हे संगीत परी तुम्हें प्रणाम

(सुश्री आस्था सक्सेना के जन्म दिवस पर) सागर की लहरों से उत्पन्न संगीत राग बंधो कीअमृतमयी सुर सीपियां, लहरियांहिरणों से इठलाते स्वर निर्बंध, मुक्त कभी मीरा, कभी कबीर, कभी सूर, तुलसी, श्याम, राधा को समर्पित भक्ति सुमन, मनौती कभी ज्वार सी उमड़ती, लौटती अविराम भव्य स्वर मुद्राएं ,विराट सौंदर्य की उपासना में भावों पर नृत्य […]

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फगुनहटा होली

फगुनहटा होली जब फगुनहटा कुछ तेज चले, समझो होली तब आई है।जब घर घर गुझिया,पापड़ बने, समझो होली तब आई है। जब पिचकारी की हाट सजे,जब रंगबालो की शाॅप सजे ,जब मेवा, मावा साथ बिके,समझो होली तब आई है। जब फगुनहटा कुछ तेज चले,समझो होली तब आई है ।। जब गली गली मे आग जले,फागुन […]

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मौनी रेखाएं

जहान की जरूरत जरूरत है इस जहान को ऐसे इंसानों की कि मिश्री घुली जुबां बोलना आदत हो जिनकी जरूरत है इस जहान को ऐसे इंसानों की कि आसपास खुशी से खिले चेहरे देखना जरूरत हो जिनकी जरूरत है इस जहान को ऐसे इंसानों की कि ख्वाहिश हो जिनकी कामयाबी दूसरों की ख्वाहिश की जरूरत […]

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बसंत

पावन बसंत मधुरम बसंत,जय जय बसंत। सुखमय बसंत मंगल बसंत जय जय बसंत।। दिन बड़े गर्मी बड़ी मौसमी मधुमास भली सुनहरा पर्व वसंती जीने की आस बड़ी सब कुछ नया लागे, जय जय बसंत। सुखमय बसंत मंगल बसंत जय जय बसंत।। मौसमी देश है भारत स्वर्णिम देश है भारत जन्मे प्रभु यहीं पर सनातनी देश […]

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होली उत्सव प्रीत का

गिरिराज सुधा, कोटा पीतल की पिचकारी में घुले हैं रंग हजार, दुश्मन दोस्त हो गए, है होली का त्यौहार। रंगों में सब धुल गई, आपसी तकरार, सबके दिलों में रहे, प्यार की दरकार। होली उत्सव प्रीत का, खेलें मिलकर फाग, फागुन मन में बो गया, वासंती अनुराग। फागुन में रंग हो गए, पूरे मस्तीखोर, गौरी […]

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फाग फुहारें होली की

गिरिराज सुधा, कोटा हैहयवंशी रंग में, भीगे जूही पलाश, होली की बौछारें पहुँचीं, रंगों के आकाश। दिलों में ले पिचकारियाँ, संकल्पों के रंग, सपनों की अठखेलियाँ, चाहतों के चंग। फागुन का नर्तन हुआ, वसंत के दस्तूर, होली हैहयवंश की, प्रीत लुटी भरपूर। अबीर, गुलाल कुंकुम उड़े, गूँजे पाहुन-गीत, उर में मधुरिम प्यास उठी, तन में […]

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कुछ अलग किया

न नशा इश्क़ का कियान नशा दिखावे कानाम हो जिसका वैभवक्या किया अगर कुछ अलग न किया क्या हुआ जो भूल गए क्या खता की जो रूठ गएहम तो गैरों की भी परवाह कर लेते हैं जनाबक्या हुआ जो अपनों को ही बेपरवाह कर गए हो गया हूं वाकिफ कौन क्या है इस जहां मेंलोग […]

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क्या खता हुई जो मुस्कुरा न सके

क्या खता हुई जो मुस्कुरा न सके क्या वजह थी जो गम को छिपा न सके इस जवां दिल में जिंदादिली बनाए रख ऐ साथी ये जहां है जहां आंखो ने आंसुओं को भी पनाह न दी मोहब्बत है दीवानों सी जिसे हम पा न सके हुई खता जो हमसे दोबारा चाह न सके करना […]

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हिंदी की अभिलाषा

हिंदी की अभिलाषा (राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के सुअवसर पर)   विश्व की प्राचीन भाषा, सरल और समृद्ध भाषा, गर्व है,हूँ मैं हिंदीभाषी, हिंदी है मेरी मातृभाषा। देश की संस्कृति की छवि, संस्कारों का प्रतिबिंब है, विनयपूर्ण शब्दों से सज्जित, यह भाषा शान-ए-हिंद है। मधुरता और सरसता का, वेग है, ये प्रवाह है, मेरे देश की […]

