टेसू बिन फागुन न होय

बसंत ऋतु आते ही अनायास लाल – लाल टेसुओं की याद हो आती है। बनन – बागन में टेसुओं का फूलना और अन्य वृक्षों से पत्तों का झड़ना यह प्रकृति प्रदत्त उपहार है।आमों का बौर लगना ,कोयल का कूकना व खेतों में सरसों का लहलहाना एक खुशनुमा माहौल बनाता है।इसलिए तो बसंत को ऋतुराज कहा […]

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आए फागुनवा के रीत मोरे ललनी

होली प्रतीक है दानवता पर मानवता, अज्ञानता पर ज्ञान और कटुता पर प्रेम की विजय का। वहीं होली पर गाए जाने वाले फाग गीत लोक जीवन को उत्साह –उमंग देने का एक जीवंत जरिया है। सच में छत्तीसगढ़ी फाग गीतों की अल्हड़ता हंसी ठिठोली और लोक सौंदर्य अभिभूत करने वाला है।

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