आओ एकता के दीप जलाये

संकल्पो का दीप प्रज्वलित कर , रक्तबीज कोरोना को भगाये । आओ एकता के दीप जलाये, विषाणु कोविद १९ को हराये।। देश मे आयी, विपदा भारी,मौतो की सिलसिला जारी। शातिर आतंकी है मानकर,मुक्त करना है दुनिया सारी।। हिन्दू आये, मुस्लिम आये, आयेसिक्ख,व इसाई आये। चारो ओर दीप जगमगाये,संकल्प एकता का दोहराये।। भेद भाव को ,त्याग […]

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महादेव का बनारस

कभी आऊंगा चौखट पे तुमहरी देखे कब तुम बुलाते हो बैठुंगा घाट पे भी तुम्हरी देखे कितना लहराती हो घोटुंगा भाँग भी देखे कितना चढ़ जाते हो घूमुंगा गलियों में भी तुम्हरी देखे कितना भूलाती हो धुनी रमाऊंगा मन्दिर के किसी कोने देखे कब तक रूठ जाते हो, चखुंगा चाट काचौरी भी देखे कितना खिलाते […]

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कलयुग

भीख मांगे भिखमंगा मन राशन ले तउन भिखारी दान करे जुवारी मन अऊ भोग करे पुजारी । खेत जाये किसान अनाज रोपे बनिहार धान निकाले हार्वेस्टर मंडी ले जाये दलाल । किसान रोये दर दर नेता जोड़े खड़े हाथ अऊ मंद मंद मुस्काये लूट गे हे इहां किसान। दलाल दलाली मे पेट भरे कोचिया मन […]

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श्वासों की जुगलबंदी

जब योग सितार बजता है, तन में सुर-ताल सजता है। फ़िक्र करो उसकी यारों, जो दिल के साथ धड़कता है। संभावना है शिखरों की, जब योग का जादू चलता है। श्वासों की है जुगलबंदी, मौन का संगीत झरता है। गीता गा और दृष्टा बन, क्यों घर-द्वार भटकता है। शास्त्र, शब्द और सिद्धान्त, चित्त के बंधन […]

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हमारी धरोहर

प्रिय मित्रों विमर्श के इस अंक से हम एक नवीन स्तंभ को प्रारम्भ कर रहे हैं;– ‘हमारी धरोहर’। यह स्तंभ आपको कैसा लगा; इस पर आप सभी की प्रतिक्रिया प्रतीक्षारत है। ‘हमारी धरोहर’ स्तंभकार का एक संक्षिप्त परिचयनाम-गौरव वर्मा ( वर्तमान प्रवक्ता अंग्रेजी एवं पूर्व प्रधानाध्यापक )निवास- नगर फर्रुखाबाद, उत्तर प्रदेश।सम्मानित  वरिष्ठ सदस्य- ‘ दीप […]

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विपस्सना

साक्षित्व भाव का योग है विपस्सना आतिजाति श्वास को बस देखना । इस पर देह उस पर है चैतन्य श्वास के हर छंद पर नज़र रखना। स्वयं में फिर हो जाएं मौन सागर भाव तरंगों का छोड़ यह झुनझुना। में देह नही, मैन नही, न श्वास हूँ में हूँ प्रत्यक्ष प्रतीति आत्म-चेतना। श्वास झरोखे में […]

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विश्वास और आशा जगाए रखें

विश्वास और आशा जगाए रखें  एक सुबह होगी …… जब लोगों के कंधों पर ऑक्सीजन सिलेंडर नहीं दफ्तर का बैग होगा, गली में एंबुलेंस नहीं स्कूल की वैन होगी, और भीड़ दवाखानों पर नहीं चाय-नाश्ते की दुकानों पर होगी, एक सुबह होगी ….. जब पेपर के साथ पापा को काढ़ा नहीं चाय मिलेगी, दादाजी बाहर निकल कर बेखौफ पार्क में गोते लगाएंगे,और […]

