कावापूत की बुद्धिमानी

(कश्मीर पर आधारित यह कहानी डा० शिवन कृष्ण रैना की मूल रचना है) जिसे राष्ट्धर्म पत्रिका, लखनऊ में प्रकाशित है|) ठेस लगे, बुद्धि बढ़े – अर्थ – हानि मनुष्य को बुद्धिमान बनाती है। एक दिन एक कौवा और उसका पोता सडक के किनारे दाना चुग रहे थे|इतने में वंहा से एक मनुष्य गुजरा| मनुष्य को […]

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दृष्टिकोण

(मूल कहानीकार श्री विजय कुमार, मध्य प्रदेश, प्रकाशन राष्ट्रधर्म, लखनऊ) एक गाँव में दो भाई रहते थे, दोनों में एक बार जमीन -जायदाद को लेकर झगड़ा हो गया, गाँव वालों ने फैसला करना चाहे तो दोनों को मान्य नहीं हुआ l तब उन्होंने उन भाइयों से कहा कि वह पास के रहने वाले पटेल के […]

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बुराई की जड़

बुराई की जड़ मूल कहानीकार अयोध्या प्रसाद “कुमुद”, बुंदेलखंड, प्रकाशन राष्ट्रधर्म लखनऊ “बुराई नौका में छिद्र के समान है। वह छोटी हो या बड़ी, एक दिन नौका को डूबो देती है।“: कालिदास  एक पंडित थे, बड़े धर्मी कर्मी, ज्ञानी l उन्होंने एक नगर के विषय मे सुना कि वह अत्यंत सुन्दर है l तो उसे […]

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