डिजिटल विमर्श

रक्षा बन्धनः श्रवण नक्षत्र बिन बंधेगा इस बार रक्षा सूत्र

सत्य सनातन वैदिक हिन्दू धर्म  मे बहन-भाई के  पबित्र त्यौहार रक्षा बन्धन का बडा ही महत्व है इस पवित्र दिन की प्रतीक्षा बहने साबन मास के  आरम्भ होते ही करना आरम्भ कर देती है इस दिन बहनो  द्वारा अपने भाईयो तथा अशक्त लोगो द्वारा शक्तिशाली लोगो से अपनी...

अक्षय तृतीया – लोक जीवन की अभिव्यक्ति

सभ्यता मनुष्य की बाह्य प्रवत्ति मूलक प्रेरणाओं से विकसित हुई है। मनुष्य की अंतर्मुखी प्रवत्तियों से जिस तत्व का निर्माण होता है,यही संस्कृति कहलाती है। संस्कृति लोकजीवन का दर्पण होती है।जीवन में संतुलन बनाए रखना संस्कृति की सबसे बड़ी विशेषता है।...

टेसू बिन फागुन न होय

बसंत ऋतु आते ही अनायास लाल – लाल टेसुओं की याद हो आती है। बनन – बागन में टेसुओं का फूलना और अन्य वृक्षों से पत्तों का झड़ना यह प्रकृति प्रदत्त उपहार है।आमों का बौर लगना ,कोयल का कूकना व खेतों में सरसों का लहलहाना एक खुशनुमा माहौल बनाता...

स्तंभ - धर्म और संस्कृति

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भारतीय धर्म और संस्कृति पर आधारित ज्ञानवर्धक लेख

रक्षा बन्धनः श्रवण नक्षत्र बिन बंधेगा इस बार रक्षा सूत्र

सत्य सनातन वैदिक हिन्दू धर्म  मे बहन-भाई के  पबित्र त्यौहार रक्षा बन्धन का बडा ही महत्व है इस पवित्र दिन की प्रतीक्षा बहने साबन मास के  आरम्भ होते ही करना आरम्भ कर देती है इस दिन बहनो  द्वारा अपने भाईयो तथा अशक्त लोगो...

अक्षय तृतीया – लोक जीवन की अभिव्यक्ति

सभ्यता मनुष्य की बाह्य प्रवत्ति मूलक प्रेरणाओं से विकसित हुई है। मनुष्य की अंतर्मुखी प्रवत्तियों से जिस तत्व का निर्माण होता है,यही संस्कृति कहलाती है। संस्कृति लोकजीवन का दर्पण होती है।जीवन में संतुलन बनाए रखना...

टेसू बिन फागुन न होय

बसंत ऋतु आते ही अनायास लाल – लाल टेसुओं की याद हो आती है। बनन – बागन में टेसुओं का फूलना और अन्य वृक्षों से पत्तों का झड़ना यह प्रकृति प्रदत्त उपहार है।आमों का बौर लगना ,कोयल का कूकना व खेतों में सरसों का...

आए फागुनवा के रीत मोरे ललनी

होली प्रतीक है दानवता पर मानवता, अज्ञानता पर ज्ञान और कटुता पर प्रेम की विजय का। वहीं होली पर गाए जाने वाले फाग गीत लोक जीवन को उत्साह –उमंग देने का एक जीवंत जरिया है। सच में छत्तीसगढ़ी फाग गीतों की अल्हड़ता हंसी ठिठोली...

श्री दत्तबावनी

श्री दत्तबावनी यह दत्त बावनी है, इसकी मूल रचना गुजराती में है, जिसका मराठी अनुवाद साथ ही है। हिंदी अनुवाद हेतु मुझे प्राप्त हुई थी, मैंने अपने सीमित मराठी भाषा ज्ञान के आधार पर इसका हिंदी अनुवाद कर प्रेषित किया था...

भगवान् दत्तात्रय जी की जन्मोत्सव पर विशेष भेंट

भगबान्  कार्त्तबीर्य  सहस्रार्जुन जी के पूज्य गुरू देब योगीराज भगबान् दत्तात्रेय जो कि श्री बिष्णु जी के चौबिस अबतारो मै एक है ! इनके चौबिस प्राकृतिक गुरू थे जिसमे अजगर -साँप – गाय – कुत्ता इत्यादि थे , को...

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