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सुन विद्यार्थी

योग व ध्यान जिंदा रख,
सम्यक पहचान जिंदा रख।
आत्मस्थ हो साधक बन,
वैदिक शान जिंदा रख।

जीवन मुक्ति दीप जला,
सत्व अनुष्ठान जिंदा रख।
ज्ञानपंथ का तू खड़ग ,
आत्मोउत्थान जिंदा रख।

गर्व, दृढ़ता, संयम, व्रत,
पवित्र साधन जिंदा रख।
शिष्य से शिवत्व की और,
उन्मत्त उड़ान जिंदा रख।

तू जिज्ञासु आर्थार्थी,
ज्ञान कमान जिंदा रख।
द्वंद मोह से परे चल,
योग चट्टान जिंदा रख।

ज्ञान यज्ञ की क्रिया में,
आत्म विज्ञान जिंदा रख।
स्वाध्याय को गुरु बना,
योग वितान जिंदा रख।

कर्म की तू माला जप,
अंतर्ध्यान जिंदा रख।
आस्था की चौखट पर,
दिल ईमान जिंदा रख।

 

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इस लेख के रचनाकार से मिलिये

गिरिराज सुधा

एम॰ कॉम॰, एम॰ फिल॰
कोटा, राजस्थान मे निवास
फोन: 9602054015

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