डिजिटल विमर्श

लेखक - गौरव सिंह हैहयवंशी

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दुःख और सुख मिल-बाँटकर हलके करें

हम सभी में एक ही आत्मा समाई हुई है। एक धागे में पिरोए हुए मनकों की माला की तरह हम सब परस्पर जुड़े और गूँथे हुए हैं। सुख को अकेले हजम करने वाला अंतरात्मा की धिक्कार का, परमात्मा के कोप का और विश्वात्मा के प्रतिशोध का...

समीक्षा एवं समाधान

(अविवाहित यूवओ की बढ़ती      उम्र व संख्या आप और हम  मौन-जिम्मेदार कौन) समाज का विकास चाहिये तो हमे अपना सामाजिक नज़रिया बदलना होगा  किसी भी समस्या को हम सभी एक मंच पर आकर विचार विमर्श कितना भी...

अनुशासन

अनुशासन शब्द सुनते ही जहन में एक आर्मी या किसी बटालियन जैसीं चीजे याद आती है, क्यों कि इन बातों का मुख्य आधार अनुशासन पर ही है परंतु क्यां हम तभी अनुशासित रहेंगे जब हम एक फौजी की वर्दी पहनेंगे ? हम सब इंसानो को  जानवरो...

हमारा किरदार

जीवन का उद्देश्य क्या है, आज कल की दो वक्त की रोटी के जुगाड़ में ये  गलाकाट प्रतियोगिता और भागमभाग भारी जिंदगी की इस रेस में आगे निकलने  की होड़ में इंसान ने खुद को इतना पीछे छोड़ दिया है कि वह इस धरती पर क्यों है, उसका...

विद्यार्थियों केलिए सुझाव

बहुत से विद्यार्थी अपनी पढ़ाई और परीक्षा को लेकर बहुत ही तनावग्रस्त रहते है , और यह तनाव इतना अधिक हो जाता है कि वो डिप्रेशन का शिकार हो जाते ,तो कुछ अकेले पन से चिड़चिड़े होने लगते है जिनका प्रतिकूल असर सीधा उनके पढ़ाई और...

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