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टेसुई यादें

फिर वसंत ने भेज दिया एंक खत मौलश्री के नाम ! सिलसिला फिर शुरु होगा मनुहार का नेह-निष्ठ भावों के बढ़ते ज्वार का राग-अनुराग आस्था की हरियाली में हैं फूटते रिश्ते प्रेम के बनते अचानक टूटते पागल हवाएँ भेजतीं मेघों को कोई संदेश अनाम! दहक उठे टेसुई यादों के पलाश वन युग बीते, नैन रीते […]

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टेसू राग

टेसू बिन फागुन न होय बसंत ऋतु आते ही अनायास लाल – लाल टेसुओं की याद हो आती है। बनन – बागन में टेसुओं का फूलना और अन्य वृक्षों से पत्तों का झड़ना यह प्रकृति प्रदत्त उपहार है।आमों का बौर लगना ,कोयल का कूकना व खेतों में सरसों का लहलहाना एक खुशनुमा माहौल बनाता है।इसलिए […]

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फिर धार किसलिए

फिर धार किसलिए मुश्किल में जब कोई कामं न आये । जीवन का बोलो फिर सार किसलिए। लिखा किसी के जब काम न आये। बोलो कलम में फिर धार किसलिए । अपनों के ही सुख दुःख में शामिल। बाकी देखो फिर संसार किसलिए । बीच भवर में जब भी फस जाये नैय। बोलो हांथों में […]

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रंग वसंत के

(एक) कचनारी देह में पलाश रख गयी बयार वसंत आते आते! अंतस् के आँगन में अमलतास बौराए चाह के हिरन मचले पलकों से बतियाये रतनारे नयनों में तलाश कर गयी बयार वसंत आते आते! उत्पाती भ्रमरों के सम्मोहन छोर-छोर वनवासी कलियों में गंध उठी पोर पोर फगुनायी श्वासों में मिठास भर गयी बयार वसंत आते […]

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वसंत गीत: वसंत ने ली अंगड़ाई

गात अद्भुत प्रकृति निज सजाई, वसंत ने ली अंगड़ाई। ठंड खेल गई छुपन-छुपाई, वसंत ने ली अंगड़ाई। अल्हड़ बयार छू-झोर हौले-हौले, मदन रस आमों व महुओं में घोले, प्रीति-गीति कोकिलों ने गाई, वसंत ने ली अंगड़ाई। गात अद्भुत प्रकृति निज सजाई, वसंत ने ली अंगड़ाई। ठंड खेल _ _ _ अरहर व सरसो की पीत […]

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संघर्ष विजय का दुहराता हूँ मैं

कदम से कदम मिलाकर लोगो सुबह के साथ चलता हूँ । लक्ष्य पर अपनी पैनी नजर रख भेदने का दम रखता हूँ । . कदम से कदम मिलाकर हम भी किसी से कम नहीं बार -बार विश्वासव दिलाता हूँ। नाव अगर हमको डुबाये तैरकर निकलने का दम रखता हूँ । कदम से कदम मिलाकर रह […]

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ज्ञान का दीपक जलाना है

कदम से कदम मिलकर साथ चलना है । मुश्किल रास्तों को भी आसान बनाना है। जिस – जिस घर में भी घनघोर अन्धेरा है । उस घर में हमे ज्ञान का दीपक जलाना है । जो भी भटके हुए लोगों को राह दिखाता है। उसके कदमों में ही यार झुकता जमाना है। काम हमको नेकी […]

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ओ ऋतुराज बसंत आओ निमन्त्रण स्वीकारो

ओ ऋतुराज बसंततुम्हारे आगमन क़ीभारतवासी बड़ी बेसब्री सेप्रतीछा करते हैंआपके आगमन परमायूसी पर मस्ती छाती हैधरा पर नया आवरण चढाते होवशुन्धरा दुल्हन सा श्रृंगार करगदगद हो उठती है वर्ष भर से मौनकाली कलूटी कोयलियापागलों सीएक ड़ाल से दूसरी ड़ाल परफुदक-फुदक करआपके आगमन कीघोषणा करती है .कुहू-कुहू की मधुर वाणी सेसारे वातावरण कोसगीतमय बनाती है . […]

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आध्यात्म: अंतस् का फाग

जिंदगी कैसी भागमभाग, संचय, नर्तन और संताप। ढलता सूरज, सागर तट पर, सजी पालकी चला उजास। बेशकीमती साँसों का घर, आत्म-वैभव से आबाद। सात्विकता की दौलत जोड़ो, योग जगाये अन्र्तआग। मौन की भाषा योग सिखाता, स्वानुभूत वासंती राग। विषैले नागों को नथकर, योग चखाता अमृत स्वाद। योग के दो अलौकिक अक्षर, अन्तर्दृष्टि और वैराग। साक्षी […]

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जागो पृथ्वीराजो जागो

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