डिजिटल विमर्श

लेखक - डाॅ. प्रकाश पतंगीवार

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हर्बल राज्य का सपना कब होगा साकार

छत्तीसगढ़ को विश्व का पहला “हर्बल राज्य” राज्य घोषित किया गया है। यह एक सकारात्मक पहल है। कल्पना की जा रही है कि हर्बल राज्य आर्थिक दृष्टि से संपन्न तो होगा ही होगा, इसका प्रशासनिक ढांचा भी चुस्त दुरुस्त...

अक्षय तृतीया – लोक जीवन की अभिव्यक्ति

सभ्यता मनुष्य की बाह्य प्रवत्ति मूलक प्रेरणाओं से विकसित हुई है। मनुष्य की अंतर्मुखी प्रवत्तियों से जिस तत्व का निर्माण होता है,यही संस्कृति कहलाती है। संस्कृति लोकजीवन का दर्पण होती है।जीवन में संतुलन बनाए रखना...

टेसू बिन फागुन न होय

बसंत ऋतु आते ही अनायास लाल – लाल टेसुओं की याद हो आती है। बनन – बागन में टेसुओं का फूलना और अन्य वृक्षों से पत्तों का झड़ना यह प्रकृति प्रदत्त उपहार है।आमों का बौर लगना ,कोयल का कूकना व खेतों में सरसों का...

आए फागुनवा के रीत मोरे ललनी

होली प्रतीक है दानवता पर मानवता, अज्ञानता पर ज्ञान और कटुता पर प्रेम की विजय का। वहीं होली पर गाए जाने वाले फाग गीत लोक जीवन को उत्साह –उमंग देने का एक जीवंत जरिया है। सच में छत्तीसगढ़ी फाग गीतों की अल्हड़ता हंसी ठिठोली...

टेसू राग

टेसू बिन फागुन न होय बसंत ऋतु आते ही अनायास लाल – लाल टेसुओं की याद हो आती है। बनन – बागन में टेसुओं का फूलना और अन्य वृक्षों से पत्तों का झड़ना यह प्रकृति प्रदत्त उपहार है।आमों का बौर लगना ,कोयल का कूकना व...

मंड़ई: छत्तीसगढ़ी संस्कृति, लोक-जीवन की अभिव्यक्ति

हरेली,  भोजली,  सवनही,  मातर,  पहुंचानी  और  गांव  बनाई  की  तरह  मंड़ई  का  आयोजन  भी छत्तीसगढ़ की एक सांस्कृतिक परंपरा है । ग्राम्य जन-जीवन परंपराओं के धरातल पर टिका हुआ है। अंचल के किसान को उस दिन की बेसब्री की...

नाचा: नारी पात्रों की भूमिका

नाचा को पहले जमाने में पेखन कहा जाता था। पेखन का अर्थ है – प्रेक्षण । छत्तीसगढ़ में नाचा-गम्मत कहलाता है। ‘मालवा’ में नाचा, राजस्थान का ख्याल, महाराष्ट्र का यह है तमाशा। नाचा का संपूर्ण विकास गम्मत में  ही  देखने ...

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