दानशीलता की अच्छाई और बुराई

दानशीलता का विषय अच्छाई/बुराई के बीच शुरु से झुल रहा है  फिर भी कोई भी सामाजिक अथवा धार्मिक  और सार्वजनिक कार्य बिना चंदे के नही चलते हैं | समाज से दान प्राप्त होता है  तभी आज तक बदस्तुर चल रहे हैं | अधिकतम, देने वाला एक परंपरा मान निर्वाह करता है तथा “इसका क्या होगा” […]

Continue Reading

पृथ्वी पर जीवन समाप्त हुआ तो

विश्व पर्यावरण दिवस  पृथ्वी पर जीवन समाप्त हुआ तो उसका कारण प्रदूषण होगा..  5 जून को 1974 में सयुंक्त राष्ट्र महासभा ने विश्व पर्यावरण दिवस मनाना शुरू किया पृथ्वी और वायुमंडल को बचाने के लिए यह सबसे बड़ा वार्षिक आयोजन हैं। इस आयोजन के आरंभ होने की तिथि पर मेरा जन्म दिवस भी आता है […]

Continue Reading

नए तरीके से समाज सेवा

कुछ दिन पूर्व मेरे एक परिचित पर दोहरा संकट आया, कोरोना ने रोजगार छीन लिया और स्कूल वालों ने बच्चों से बिना फीस जमा किये ऑनलाइन क्लास अटेंड करने का अधिकार । मेरा मित्र और उसका परिवार अत्यंत दुखी हुआ । उसकी स्थिति देख कुछ मित्रों ने मिलकर सहायता तो कर दी लेकिन यह सहायता […]

Continue Reading

सहानुभूति एवं दानशीलता

सहानुभूति सामाजिक जीवन में सहानुभूति, सौहार्द का मानवीय संवेदनाओं में एक विशेष सहयोगत्मक स्थान होता है| सामाजिक जीवन में हम सहानुभूति, सौहार्द, पुर्ण व्यवहार से समाज के अन्य मित्रों, सहयोगियों, रिश्तेदारों, के दुख दर्द, कष्ट में सहानुभूति के शब्दों माध्यम से उनके दुख दर्द में सहभागिता दर्शाते हुए, अपनी भावनाऐ, संवेदनाएं, व्यक्त करते है| वास्तव […]

Continue Reading

समाज, संगठन और सहयोग 

समाज, संगठन और सहयोग  (सम सामयिक)  हमारा हैहयवंशीय क्षत्रिय समाज मूलत: मजदूरी और व्यवसाय से जुड़ा हुआ समाज है । समय के साथ तेजी से बदलते परिदृश्य के बावजूद आज भी लगभग 30% से अधिक स्वजातीय परिवार  मजदूरी करके जैसे तैसे अपना गुज़र बसर कर रहे हैं । मार्च 2020 से कोरोना महामारी के चलते […]

Continue Reading

युवाओं की अपेक्षाएं

आज के समय में कसेरा समाज में वैवाहिक स्थिति बहुत ही खराब है । नौजवान युवक एवं युवतियां अच्छे रिश्तो की तलाश में, जीवन के बहुमूल्य समय को खो रहे हैं। इस और ध्यान देने की बहुत जरूरत है इसको लेकर कोई योजना बनाई जाए।  समाज के सभी वर्गों से चाहे वृद्ध हो या युवा […]

Continue Reading

चुनाव लड़ने में पैसों की जरुरत

2017 नगर निकाय चुनाव मे हम सभी की निष्क्रियता के कारण शहरी क्षेत्रों में हम पिछलग्गू ही रहे। 2022 सामने है, हम दल को ताक पर रखे साथ ही 403 सीट पर दल टिकट दे वाह वाह अन्यथा सभी सीट पर हैहयवंशी जन सेवक को तैयार करे, 10000 कोई बड़ी बात नही है, प्रत्याशी बन […]

Continue Reading

फ्रंट लाइन का लाभ नहीं उठाया

आस्था सक्सेना ने फ्रंट लाइन का लाभ नहीं उठाया..18 प्लस के साथ ही वैक्सीन लगवाया कोटा 8 मई 2021, कोटा की बेटी राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित गायिका ब्रांड एम्बेसेडर चिकित्सा विभाग आस्था सक्सेना 2 वर्ष की उम्र से ही अपने माता-पिता संगीता देवेंद्र के साथ संगीत योग एवं 2016 से बेटी बचाओ बेटी पढाओ  ब्रांड एम्बेसेडर […]