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प्रकृति के साथ एकाकार

तबला वादक एवं प्रकृति उपासक श्री देवेंद्र सक्सेना, कोटा के जन्मदिवस पर एक भेंटगिरिराज सुधा, कोटा माँ की कोख सेप्रकृति की गोद मेंपल्लवित, पोषित होतुम हुए दिव्यता के साथ एकाकारसांसारिक रिश्तों के पारतुम्हारे अवतरण कीहरित रोशनी में आतृप्त हुईयह सम्पूर्ण प्रकृतिदिव्यता के आगोश में लीन है। ताल मिलाते तुम्हारेमधुर थाप के स्वरप्राकृतिक अभिव्यंजना के साथवाद, […]

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सुन विद्यार्थी

योग व ध्यान जिंदा रख, सम्यक पहचान जिंदा रख। आत्मस्थ हो साधक बन, वैदिक शान जिंदा रख। जीवन मुक्ति दीप जला, सत्व अनुष्ठान जिंदा रख। ज्ञानपंथ का तू खड़ग , आत्मोउत्थान जिंदा रख। गर्व, दृढ़ता, संयम, व्रत, पवित्र साधन जिंदा रख। शिष्य से शिवत्व की और, उन्मत्त उड़ान जिंदा रख। तू जिज्ञासु आर्थार्थी, ज्ञान कमान […]

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प्यार की बरसात हो

जिंदगी  में बस प्यार की बरसात हो।इश्क़ करने वालों का सुखी संसार हो ।जिंदगी में बस कोइ भी भूँखा न रहे कोइ प्यासा न रहे।घर में हर दिवस दिवाली सा त्यौहार हो ।जिंदगी में बस लोगों में सद्भावना हो आपस में प्यार हो।आपस में गले मिलें  ईद  सा त्यौहार हो।जिंदगी में बस आपस में भाईचारा […]

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फिर से

अपाहिज बनकर रह गये थे मानो पक्षियों के पर काट दिए हो पैर होते हूए भी कदम रूक से गये थे धरती मानो समा गई हो पाताल मे आकाश भी खामोश नजर आ रही थी डर इस कदर घर कर गया था मानो जंगल वीरान सा हो गया हो कटीली झाड़ियां, सूखे वृक्ष सूखे पत्ते […]

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जान लेता हूँ

है अगर  खता  मेरी तो  यार  मैं मान लेता हूँ।भीड़ में अच्छे और बुरे को मैं पहचान लेता हूँ।ताकतवर  है मुकाबिल तो में जान लेता हूँ।तानकर सीना उससे  जंग की ठान लेता हूँ। देखकर लिफाफा खत में लिखा जान लेता हूँ।है दिल में प्यार किसके कितना जान लेता हूँ।मुश्किलों में जो काम आता सदा भाता  […]

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चैन से न रह पाओगे

चैन  से  न  रह पाओगे हमारे एहसान याद कर। पछताओगे  हमे  अपने  दिल  से  निकाल  कर ।  चैन से न रह पाओगे कैसे खुश रहते हैं लोग माँ बाप से दूरियां बनाकर।  पाला किया बड़ा पढ़ाया लिखाया पसीना बहा कर। चैन से न रह पाओगे मुश्किलों से पा लोगे निजात यार देखना पल भर मे। […]

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अपने ज़िंदा होने का

अपने ज़िंदा होने का अब  एहसास करना होगा  तुमको ।  आग लगने वालो  को अब सबक सिखाना होगा तुमको ।अपने ज़िंदा होने का  हर  इक  साख पै  उल्लू  बैठे  हैं बर्बाद गुलिस्ता करने को।इनकी नश्ल को खत्म कर मुल्क को बचाना होगा तुमको।अपने ज़िंदा होने का छीन कर हक़  गरीबों का घर भरने जो यहां […]

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कद मैंने ख़ुद घटा लिया,  अपनी  उड़ान  का

