फगुनहटा होली

काव्य होली

फगुनहटा होली

जब फगुनहटा कुछ तेज चले,
समझो होली तब आई है।
जब घर घर गुझिया,पापड़ बने,
समझो होली तब आई है।

जब पिचकारी की हाट सजे,
जब रंगबालो की शाॅप सजे ,
जब मेवा, मावा साथ बिके,
समझो होली तब आई है।

जब फगुनहटा कुछ तेज चले,
समझो होली तब आई है ।।

जब गली गली मे आग जले,
फागुन के फूहड़ गीत बजे ,
जब रंग गुलाल कुछ तेज उड़े,
समझो होली तब आई है।

जब फगुनहटा कुछ तेज चले, 
समझो होली तब आई है ।
जब रात मे हल्की सी ठंड लगे,

फिर दिन मे धूप की टनक लगे,
जब हैपीहोली सब कहने लगे, 
समझो होली तब आई है ।

जब फगुनहटा कुछ तेज चले, 
समझो होली तब आई है ।।

जब ढोल नगाड़े साध बजे,
जब होली होली चहुँ ओर सुनें,
जब होलियारों की टोली चले, 
समझो होली तब आई है।

जब फगुनहटा कुछ तेज चले, 
समझो होली तब आई है ।।

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प्रमोद कुमार 'विदित' ताम्रकार
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