श्रेष्ठ विकासशील सामाजिक संगठन के लिए आवश्यक तत्व

by | रंग बसंत, संवाद | 0 comments

श्रेष्ठ विकासशील सामाजिक संगठन के लिए आवश्यक तत्व

मानव आदिकाल से ही सामाजिक प्राणी होकर, अपना समाज, समूह बनाकर रेहता है | वह अपनी स्वयं की, परिवार की समस्त गतिविधियां सामाजिक संबंधों के अन्तर्गत करता हुए, अपनी आवश्यकताओं की पुर्ती करता है |समाज में रहकर ही, सामाजिक संबंध के अन्तर्गत, वह अन्य व्यक्तियों से लोकव्यवहार, विवाह संबंध, नाते रिश्ते, धर्म कर्म, आदि क़ियाकलाप करता है | समाज में ही रहकर मानव की सामाजिक, आर्थिक, व्यापार व्यवसाय, शिक्षा, ज्ञान विज्ञान, आदि के लिए उन्नति प्रगती विकास के लिए प्रयत्नशील होता है |मानव की सभी श्रृजनात्मक, कला, वौध्दिक, प्रबंधकिय गतिविधियां समाज में रहकर ही संभव होती है और इन गतिविधियों को कार्यांवित करने के लिए, वह सामाजिक संगठनों का निर्माण करके, अपना व्यक्तिगत विकास, चरित्र निर्माण, सामाजिक संबंध, व्यवसायिक गतिविधियां आदि करते हुए, विकास की व्यवस्था स्थापित करता है |

सामाजिक संगठनों की कार्यप्रणाली, गतिविधियां, मानव के सामाजिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान प्रदान करतीं हैं | सामाजिक संगठनों का कर्तव्य व उत्तरदायित्व होता है कि वो अपनी सामाजिक, धार्मिक गतिविधियों के द्वारा अपने समाज के व्यक्तियों के उत्थान, विकास के लिए कार्य करें | सामाजिक संगठनों की पहचान उसके अंतगर्त कार्य करने वाले व्यक्तियों एवं उनके कार्य करने की कार्यपद्धति से की जाती है | समाज का स्वरूप उतना ही श्रेष्ठ, उतम होगा, जितना संगठन में कार्य करने वाले उतम श्रेष्ठ व्यक्तियों का होगा | यदि सामाजिक संगठन के लोग, श्रेष्ठ सिध्दांतों, प्रगती शील विचारों के अन्तर्गत अच्छे व्यवहारों से कार्य करते हुए, सभी के हित में कार्य करते है तो समाज भी शक्तिशाली होकर, समाज व राष्ट्र की उन्नति में महत्वपूर्ण योगदान करता है |

सामाजिक संगठनों के आवश्यक तत्व

समाज की श्रैष्ठता, उन्नति प्रगती विकास के लिए आवश्यक होता है कि समाजिक संगठन के नेतृत्व करने वाले सामाजिक पदाधिकारियों की कार्य क्षमता, उनकी कार्य प्रणाली, सामाजिक समर्पण भावना, समाज के प्रति मानसिक जुडाव, समाज की उन्नति प्रगती, के लिए संकल्प शक्ति, समाज के प्रति सेवा भाव का उच्च स्तर का होकर, सामाजिक विकास के लिए प्रतिवध्दता होना आवश्यक तत्व होता है | सामाजिक संगठन के नेतृत्व कर्ता पदाधिकारियों का परम् कर्तव्य होता है कि समाज में जागृति, चेतनता लाने के लिए, समाज में निरन्तर सामाजिक संगोष्ठियाँ, सभा, सामाजिक कार्यक्रम आदि संचालित करतें हुए, सामाजिक गतिविधियों का संचालन होता रहैं, ताकि समाज के सदस्यों का नेतृत्व के प्रति भावनात्मक लगाव व आस्थावान होकर, समाज को प्रगती पथ पर अग्रसर कर सहयोगी हो सकें |

सामाजिक संगठन के पदाधिकारियों को समाज के सदस्यों के प्रति अहंम भाव छोड़ कर, समाज के सभी सदस्यों के प्रति सद्भावना, समाज के प्रति अपने कर्तव्यों की प्रतिवध्दता, श्रेष्ठ विचारों का होना नितांत आवश्यक होता है | पदाधिकारियों का प्रथम प्रधान कार्य होता है कि समाज के संचालन में एकरूपता, सक़ियता, उत्साहवर्धन के लिए पक्षपात रहित व्यवहार करते हुए, सही श्रेष्ठ मार्गदर्शन करते हुए, सक्षम नेतृत्व प्रदान करना | समाज के नेतृत्व कर्ता पदाधिकारियों के लिए अनिवार्य होता है कि समाज में तारतम्य, संतुलन, समन्वय स्थापित करते हुए समाज में गतिशीलता प्रदान करें |इसके लिए नेतृत्व कर्ता पदाधिकारियों की कार्य प्रणाली, कार्य करने की इच्छा शक्ति, उनकी सौच, समाजिक विकास उन्नति का सशक्त आधार होती है |

अगर उपरोक्त बातें किसी भी सामाजिक संगठन में विद्यमान हो तो कोई भी, किसी भी तरहा की परिस्थितियां, समाज के विकास, प्रगती उन्नति, करने से रोक नहीं सकतीं है | यदि समाज का नेतृत्व सक्षम हाथों में होगा तो समाज भी सक्षम होकर, श्रेष्ठता प्राप्त कर सकता है | परंतु हम हमारे हैहयवंशी क्षत्रिय सामाजिक संगठन के नेतृत्व कर्ता पदाधिकारियों में कुछ पदाधिकारीगण अकर्मण्यता, असक़िय, होकर, समाज के सक्षम नेतृत्व करने में उदासीन, असक्षम सिध्द रहे हैं | 