“कद मैंने ख़ुद घटा लिया,  अपनी  उड़ान  का” रखता हूँ यार मैं तो दिल, नेक दिल इंसान का कद मैंने खुद घटा लिया अपने कद को ताड के पेड़ सा है बड़ा मत करना दिल सदा ही बड़ा रखना दरिया दिल इंसान का अपने कद को ताड़ के डालकर  मुश्किलों  में, अपनी हदें पार मत […]

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हे संगीत परी तुम्हें प्रणाम

(सुश्री आस्था सक्सेना के जन्म दिवस पर) सागर की लहरों से उत्पन्न संगीत राग बंधो कीअमृतमयी सुर सीपियां, लहरियांहिरणों से इठलाते स्वर निर्बंध, मुक्त कभी मीरा, कभी कबीर, कभी सूर, तुलसी, श्याम, राधा को समर्पित भक्ति सुमन, मनौती कभी ज्वार सी उमड़ती, लौटती अविराम भव्य स्वर मुद्राएं ,विराट सौंदर्य की उपासना में भावों पर नृत्य […]

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फगुनहटा होली

फगुनहटा होली जब फगुनहटा कुछ तेज चले, समझो होली तब आई है।जब घर घर गुझिया,पापड़ बने, समझो होली तब आई है। जब पिचकारी की हाट सजे,जब रंगबालो की शाॅप सजे ,जब मेवा, मावा साथ बिके,समझो होली तब आई है। जब फगुनहटा कुछ तेज चले,समझो होली तब आई है ।। जब गली गली मे आग जले,फागुन […]

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मौनी रेखाएं

जहान की जरूरत जरूरत है इस जहान को ऐसे इंसानों की कि मिश्री घुली जुबां बोलना आदत हो जिनकी जरूरत है इस जहान को ऐसे इंसानों की कि आसपास खुशी से खिले चेहरे देखना जरूरत हो जिनकी जरूरत है इस जहान को ऐसे इंसानों की कि ख्वाहिश हो जिनकी कामयाबी दूसरों की ख्वाहिश की जरूरत […]

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बसंत

पावन बसंत मधुरम बसंत,जय जय बसंत। सुखमय बसंत मंगल बसंत जय जय बसंत।। दिन बड़े गर्मी बड़ी मौसमी मधुमास भली सुनहरा पर्व वसंती जीने की आस बड़ी सब कुछ नया लागे, जय जय बसंत। सुखमय बसंत मंगल बसंत जय जय बसंत।। मौसमी देश है भारत स्वर्णिम देश है भारत जन्मे प्रभु यहीं पर सनातनी देश […]

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होली उत्सव प्रीत का

गिरिराज सुधा, कोटा पीतल की पिचकारी में घुले हैं रंग हजार, दुश्मन दोस्त हो गए, है होली का त्यौहार। रंगों में सब धुल गई, आपसी तकरार, सबके दिलों में रहे, प्यार की दरकार। होली उत्सव प्रीत का, खेलें मिलकर फाग, फागुन मन में बो गया, वासंती अनुराग। फागुन में रंग हो गए, पूरे मस्तीखोर, गौरी […]

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फाग फुहारें होली की

गिरिराज सुधा, कोटा हैहयवंशी रंग में, भीगे जूही पलाश, होली की बौछारें पहुँचीं, रंगों के आकाश। दिलों में ले पिचकारियाँ, संकल्पों के रंग, सपनों की अठखेलियाँ, चाहतों के चंग। फागुन का नर्तन हुआ, वसंत के दस्तूर, होली हैहयवंश की, प्रीत लुटी भरपूर। अबीर, गुलाल कुंकुम उड़े, गूँजे पाहुन-गीत, उर में मधुरिम प्यास उठी, तन में […]

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कुछ अलग किया

न नशा इश्क़ का कियान नशा दिखावे कानाम हो जिसका वैभवक्या किया अगर कुछ अलग न किया क्या हुआ जो भूल गए क्या खता की जो रूठ गएहम तो गैरों की भी परवाह कर लेते हैं जनाबक्या हुआ जो अपनों को ही बेपरवाह कर गए हो गया हूं वाकिफ कौन क्या है इस जहां मेंलोग […]