Continue Reading

समाज के प्रति नकारात्मक मानसिकता एवं सामाजिक अलगाव

प्राय देखा जाता है कि समाज में कुछ लोग की नकारात्मक सोच, पृवृति होकर, यह कहते पाये जाते हैं कि समाज ने हमारे लिए क्या किया है जो हम समाज को समय दे, या समाज को सहयोग करे. ऐसे लोग प़ाय समाज में रिश्ते सिर्फ अपने स्वार्थ के आधार पर रखते हैं, जहाँ इनका स्वार्थ […]

Continue Reading

ऐतिहासिक विरासत, सम्पतियों को संरक्षित किया जाना चाहिए

खुरई तहसील जिला सागर के अन्तर्गत ग़ाम गडोला जागिर ग़ाम में हैहय बंशी क्षत्रिय समाज के शक्ति माता स्थल का जीर्णोद्धार कर मंदिर का निर्माण किया जाकर समाज की महत्वपूर्ण विरासत, सम्पत्ति को संरक्षित किया गया. इस शक्ति माता मंदिर को श्री चन्द्र कांत जी तार्मकार एवं उनके सहयोगियों ने समाज के सहयोग से मंदिर […]

Continue Reading

आओ समाज को होली के रंगो से भरे

सम्मानित  स्वजाति बंधुओं इस बार होली पर हम सब मिलकर इस बात पर विचार करे होली हमें इस बात का संदेश देती है कि सभी के जीवन में खुशियों का रंग भरा रहे। संवत्सर होलिका दहन से होता है। जो सभी बुराईयों को पीछे छोड़ जाने का, मन की क्लेश को अग्नि की भेंट चढ़ाने […]

Continue Reading

उच्च शिक्षा के लिये प्रशंसनीय सकारात्मक पहल

समाज की उन्नति एवं सर्वांगीण विकास के लिये, बुनियादी शिक्षा के साथ-साथ, उच्च शिक्षा एवं विषय विशेषज्ञता अतिआवश्यक है । शिक्षा जहाँ समाज की रीढ़ है वहीं, मनुष्य के तीसरे नेत्र के रूप में कार्य करती है । शिक्षा न केवल बुद्धि का परिष्कार करती है, बल्कि व्यक्ति, परिवार, समाज एवं राष्ट्र का सर्वांगीण विकास भी तय करती है । शिक्षा व्यक्ति की सोच को सकारात्मकता प्रदान करती है, जिसके फलस्वरूप उसकी बौद्धिक, तार्किक, व्यापारिक, आर्थिक एवं सामाजिक सहित सर्वांगीण उन्नति के द्वार स्वत: ही खुल जाते है ।

Continue Reading

मूर्ख व्यक्ति की विध्वंसक शक्तियां

यह लेख विश्वप्रसिद्ध लेखक “Carlo M Cipolla” की पुस्तक “The Basic Laws of Human Stupidity” मे दिए गये सिद्धांतों पर आधारित है | इसका समाज के किसी व्यक्ति से कोई सरोकार नहीं है, अगर ऐसा लगता है तो यह महज एक संयोग ही होगा | मूर्खता करने वालों को कम न आंकें समझदार लोगों की […]

Continue Reading

जिंदगी रंग बसंत

जिंदगी कई रंगों से सजी होती है इसीलिए जिंदगी कहलाती है । माघ माह का पांचवा दिन बसंत पंचमी के रूप में मनाया जाता है और बसंत भारतीय मौसम में सबसे ज्यादा खुशनुमा मौसम माना जाता है । यह मौसम न सिर्फ खेत खलिहानों में तेजस्विता लाता है बल्कि मानवीय जीवन मे प्रेम का अंकुरण […]

Continue Reading

काव्य कृति क्रांतिदूत

आपातकाल पर पहली पठनीय काव्य-कृति क्रंतिदूत: आपातकाल और श्री जयप्रकाश नारायण                         विमोचन दिनांक १६-०१-२०२१  प्रेस क्लब रायपुर –                                                 काव्य  कृति क्रांतिदूत के सम्बन्ध मैं दो शब्द श्री रामाधारी सिंह दिनकर जी ने लोकनायक जयप्रकाश नारायण जी के बारे में लिखा था जयप्रकाश नाम है आतुर हठी जवानी का जयप्रकाश नारायण जी विलक्षण प्रतिभा के धनी […]

