डिजिटल विमर्श

हर गोली सीने पर झेलें…

हम क्रान्ति वीर वतन के दीवानेमौत मिले या मिले ज़िन्दगीडरना, घबराना क्या जाने?ग़दर, जंग, विद्रोह से खेलेंहर गोली सीने पर झेलेंसिर्फ लड़ें हम देश की खातिरदुश्मन को गन्ने-सा पेलें!क्रान्ति की बारूद जलाकरबम, पिस्तोल, तलवार उठायेंज्वालामुखी-सा गरज उठेंदेश...

सावन के स्वागत में

सावन के स्वागत में, बाँसुरी की तानें,कोयल भी कूक उठी, राग पूर्वा गाने।बूँदों की खुमारी से, अम्बुआ भी बहका,सृष्टि के यौवन से, मन उपवन दहका।घटा, मोर, पपीहे लगे गीत सुनाने,मनुहारें इन्द्रधनुषी, मधुरम मुस्कानें।तोड़ तट जज़्बाती, पावस नीर बरसा,सावन की...

प्राणों को अर्पित करें – भारत माँ के नाम

स्वतन्त्रता संग्राम था, प्राणों का बलिदान,आज़ादी अब हो गई, सियासी घमासान।मुल्क, मशालें, अलविदा, प्राणों की थी सेज,सरफरोशी हसरतें, आज़ादी लबरेज़।बम, धमाके, इन्क़लाब, क्रान्ति, जाँ-निसार,आज़ादी देकर गये, कुर्बानी के यार।ज़ेल, सलाखें, हथकड़ी, स्वाधीनता की...

स्तंभ - साहित्य सरोवर

बेहतरीन कविताओं का खजाना

कलयुग

भीख मांगे भिखमंगा मन राशन ले तउन भिखारी दान करे जुवारी मन अऊ भोग करे पुजारी । खेत जाये किसान अनाज रोपे बनिहार धान निकाले हार्वेस्टर मंडी ले जाये दलाल । किसान रोये दर दर नेता जोड़े खड़े हाथ अऊ मंद मंद मुस्काये लूट गे हे...

श्वासों की जुगलबंदी

जब योग सितार बजता है, तन में सुर-ताल सजता है। फ़िक्र करो उसकी यारों, जो दिल के साथ धड़कता है। संभावना है शिखरों की, जब योग का जादू चलता है। श्वासों की है जुगलबंदी, मौन का संगीत झरता है। गीता गा और दृष्टा बन, क्यों घर...

चार लाइणा: नशा रोको

नशा जहर है नशा जहर है मत अपनाओ क्यों खुद अपनी मौत बुलाओ. गुटके पर प्रतिबंध लगे प्रतिबंधों की लूट है लूट सके तो लूट, गुटके प्रतिबंध लगे दारू पर है छूट. दारू पर है छूट सिगरट पियो मजे से, मरना सबको इक दिन तुम तो जियो मजे...

हमारी धरोहर

प्रिय मित्रों विमर्श के इस अंक से हम एक नवीन स्तंभ को प्रारम्भ कर रहे हैं;– ‘हमारी धरोहर’। यह स्तंभ आपको कैसा लगा; इस पर आप सभी की प्रतिक्रिया प्रतीक्षारत है। ‘हमारी धरोहर’ स्तंभकार का एक...

विपस्सना

साक्षित्व भाव का योग है विपस्सनाआतिजाति श्वास को बस देखना ।इस पर देह उस पर है चैतन्यश्वास के हर छंद पर नज़र रखना।स्वयं में फिर हो जाएं मौन सागरभाव तरंगों का छोड़ यह झुनझुना।में देह नही, मैन नही, न श्वास हूँमें हूँ...

विश्वास और आशा जगाए रखें

विश्वास और आशा जगाए रखें  एक सुबह होगी ……जब लोगों के कंधों पर ऑक्सीजन सिलेंडर नहीं दफ्तर का बैग होगा, गली में एंबुलेंस नहीं स्कूल की वैन होगी, और भीड़ दवाखानों पर नहीं चाय-नाश्ते की दुकानों पर होगी, एक सुबह...

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