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क्या खता हुई जो मुस्कुरा न सके

क्या खता हुई जो मुस्कुरा न सके क्या वजह थी जो गम को छिपा न सके इस जवां दिल में जिंदादिली बनाए रख ऐ साथी ये जहां है जहां आंखो ने आंसुओं को भी पनाह न दी मोहब्बत है दीवानों सी जिसे हम पा न सके हुई खता जो हमसे दोबारा चाह न सके करना […]

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हिंदी की अभिलाषा

हिंदी की अभिलाषा (राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के सुअवसर पर)   विश्व की प्राचीन भाषा, सरल और समृद्ध भाषा, गर्व है,हूँ मैं हिंदीभाषी, हिंदी है मेरी मातृभाषा। देश की संस्कृति की छवि, संस्कारों का प्रतिबिंब है, विनयपूर्ण शब्दों से सज्जित, यह भाषा शान-ए-हिंद है। मधुरता और सरसता का, वेग है, ये प्रवाह है, मेरे देश की […]

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टेसुई यादें

फिर वसंत ने भेज दिया एंक खत मौलश्री के नाम ! सिलसिला फिर शुरु होगा मनुहार का नेह-निष्ठ भावों के बढ़ते ज्वार का राग-अनुराग आस्था की हरियाली में हैं फूटते रिश्ते प्रेम के बनते अचानक टूटते पागल हवाएँ भेजतीं मेघों को कोई संदेश अनाम! दहक उठे टेसुई यादों के पलाश वन युग बीते, नैन रीते […]

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टेसू राग

टेसू बिन फागुन न होय बसंत ऋतु आते ही अनायास लाल – लाल टेसुओं की याद हो आती है। बनन – बागन में टेसुओं का फूलना और अन्य वृक्षों से पत्तों का झड़ना यह प्रकृति प्रदत्त उपहार है।आमों का बौर लगना ,कोयल का कूकना व खेतों में सरसों का लहलहाना एक खुशनुमा माहौल बनाता है।इसलिए […]

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फिर धार किसलिए

फिर धार किसलिए मुश्किल में जब कोई कामं न आये । जीवन का बोलो फिर सार किसलिए। लिखा किसी के जब काम न आये। बोलो कलम में फिर धार किसलिए । अपनों के ही सुख दुःख में शामिल। बाकी देखो फिर संसार किसलिए । बीच भवर में जब भी फस जाये नैय। बोलो हांथों में […]

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रंग वसंत के

(एक) कचनारी देह में पलाश रख गयी बयार वसंत आते आते! अंतस् के आँगन में अमलतास बौराए चाह के हिरन मचले पलकों से बतियाये रतनारे नयनों में तलाश कर गयी बयार वसंत आते आते! उत्पाती भ्रमरों के सम्मोहन छोर-छोर वनवासी कलियों में गंध उठी पोर पोर फगुनायी श्वासों में मिठास भर गयी बयार वसंत आते […]

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वसंत गीत: वसंत ने ली अंगड़ाई

गात अद्भुत प्रकृति निज सजाई, वसंत ने ली अंगड़ाई। ठंड खेल गई छुपन-छुपाई, वसंत ने ली अंगड़ाई। अल्हड़ बयार छू-झोर हौले-हौले, मदन रस आमों व महुओं में घोले, प्रीति-गीति कोकिलों ने गाई, वसंत ने ली अंगड़ाई। गात अद्भुत प्रकृति निज सजाई, वसंत ने ली अंगड़ाई। ठंड खेल _ _ _ अरहर व सरसो की पीत […]

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संघर्ष विजय का दुहराता हूँ मैं

कदम से कदम मिलाकर लोगो सुबह के साथ चलता हूँ । लक्ष्य पर अपनी पैनी नजर रख भेदने का दम रखता हूँ । . कदम से कदम मिलाकर हम भी किसी से कम नहीं बार -बार विश्वासव दिलाता हूँ। नाव अगर हमको डुबाये तैरकर निकलने का दम रखता हूँ । कदम से कदम मिलाकर रह […]

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