संपादकीय: शक्ति और समृद्धि विशेषांक

सभी हैहयवंशीय भाइयों और बहनों को दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं । माता महालक्ष्मी जी की आप सभी पर सदैव कृपा बनी रहे । आपका परिवार स्वस्थ, सुरक्षित और प्रसन्नता पूर्वक रहे यही हमारी शुभकामनाएं हैं । विमर्श का यह अंक “शक्ति और समृद्धि” विशेषांक है । शक्ति और समृद्धि एक रूपक है सामाजिक सक्षमता का, […]

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खोलिये दिलों की खिड़कियाँ: संपादकीय

जब तक हमारे दिलों के खिड़की दरवाजे बंद है  सामाजिक समन्वय भी कठिन है यह हमारे समाज की विडंबना है । समाज मे योग्य और समझदार लोगों की कमी नही है फिर भी सामाजिक रूप से समाज पिछड़ा ही है । विभिन्न सामाजिक विद्वानों द्वारा इस संबंध में अपनी चिंताएं व्यक्त की गई हैं । […]

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संपादकीय: स्वतंत्रता विशेषांक

सभी देशवासियों को, विमर्श परिवार की और से स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक बधाइयाँ एवं शुभकामनाएँ । स्वतंत्रता दिवस हर वर्ष आता है, हम उत्सव मनाते हैं और दिन बीत जाता है । यह अवसर उपलब्ध नही हो पाता कि अपनी स्वतंत्रता के विषय मे कुछ सोच सकें । क्या आप कभी विचार करते हैं कि हम […]

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संपादकीय: योगक्षेम विशेषांक

संपादकीय: योगक्षेम विशेषांक विमर्श का जून अंक आपके समक्ष प्रस्तुत है, दो दिन की देरी, अपने निर्धारित समय, माह की पहली तारीख, से आने केलिए क्षमा प्रार्थी हूँ, विलंब का कारण कितना ही महत्वपूर्ण क्यों न हो, अपने पाठकों को प्रतीक्षा करवाना एक अपराध तो है ही, परन्तु हमे विश्वास है जब आप विमर्श का […]

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संपादकीय: समाज की आकांक्षा

संपादकीय: समाज की आकांक्षाएं सबसे बड़ा संघर्ष अपनो के साथ ही होता है । वैचारिक मतभेद की स्थिति अक्सर समूहों में होती ही है । यह संभव ही नही की हर व्यक्ति किसी विषय पर एकमत हों । मनुष्य को ईश्वर ने मस्तिष्क दिया है और जैसे हर व्यक्ति के उंगलियों के निशान अलग होते […]

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