डिजिटल विमर्श

रक्षा बन्धनः श्रवण नक्षत्र बिन बंधेगा इस बार रक्षा सूत्र

सत्य सनातन वैदिक हिन्दू धर्म  मे बहन-भाई के  पबित्र त्यौहार रक्षा बन्धन का बडा ही महत्व है इस पवित्र दिन की प्रतीक्षा बहने साबन मास के  आरम्भ होते ही करना आरम्भ कर देती है इस दिन बहनो  द्वारा अपने भाईयो तथा अशक्त लोगो द्वारा शक्तिशाली लोगो से अपनी...

अक्षय तृतीया – लोक जीवन की अभिव्यक्ति

सभ्यता मनुष्य की बाह्य प्रवत्ति मूलक प्रेरणाओं से विकसित हुई है। मनुष्य की अंतर्मुखी प्रवत्तियों से जिस तत्व का निर्माण होता है,यही संस्कृति कहलाती है। संस्कृति लोकजीवन का दर्पण होती है।जीवन में संतुलन बनाए रखना संस्कृति की सबसे बड़ी विशेषता है।...

टेसू बिन फागुन न होय

बसंत ऋतु आते ही अनायास लाल – लाल टेसुओं की याद हो आती है। बनन – बागन में टेसुओं का फूलना और अन्य वृक्षों से पत्तों का झड़ना यह प्रकृति प्रदत्त उपहार है।आमों का बौर लगना ,कोयल का कूकना व खेतों में सरसों का लहलहाना एक खुशनुमा माहौल बनाता...

स्तंभ - धर्म और संस्कृति

भारतीय धर्म और संस्कृति पर आधारित ज्ञानवर्धक लेख

हैहयवंशियो के परम संरक्षक गुरू दत्तात्रेय

(दत्तात्रेय पूर्णिमा ( जन्मोत्सव)   29 दिसम्बर 2020 ,  हैहयाव्द 1773 पर विशेष) अनाचार व अत्याचार हर युग मे हुआ है और जव- जव अत्याचार की  अति हुई तो तव- तव इस मर्त्यलोक पर भगवान् श्री विष्णु जी ने...

मंड़ई: छत्तीसगढ़ी संस्कृति, लोक-जीवन की अभिव्यक्ति

हरेली,  भोजली,  सवनही,  मातर,  पहुंचानी  और  गांव  बनाई  की  तरह  मंड़ई  का  आयोजन  भी छत्तीसगढ़ की एक सांस्कृतिक परंपरा है । ग्राम्य जन-जीवन परंपराओं के धरातल पर टिका हुआ है। अंचल के किसान को उस दिन की बेसब्री की...

नाचा: नारी पात्रों की भूमिका

नाचा को पहले जमाने में पेखन कहा जाता था। पेखन का अर्थ है – प्रेक्षण । छत्तीसगढ़ में नाचा-गम्मत कहलाता है। ‘मालवा’ में नाचा, राजस्थान का ख्याल, महाराष्ट्र का यह है तमाशा। नाचा का संपूर्ण विकास गम्मत में  ही  देखने ...

रामचरित आनंद: परशुराम संवाद

गातांक अंतिम पंक्ती … सकुचन सहित अब सीता आयीं, सखियां गावे मंगलाचार बधाई! कमल नयनी पलक ऊठायीं, प्रेम सहित वरमाला पहनाई ! चरण रघुवर के मस्तक लगायीं, रघुवर भी सिय हृदय बसाई ! अब सिय जिवन आधार हूँ, अनुपम जोड़ी सियाराम...

सहस्रबाहु अर्जुन के जीवन ऐतिहासिक विश्लेषण

भागवत पुराण में किर्तिविर्य सहस्रबाहु अर्जुन का राज्यकाल 85 हजार बर्ष एवं एक हजार भुजाओं होना बताया गया है, जोकि कल्पनिक, अविश्वसनीय होकर सत्य प़तित नहीं लगता है | इस प्रकार हमारे पुराणों में सहस्रबाहु का जीवन चरित्र...

सहस्रार्जुन जन्मोत्सव पर विशेष

हैहयवंश समाज के बंधुओं युग परिवर्तन ही सामाजिक जीवन का नए परिवेश धारण करने का मंत्र सिखाता है| जिस प्रकार हम प्रकृति के ऋतुओं के परिवर्तन होने पर उसी के अनुरूप वस्त्र आदि धारण कर अपना जीने का जीवन सुगम बनाते है| ठीक उसी...

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