श्रीकिशोर करैया

हैहवंशी क्षत्रीय ताम्रकार (कसेरा ) समाज के गौरव विलक्ष्ण प्रतिभा के धनी, केप्टिन श्री किशोर करैया ,होशंगाबाद निष्ठावान कर्तव्यनिष्ठ अग्रणी समाज सेवी केप्टिन श्रीकिशोर करैया आत्मज स्वर्गीय श्री गोवर्धनजी (बाबुलालजी करैया )आप हैहयवंशी क्षत्रीय ताम्रकार (कसेरा ) समाज के प्रदेश सचिव जैसे महत्व पूर्ण पद का भार कुशलता पूर्वक संभाल रहे है । समाज को […]

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मौनी रेखाएं

जहान की जरूरत जरूरत है इस जहान को ऐसे इंसानों की कि मिश्री घुली जुबां बोलना आदत हो जिनकी जरूरत है इस जहान को ऐसे इंसानों की कि आसपास खुशी से खिले चेहरे देखना जरूरत हो जिनकी जरूरत है इस जहान को ऐसे इंसानों की कि ख्वाहिश हो जिनकी कामयाबी दूसरों की ख्वाहिश की जरूरत […]

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समाज के प्रति नकारात्मक मानसिकता एवं सामाजिक अलगाव

प्राय देखा जाता है कि समाज में कुछ लोग की नकारात्मक सोच, पृवृति होकर, यह कहते पाये जाते हैं कि समाज ने हमारे लिए क्या किया है जो हम समाज को समय दे, या समाज को सहयोग करे. ऐसे लोग प़ाय समाज में रिश्ते सिर्फ अपने स्वार्थ के आधार पर रखते हैं, जहाँ इनका स्वार्थ […]

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बसंत

पावन बसंत मधुरम बसंत,जय जय बसंत। सुखमय बसंत मंगल बसंत जय जय बसंत।। दिन बड़े गर्मी बड़ी मौसमी मधुमास भली सुनहरा पर्व वसंती जीने की आस बड़ी सब कुछ नया लागे, जय जय बसंत। सुखमय बसंत मंगल बसंत जय जय बसंत।। मौसमी देश है भारत स्वर्णिम देश है भारत जन्मे प्रभु यहीं पर सनातनी देश […]

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होली उत्सव प्रीत का

गिरिराज सुधा, कोटा पीतल की पिचकारी में घुले हैं रंग हजार, दुश्मन दोस्त हो गए, है होली का त्यौहार। रंगों में सब धुल गई, आपसी तकरार, सबके दिलों में रहे, प्यार की दरकार। होली उत्सव प्रीत का, खेलें मिलकर फाग, फागुन मन में बो गया, वासंती अनुराग। फागुन में रंग हो गए, पूरे मस्तीखोर, गौरी […]

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फाग फुहारें होली की

गिरिराज सुधा, कोटा हैहयवंशी रंग में, भीगे जूही पलाश, होली की बौछारें पहुँचीं, रंगों के आकाश। दिलों में ले पिचकारियाँ, संकल्पों के रंग, सपनों की अठखेलियाँ, चाहतों के चंग। फागुन का नर्तन हुआ, वसंत के दस्तूर, होली हैहयवंश की, प्रीत लुटी भरपूर। अबीर, गुलाल कुंकुम उड़े, गूँजे पाहुन-गीत, उर में मधुरिम प्यास उठी, तन में […]

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टेसू बिन फागुन न होय

बसंत ऋतु आते ही अनायास लाल – लाल टेसुओं की याद हो आती है। बनन – बागन में टेसुओं का फूलना और अन्य वृक्षों से पत्तों का झड़ना यह प्रकृति प्रदत्त उपहार है।आमों का बौर लगना ,कोयल का कूकना व खेतों में सरसों का लहलहाना एक खुशनुमा माहौल बनाता है।इसलिए तो बसंत को ऋतुराज कहा […]