सामाजिक पदाधिकारियों की अक्षमता

सामाजिक पदाधिकारियों की अक्षमता के कारण, नेतृत्वहिनता के कारण, समाज के विकास उन्नति प्रगती के लिए, समाज को प्रगती पथ पर अग्रसर करने के लिए, समाज की समस्याओं के समाधान के लिए, व्यक्ति गत, एवं सामूहिक प्रयास द्वारा (1) रिश्तों की शुभ पहल (2) तलाश जीवन साथी (3) विमर्श (4) कसेरा समाज समाचार पत्रिका आदि सामाजिक गतिविधियाँ करके, समाज के विकास के लिए प्रयास कर रहे हैं | जबकि समाज की सभी समस्याओं पर विचार करके, समाज को प्रगती पथ ले जाने का एवं उपरोक्त वैवाहिक गतिविधियों से संबंधित कार्यों का उतर दायित्व सामाजिक संगठन के पदाधिकारियों का होता है | समाज संगठन के पदाधिकारियों का कर्तव्य उत्तर दायित्व होता है कि अपनी नेतृत्व क्षमता का उपयोग करते हुए, समाज के विकास उन्नति प्रगती की इच्छा रखने वाले व्यक्तियों में समन्वय, समजस्यं स्थापित कर समाज को सक्षम नेतृत्व प्रदान कर, समाज को प्रगती पथ की ओर अग्रसर कर सकें |

हम समाज बंधुओं को, हमारे उन सभी समाज बंधुओं की तारीफ, प्रशंसा करनी चाहिए जो अपने व्यक्तिगत प्रयासो से, समाज के प्रति निष्ठा, सम्पर्ण भावा, कठिन मेहनत से समाज में वैवाहिक संबंधों की सुगमता के लिए, रिश्तों की शुभ पहल, तलाश जीवन साथी की आदि एवं समाज की समस्याओं के लिए विमर्श डिजिटल पत्रिका आदि के माध्यम से सामाजिक सेवा, जागरण, विकास के लिए प्रयत्नशील है |

उपरोक्त तथ्यों मानकों, को देखते हैं तो हम पाते हैं कि हैहयवंशी क्षत्रिय, कसेरा, ठठेरा, तार्मकार आदि सभी के समवंय से बनीं केन्द्रीय, प्रांतिय संगठन की कार्यकारिणी, पदाधिकारीगण, सिर्फ नाम मात्र के पदाधिकारी होकर, अधिकांश पदाधिकारी अक्षम, अकर्मण्य वादी ही है | इनके स्थान पर समाज में समर्पित, सक्षम, सेवा भाव से कार्य करने के इच्छुक समाज बंधुओं को समाज संगठन में पदाधिकारी पद पर अवसर दिया जाना चाहिए, ताकि समाज उन्नति प्रगती पथ पर अग्रसर हो कर विकास कर सकें |

सामाजिक संगठन के सक्षम नेतृत्व के लिए आवश्यक कार्य

समाज को सक्षम सक्रिय एवं विकास शील नेतृत्व लिए सामाजिक संगठन के लिए निम्न प्रकार की गतिविधियां आवश्यक होते है:-

(1) सामाजिक संगठन के केन्द्रीय, राज्य, नगर, कार्यकारिणी पदाधिकारियों के लिए आवश्यक होता है कि अपनी अपनी कार्यकारिणी में महिने में एक वार, सामाजिक बिषयो संदर्भ के लिए आपसी विचार विमर्श, संवाद, परिचर्चा, आवश्यक रूप से करके, कार्यकारिणी के निर्णयों से, उन बिषयो के बिषय में समाज बंधुओं को अवगत कराये |

(2) केन्द्रीय कार्यकारिणी पदाधिकारियों का कर्तव्य होता है कि तीन मासिक आधार पर प्रांतिय संगठन कार्यकारिणी के पदाधिकारियों से सामाजिक बिषयो पर संवाद कर, विचार विमर्श कर, परिचर्चा करके, राज्यों के बिषयो पर प्रगती, समस्याओं की जानकारी प्राप्त करके, आवश्यक निर्देश, सलहा, मार्ग दर्शन प्रदान करें |

(3) बर्ष में एक बार सभी प्रांतिय, नगरिया, कार्यकारिणी के पदाधिकारियों को आमंत्रित कर, सामाजिक समस्याओं के लिए, समाज के विकास के लिए, संबधित बिषयो के लिए बार्षिक सभा बेटक का आयोजन करें |

(4) केन्द्रीय कार्यकारिणी पदाधिकारियों का कर्तव्य है कि प्रांतिय एवं नगरीय संगठनों में कार्यशिलता, सक्षमता, मजबूती प्रदान करने के प्रांतो, नगरों का भ़मण, निरक्षण करके अपना मार्ग दर्शन करें |

(5) समाज के विभिन्न कार्यों का सम्पादन, निष्पादन करने के लिए समाज के योग्य, सक्षम व्यक्तियों को योग्यता एवं सक्षमता के आधार पर व्यक्तियों को सामाजिक जबाबदारी सौपते हुए, कार्यों के निस्तारण, कार्यों का विभाजन कर कार्य व उत्तर दायित्वों को सोपे |

उपरोक्त तथ्यों को देखते हुए हम पाते हैं कि हमारे हैहयवंशी क्षत्रिय समाज के पदाधिकारीगण अपने कार्यों के प्रति उदासिन होकर, कुछ भी कार्य करना नहीं चाहते हैं |समाज को सक्षम नेतृत्व ही उन्नति प्रगती एवं विकास के पथ पर अग्रसर कर सकता है |