Continue Reading

चुनौतियाँ और अवसर गुत्थमगुथा होते हैं 

चुनौतियाँ और अवसर गुत्थमगुथा होते हैं  जिंदगी पल पल बदलती है, हम सोचते हैं कुछ और हो जाता है कुछ, इस स्थिति केलिये कहा जाता है “होत वही जो राम रची राखा”, यानी मनुष्य कुछ भी सोचे होगा तो वही जो भगवान ने तय कर रखा है । इस बात से लोग यह आशय निकलते […]

Continue Reading

अविवाहित युवाओं की बढ़ती उम्र और संख्या के लिये जिम्मेदार कौन ?

अविवाहित युवाओं की बढ़ती उम्र और संख्या के लिये जिम्मेदार कौन ? उपरोक्त विषय अंतर्गत, हमारा ऐसा मानना है कि, वर्तमान परिवेश में विवाह की उम्र निर्धारित करनी ही चाहिये । जैसे लड़की की शादी 21 वर्ष एवं लड़के की शादी पच्चीस वर्ष में आवश्यक रूप से कर देनी चाहिए। क्युंकि इस उम्र के बाद […]

Continue Reading

युवाओं की समस्या के अनेकों कारण

युवाओं की समस्या के अनेकों कारण उक्त विषय आज लगभग सभी समाजों के समक्ष विचारणीय है ।इससे पहले कि यह समस्या विकराल रूप ले, इसके गंभीरता पूर्वक त्वरित समाधान की आवश्यक्ता है । ” विमर्श ” और रिश्तों की ” शुभ पहल ” सेवा परिवार द्वारा ” संवाद ” के रूप में सामाजिक समस्याओं पर […]

Continue Reading

अपनी अपनी ढपली-अपना अपना राग

व्यक्ति, समाज और संगठन..अपनी अपनी ढपली-अपना अपना राग.. ” विमर्श ” के इस अंक के लिये भी, हमेशा की है तरह मैंने वर्तमान परिवेश के अनुरूप ही विषय का चयन किया है । विषय के अनुरूप विचार साझा करने से पूर्व, आप सभी से विनम्र आग्रह है कि कोई व्यक्ति-विशेष अथवा समूह इन्हें व्यक्तिगत नहीं […]

Continue Reading

स्त्री और पुरूष परस्पर पूरक

अविवाहित युवकों की बढ़ती उम्र और संख्या : हम और आप मौन, जिम्मेदार कौन ?  उक्त विषय वर्तमान परिवेश की सम-सामयिक और ज्वलंत समस्या है, जिसने समूची मानवीय सभ्यता के भविश्य समक्ष प्रश्न चिन्ह लगा दिया है ! इस सम-सामयिक विषय को  गंभीरता से लेते हुए एक सकारत्मक, सार्थक एवं स्वस्थ्य विचार विमर्श की महती […]

Continue Reading

सामजिक चरित्र का निर्माण

सामजिक चरित्र का निर्माण किसी भी समाज के संगठन एवं सफल निर्माण और क्रियानावन के लिए समाज में  एक उच्च चरित्र का होना आवश्यक है| सामाजिक चरित्र किसी भी समाज के लिए एक स्थाई  और सुद्रिढ गुण है। सामाजिक संरचना के हम सभी सहभागी और प्रतिभागी है| हमारी ब्यक्तिगत चरित्र ही सामाजिक चरित्र को चरितार्थ […]

Continue Reading

विवाह सामाजिक संस्कार है

विवाह सामाजिक संस्कार है       प्राचीन समय में विवाह एक पवित्र विधान माना जाता था। इसमें युवक- युवतियां जीवन के एक ऐसे पाश में बंध जाते थे, जिसे मृत्यु के अतिरिक्त अन्य कोई शक्ति छिन्न-भिन्न नहीं कर सकती थी, लेकिन आज हमारे देश के युवक-युवतियाँ अपनी सभ्यता और संस्कृति से दूर हट कर पाश्चात्य […]