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कुछ अलग किया

न नशा इश्क़ का कियान नशा दिखावे कानाम हो जिसका वैभवक्या किया अगर कुछ अलग न किया क्या हुआ जो भूल गए क्या खता की जो रूठ गएहम तो गैरों की भी परवाह कर लेते हैं जनाबक्या हुआ जो अपनों को ही बेपरवाह कर गए हो गया हूं वाकिफ कौन क्या है इस जहां मेंलोग […]

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क्या खता हुई जो मुस्कुरा न सके

क्या खता हुई जो मुस्कुरा न सके क्या वजह थी जो गम को छिपा न सके इस जवां दिल में जिंदादिली बनाए रख ऐ साथी ये जहां है जहां आंखो ने आंसुओं को भी पनाह न दी मोहब्बत है दीवानों सी जिसे हम पा न सके हुई खता जो हमसे दोबारा चाह न सके करना […]

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ऐतिहासिक विरासत, सम्पतियों को संरक्षित किया जाना चाहिए

खुरई तहसील जिला सागर के अन्तर्गत ग़ाम गडोला जागिर ग़ाम में हैहय बंशी क्षत्रिय समाज के शक्ति माता स्थल का जीर्णोद्धार कर मंदिर का निर्माण किया जाकर समाज की महत्वपूर्ण विरासत, सम्पत्ति को संरक्षित किया गया. इस शक्ति माता मंदिर को श्री चन्द्र कांत जी तार्मकार एवं उनके सहयोगियों ने समाज के सहयोग से मंदिर […]

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आओ समाज को होली के रंगो से भरे

सम्मानित  स्वजाति बंधुओं इस बार होली पर हम सब मिलकर इस बात पर विचार करे होली हमें इस बात का संदेश देती है कि सभी के जीवन में खुशियों का रंग भरा रहे। संवत्सर होलिका दहन से होता है। जो सभी बुराईयों को पीछे छोड़ जाने का, मन की क्लेश को अग्नि की भेंट चढ़ाने […]

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आए फागुनवा के रीत मोरे ललनी

होली प्रतीक है दानवता पर मानवता, अज्ञानता पर ज्ञान और कटुता पर प्रेम की विजय का। वहीं होली पर गाए जाने वाले फाग गीत लोक जीवन को उत्साह –उमंग देने का एक जीवंत जरिया है। सच में छत्तीसगढ़ी फाग गीतों की अल्हड़ता हंसी ठिठोली और लोक सौंदर्य अभिभूत करने वाला है।

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हिंदी की अभिलाषा

हिंदी की अभिलाषा (राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के सुअवसर पर)   विश्व की प्राचीन भाषा, सरल और समृद्ध भाषा, गर्व है,हूँ मैं हिंदीभाषी, हिंदी है मेरी मातृभाषा। देश की संस्कृति की छवि, संस्कारों का प्रतिबिंब है, विनयपूर्ण शब्दों से सज्जित, यह भाषा शान-ए-हिंद है। मधुरता और सरसता का, वेग है, ये प्रवाह है, मेरे देश की […]

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उच्च शिक्षा के लिये प्रशंसनीय सकारात्मक पहल

समाज की उन्नति एवं सर्वांगीण विकास के लिये, बुनियादी शिक्षा के साथ-साथ, उच्च शिक्षा एवं विषय विशेषज्ञता अतिआवश्यक है । शिक्षा जहाँ समाज की रीढ़ है वहीं, मनुष्य के तीसरे नेत्र के रूप में कार्य करती है । शिक्षा न केवल बुद्धि का परिष्कार करती है, बल्कि व्यक्ति, परिवार, समाज एवं राष्ट्र का सर्वांगीण विकास भी तय करती है । शिक्षा व्यक्ति की सोच को सकारात्मकता प्रदान करती है, जिसके फलस्वरूप उसकी बौद्धिक, तार्किक, व्यापारिक, आर्थिक एवं सामाजिक सहित सर्वांगीण उन्नति के द्वार स्वत: ही खुल जाते है ।

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