(मूल कहानीकार श्री विजय कुमार, मध्य प्रदेश, प्रकाशन राष्ट्रधर्म, लखनऊ)
एक गाँव में दो भाई रहते थे, दोनों में एक बार जमीन -जायदाद को लेकर झगड़ा हो गया, गाँव वालों ने फैसला करना चाहे तो दोनों को मान्य नहीं हुआ l तब उन्होंने उन भाइयों से कहा कि वह पास के रहने वाले पटेल के पास जाकर पंचायत करा ले l ज़ब दोनों भाई उस गाँव के पास पहुँचे तो उन्हें खेत में काम करते पटेल के नौकर मिले l यह पूछने पर कि पटेल घर पर है कि नहीं, नौकरो ने कहा है तो मगर वह बिल्कुल बहरे है l आगे चले तो पटेल की लड़की मिली उससे पूछा कि पटेल है कि नहीं तो उसने कहा है तो पर अंधे है l दोनों पटेल के घर पहुँचे आवाज दी तो पटेल कि पत्नी निकली उनसे भी पूछा कि क्या पटेल घर पर है,?पत्नी ने कहा है तो मगर मर गये है l

इस उत्तर पर दोनों भाई बड़े चकराए आखिर अन्दर से पटेल आये दोनों की आवभगत कर चौपाल मे बैठाया और आने का कार्ड पूछा, तो भाईओ ने कहा पहले ये बताये कि आप के मजदूर आप को बहरा लड़की ने अंधा पत्नी ने मरा l पर आप तो बिलकुल ठीक ठाक है l पटेल हँसे फिर बोले भाई मेरे नौकर हर वक़्त यही रट लगाये रहते है कि तनखा बढ़ाओ, मगर कान नहीं देता l सो उनके लिए में बेहरा हूँ, l मेरी लड़की सयानी हो गयी है, लड़का खोज रहा हूँ, मगर वह समझती है, वह सयानी हो चली है l यह मैं नहीं देखता हूँ, इसलिए मैं उसके लिए अंधा हूँ l खेती -बाड़ी पंचायत, घर बाहर की चिंता, आना जाना और यह उम्र सो मैं ज्यादा ध्यान नहीं दे पाता हूँ, सो पत्नी के लिए मरा हूँl दोनों भाई अपने झगड़े की बात को भूल गये और प्रेम से रहने लगे l

आप सभी ने यह कहावत सुनी है, “किसी आदमी की नाक काटकर उसे सूंघने के लिए गुलाब देना”? अपने विश्वास को बांटने के संदर्भ में यह कुछ ऐसा है, “किसी पर हमला करो और फिर उन्हें प्रभु के सुसमाचार को बताओ।”

“प्रकृति के दृष्टिकोण तो यह है कि आप इंद्रधनुष चाहते हैं तो आप को वर्षा सहन करनी ही होगी।”
इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलाती है के ब्यक्ति के जीवन में दृष्टि नहीं दृष्टिकोण सही होना चाहिए| जैसे की आप जितना अधिक शांत रहेंगे अपने आप को आप उतना ही शक्तिसले और मजबूत पायगे, जैसे लोहा ठंडा रहने पर ही मजबूत होता है| ब्यक्ति क्रोध और आवेश में गर्म लोहे की तरह किसी भे रूप में ढल जाता है जैसे लोहा गर्म होकर विभिन्न आकार ले लेता है| एक सफल असफल व्यक्ति के जीवन पर हम नजाए डाले तो हमें एक बहुत बड़ा अंतर यह स्पष्ट पता लगेगा कि अंतर सिर्फ ब्यक्ति के दृष्टिकोण का है, जो सफलता व असफलता का अंतर सिर्फ दृष्टिकोण के साथ सीधा सम्बन्ध होता है. यदि आपका दृष्टिकोण सकारात्मक है तो आपको सफलता मिलना तय है. पर यदि यही दृष्टिकोण यदि नकारात्मक तो असफलता मिलना तय है|

ब्यक्ति की दिशा और दशा हमें हमारे दृष्टिकोण के हिसाब से ही दिखती है. आपकी जैसी विचार है, वही विचार दूसरे के जीवन में अलग होती है. हमारा दृष्टिकोण ही हमारी विचार तय करता है. इसलिए अपना दृष्टिकोण बदलिए और उसे सकारात्मक करिए. अगर दृष्टिकोण बदल गया तो आपका जीवन बदलना तय है| समझदारी का मतलब सहमत होना नहीं है, लेकिन इसका मतलब यह है कि आप उस व्यक्ति को संभाल रहे हैं, चाहे उनका कोई भी सांसारिक दृष्टिकोण हो, क्योंकि आपने उन्हें समझने के लिए समय निकाला है।

किसी एक बुद्धिमान व्यक्ति ने एक बार लिखा; “यदि आप कुत्ते से हड्डी लेने की कोशिश करते हैं, तो कुत्ता अपनी सारी ताकत से उस हड्डी की रक्षा करेगा; लेकिन अगर आप उसे मांस का एक अच्छा टुकड़ा देते हैं, तो कुत्ता तुरंत हड्डी छोड़ देगा।” इसी तरह, लोग हमेशा अपने धर्म, विचारों और विश्वास की रक्षा करेंगे क्योंकि वे उससे बेहतर और कुछ नहीं जानते हैं। यीशु शानदार है, और यीशु के साथ रिश्ता रखने से ज़्यादा बड़ा प्रतिफल किसी भी चीज़ में नहीं है, वे अभी तक इस सच को नहीं जानते हैं।

कोमल उत्तर से क्रोध शांत होता है किन्तु कठोर वचन क्रोध को भड़काता है। –
नीतिवचन 15:1

श्रीमति रीता सिंह चंद्रवंशी
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