Continue Reading

युवकों के अनुपात में युवतियों की कमी

आजकल युवकों के  अनुपात में युवतियों की कमी  होना  संवाद के माध्यम से इस विषय पर परिचर्चा करने के लिए आयोजकों का धन्यवाद देना चाहती हु। विषय सच मे विचार करने योग्य है, वैसे तो इस विषय से जुड़ी बहुत सारी बाते है जिन पर हम अपने विचार रख सकते पर आज  मैं सिर्फ युवकों […]

Continue Reading

आपको चुनौतियों और अवसर  दोनों को समझना पड़ेगा 

आपको चुनौतियों और अवसर  दोनों को समझना पड़ेगा  आज के इस बदलते परिवेश में अगर इस समाज के साथ आगे बढ़ना है तो आपको चुनौतियों और अवसर  दोनों को समझना पड़ेगा और उससे भी पहले अगर जरूरत है तो यह समझना कि असल में चुनौती से तात्पर्य क्या है ?और अवसर क्या है जब तक […]

Continue Reading

अपने बच्चों के सबसे अच्छे गाइड बनें

समस्या मात्र हमारे ही समाज में नहीं लगभग सभी विकासशील समाज में है आपने “ अविवाहित युवकों की बढ़ती उम्र एवं संख्या ” जैसे समसामयिक एवं ज्वलंत मुद्दे पर आधारित विषय पर मुझे अपने  विचार व्यक्त करने का मौका दिया, सबसे पहले हम ” विमर्श ” और आप सभी का  हृदय से आभार व्यक्त करना […]

Continue Reading

नारी तू नारायणी

“नारी तू नारायणी ”  ” संवाद ” जैसे सकारात्मक कार्यक्रम का आयोजन करने के लिये सबसे पहले तो मैं आयोजकों को हृदय से धन्यवाद देना चाहती हूं । सामाजिक मुद्दों पर आधारित इस राष्ट्रीय बहस में आपने मुझे स्थान दिया यह मेरे लिये सौभाग्य की बात होगी । इस महत्वपूर्ण विषय के लिये मेरा विचार […]

Continue Reading

बेटी नहीं बचाओगे, तो बहू कहाँ से लाओगे

हैहयवंशीय क्षत्रिय समाज और विवाह योग्य युवतियों की संख्या में कमी.. आज..मैं आप सभी के सन्मुख जिस विषय पर अपने विचार  प्रस्तुत कर का प्रयास कर रहा हूँ । वर्तमान परिप्रेक्ष्य की उस कड़वी सच्चाई से हम और आप भली भांति परिचित हैं ! यह अलग बात है, जिस विषय से हमें आज कोई समस्या […]

Continue Reading

नई चुनौतियां और नए अवसर

नई चुनौतियां और नए अवसर कहते हैं जीवन में चुनौतियां न हो तो जीवन जीने में क्या मज़ा चुनौतियां ही मनुष्य को नए अवसर अनुभव प्रदान करती है चुनौती मनुष्य को बहुत कुछ सिखाती भी है तो बहुत कुछ छीन भी लेती है किसी ने सच ही कहा है अगर आप किसी रास्ते पर जा […]

Continue Reading

वर्ष 2021 में समाजिक सहयोग के कुछ संकल्प

वर्ष 2021 में समाजिक सहयोग के कुछ संकल्प वर्ष 2020 करोना महामारी की भेंट चढकर समाप्त हो गया. यह बर्ष जीवन में कुछ खट्टे मिठ्ठे कुछ अच्छे कुछ बूरे अनुभव छोड़ गया है. इस बर्ष में लाकडाऊन काल में  कईं व्यक्तियों, परिवारों के व्यापार, व्यवसाय, नोकरी, रोजगार को प़भावित किया. कईं समाज बंधु अपनी नोकरी […]

Continue Reading

युवकों की वैवाहिक समस्या का दानव

युवकों की वैवाहिक समस्या का दानव आज समाज में सबसे बड़ी समस्या समाज के युवकों के विवाह की है अक्सर सवाल किये जा रहे हैं समाज में अविवाहित युवकों की बढ़ती हुई संख्या पर  -^^समाज मौन ,जिम्मेदार कौन **पहले लड़की  के परिवार वाले अपनी बच्चियों के विवाह के लिए चिंचित रहते थे  जब किसी की […]

Continue Reading